{"_id":"570179374f1c1b6c25c81639","slug":"copies-of-last-year-solved-math-questions","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिछले साल की कॉपियों में हल कर दिए गणित के सवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिछले साल की कॉपियों में हल कर दिए गणित के सवाल
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Mon, 04 Apr 2016 01:44 AM IST
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पूर्वांचल के परीक्षा केंद्र से मूल्यांकन को यहां आईं हाईस्कूल गणित की कई कापियां पिछले साल की मिली हैं। हालांकि ये इसी साल की बोर्ड परीक्षा में इस्तेमाल हुई हैं। इन पर जिस तरह से सवालों को हल किया गया है, उसे देखकर परीक्षक किसी विशेषज्ञ के जरिए लिखा मान रहे हैं। इन्हें बाहर से लिखवाकर परीक्षा केंद्र पर लाने का अनुमान लगाया जा रहा है।
पिछले साल की बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल गणित के परीक्षार्थियों को तीन सवालों के जवाब लिखने थे इसलिए कापी पर मूल्यांकन के कालम में क, ख, ग के विकल्प ही थे लेकिन इस साल इन परीक्षार्थियों को छह सवालों के जवाब लिखने हैं इसलिए इस साल की कापी पर मूल्यांकन के लिए क से च तक विकल्प हैं। ऐसे में मूल्यांकन को मिले बंडल में क, ख, ग कालम वाली कापियां पाकर शिक्षक हैरान रह गए। इन कापियों पर लिखी राइटिंग ने उनकी हैरानी और बढ़ा दी। एक परीक्षक ने बताया कि इस कापी पर जिसने भी सवालों के जवाब लिखे हैं, वह किसी विशेषज्ञ की ओर से ही लिखे गए हैं। उन्हें हाईस्कूल स्तर का कोई परीक्षार्थी नहीं लिख सकता। इतना ही नहीं, इस परीक्षा केंद्र की इस साल की कापियों के साथ लगाई गई बी कापियों की राइटिंग ए कापी की राइटिंग से अलग है और ए के बाद बी कापी पर लिखे जवाब का तारतम्य भी नहीं बन रहा है। वैसे, मूल्यांकन केंद्र के उपनियंत्रक ने इस मामले को अभी यूपी बोर्ड या शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नहीं भेजा है। उनका कहना है कि अगर अधिकारी रिपोर्ट मांगेंगे तभी भेजेंगे।
फोटो...
अंधेरे में तय हो रहा भविष्य
बरेली। