कोरोना की मार... तीन सौ ने निरस्त कराए शस्त्र लाइसेंस
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पहली बार बड़ी तादाद में शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने के आवेदन आने से हैरत में अफसर
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जिले में हैं 47 हजार शस्त्र लाइसेंस धारक, नए लाइसेंस के लिए आए सिर्फ 10 आवेदन
बरेली। असलहों का लाइसेंस लेने वालों की भीड़ पर कोरोना ने अंकुश लगा दिया है। इसके उलट बड़ी तादाद में लोगों ने अपने लाइसेंस निरस्त कराने के लिए आवेदन किया है। हालत यह है कि पिछले तीन महीनों में नए शस्त्र लाइसेंस के सिर्फ दस आवेदन जिला प्रशासन के पास पहुंचे हैं जबकि लाइसेंस निरस्त कराने के करीब तीन सौ आवेदन हुए हैं।
कोरोना महामारी के दौरान लोगों को इलाज के लिए घर और जमीन तक बेचनी पड़ी। तमाम लोगों का रोजगार भी छिन गया। माना जा रहा है कि तंगी के हालात में असलहों के रखरखाव और नवीनीकरण पर होने वाला खर्च असलहा रखने के शौक पर भारी पड़ रहा है। कलेक्ट्रेट के शस्त्र अनुभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले करीब तीन माह में शस्त्र लाइसेंस के सिर्फ दस आवेदन पहुंचे हैं, इनमें भी कई वरासत के हैं। दूसरी ओर शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने के लिए अब तक तीन सौ आवेदन पहुंच चुके हैं।
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शस्त्र अनुभाग के मुताबिक इतनी बड़ी तादाद में पहली बार लाइसेंस निरस्त कराने के आवेदन कार्यालय में पहुंचे हैं। इनमें तमाम लाइसेंस धारक ऐसे हैं जिनके बच्चे बाहर जाकर बस गए हैं और उन्होंने शस्त्र लाइसेंस को उत्तराधिकार में लेने से इनकार कर दिया है। एक कारण यह भी है कि तमाम कंपनियां दोनाली बंदूक के लाइसेंस धारक को ही गार्ड और चौकीदार जैसे पदों पर नियुक्त कर रही हैं। लिहाजा जिनके पास एकनाली बंदूक है और वे उसे दोनाली बंदूक के लाइसेंस में तब्दील नहीं करा पा रहे हैं, उन्होंने भी लाइसेंस निरस्त कराने का आवेदन किया है।
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नवीनीकरण का बढ़ा शुल्क भी बना वजह
पहले बंदूक, रिवॉल्वर, राइफल आदि के लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए अलग-अलग फीस निर्धारित थी जो अधिकतम सौ रुपये तक थी लेकिन अब नवीनीकरण का शुल्क ढाई हजार रुपये तक कर दिया गया है। बताते हैं कि इसका सबसे ज्यादा असर एटीएम या कॉलोनी की सुरक्षा में तैनात उन गार्डों पर पड़ा है जिनका मासिक वेतन बमुश्किल आठ से दस हजार रुपये होता है। जाहिर है कि नवीनीकरण पर ढाई हजार रुपये और वैरिफिकेशन पर तीन-चार हजार रुपये का खर्च करना ऐसे लोगों के लिए मुश्किल हो गया है।
2019-20 में हुए थे तीन हजार नए आवेदन
नए लाइसेंस बनाने पर लगी रोक 2018 में हाईकोर्ट ने हटाई थी जिसके बाद 2019 में सरकार ने लाइसेंस बनाने का शासनादेश जारी किया था। इसके बाद साल भर में करीब नए शस्त्र लाइसेंस के लिए करीब तीन हजार आवेदन हुए थे। हालांकि ये सब लंबित हैं। शस्त्र अनुभाग के मुताबिक शासन ने सिर्फ अपराध पीड़ित, वरासत, व्यापारी/उद्यमी, बैंक/संस्थागत/वित्तीय संस्था, प्रवर्तन दल कर्मी, सैनिक/अर्द्धसैनिक/पुलिस बल, एमएलए/एमएलसी/एमपी, राज्य/राष्ट्रीय/अतंर्राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज के ही शस्त्र लाइसेंस बनाने की अनुमति दी है। लंबित आवेदन दूसरी श्रेणियों के हैं।
जिले में हैं 47 हजार लाइसेंस धारक
शस्त्र अनुभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक बरेली में 47 हजार लोग शस्त्र लाइसेंस धारक हैं। इनमें पुलिस, अर्द्धसैनिक, सैनिक और सरकारी कर्मचारियों की तादाद करीब 20 हजार है।
कोरोना की वजह से आर्थिक तंगी का शिकार हुए तमाम लोग नवीनीकरण का कई गुना बढ़ा शुल्क दे पाने की हालत में नहीं हैं। कई ऐसे भी हैं जिनके बच्चों ने लाइसेंस अपने नाम कराने से इनकार कर दिया है। शस्त्र की निगरानी और बेवजह दौड़भाग से बचने के लिए भी लोग शस्त्र लाइसेंस निरस्त करा रहे हैं। नए लाइसेंस नहीं बन रहे हैं। - गुरजीत सिंह बिंद्रा, सचिव बरेली शस्त्र विक्रेता संघ
जिन लोगों ने भी शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने के लिए आवेदन किया है। उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएंगेे। लोग लाइसेंस क्यों निरस्त करा रहे हैं, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। - मदन कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
जिले में हैं 47 हजार शस्त्र लाइसेंस धारक, नए लाइसेंस के लिए आए सिर्फ 10 आवेदन बरेली। असलहों का लाइसेंस लेने वालों की भीड़ पर कोरोना ने अंकुश लगा दिया है। इसके उलट बड़ी तादाद में लोगों ने अपने लाइसेंस निरस्त कराने के लिए आवेदन किया है। हालत यह है कि पिछले तीन महीनों में नए शस्त्र लाइसेंस के सिर्फ दस आवेदन जिला प्रशासन के पास पहुंचे हैं जबकि लाइसेंस निरस्त कराने के करीब तीन सौ आवेदन हुए हैं।
कोरोना महामारी के दौरान लोगों को इलाज के लिए घर और जमीन तक बेचनी पड़ी। तमाम लोगों का रोजगार भी छिन गया। माना जा रहा है कि तंगी के हालात में असलहों के रखरखाव और नवीनीकरण पर होने वाला खर्च असलहा रखने के शौक पर भारी पड़ रहा है। कलेक्ट्रेट के शस्त्र अनुभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले करीब तीन माह में शस्त्र लाइसेंस के सिर्फ दस आवेदन पहुंचे हैं, इनमें भी कई वरासत के हैं। दूसरी ओर शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने के लिए अब तक तीन सौ आवेदन पहुंच चुके हैं।
शस्त्र अनुभाग के मुताबिक इतनी बड़ी तादाद में पहली बार लाइसेंस निरस्त कराने के आवेदन कार्यालय में पहुंचे हैं। इनमें तमाम लाइसेंस धारक ऐसे हैं जिनके बच्चे बाहर जाकर बस गए हैं और उन्होंने शस्त्र लाइसेंस को उत्तराधिकार में लेने से इनकार कर दिया है। एक कारण यह भी है कि तमाम कंपनियां दोनाली बंदूक के लाइसेंस धारक को ही गार्ड और चौकीदार जैसे पदों पर नियुक्त कर रही हैं। लिहाजा जिनके पास एकनाली बंदूक है और वे उसे दोनाली बंदूक के लाइसेंस में तब्दील नहीं करा पा रहे हैं, उन्होंने भी लाइसेंस निरस्त कराने का आवेदन किया है।
नवीनीकरण का बढ़ा शुल्क भी बना वजह
पहले बंदूक, रिवॉल्वर, राइफल आदि के लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए अलग-अलग फीस निर्धारित थी जो अधिकतम सौ रुपये तक थी लेकिन अब नवीनीकरण का शुल्क ढाई हजार रुपये तक कर दिया गया है। बताते हैं कि इसका सबसे ज्यादा असर एटीएम या कॉलोनी की सुरक्षा में तैनात उन गार्डों पर पड़ा है जिनका मासिक वेतन बमुश्किल आठ से दस हजार रुपये होता है। जाहिर है कि नवीनीकरण पर ढाई हजार रुपये और वैरिफिकेशन पर तीन-चार हजार रुपये का खर्च करना ऐसे लोगों के लिए मुश्किल हो गया है।2019-20 में हुए थे तीन हजार नए आवेदन
नए लाइसेंस बनाने पर लगी रोक 2018 में हाईकोर्ट ने हटाई थी जिसके बाद 2019 में सरकार ने लाइसेंस बनाने का शासनादेश जारी किया था। इसके बाद साल भर में करीब नए शस्त्र लाइसेंस के लिए करीब तीन हजार आवेदन हुए थे। हालांकि ये सब लंबित हैं। शस्त्र अनुभाग के मुताबिक शासन ने सिर्फ अपराध पीड़ित, वरासत, व्यापारी/उद्यमी, बैंक/संस्थागत/वित्तीय संस्था, प्रवर्तन दल कर्मी, सैनिक/अर्द्धसैनिक/पुलिस बल, एमएलए/एमएलसी/एमपी, राज्य/राष्ट्रीय/अतंर्राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज के ही शस्त्र लाइसेंस बनाने की अनुमति दी है। लंबित आवेदन दूसरी श्रेणियों के हैं।
जिले में हैं 47 हजार लाइसेंस धारक
शस्त्र अनुभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक बरेली में 47 हजार लोग शस्त्र लाइसेंस धारक हैं। इनमें पुलिस, अर्द्धसैनिक, सैनिक और सरकारी कर्मचारियों की तादाद करीब 20 हजार है।कोरोना की वजह से आर्थिक तंगी का शिकार हुए तमाम लोग नवीनीकरण का कई गुना बढ़ा शुल्क दे पाने की हालत में नहीं हैं। कई ऐसे भी हैं जिनके बच्चों ने लाइसेंस अपने नाम कराने से इनकार कर दिया है। शस्त्र की निगरानी और बेवजह दौड़भाग से बचने के लिए भी लोग शस्त्र लाइसेंस निरस्त करा रहे हैं। नए लाइसेंस नहीं बन रहे हैं। - गुरजीत सिंह बिंद्रा, सचिव बरेली शस्त्र विक्रेता संघ
जिन लोगों ने भी शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने के लिए आवेदन किया है। उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएंगेे। लोग लाइसेंस क्यों निरस्त करा रहे हैं, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। - मदन कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट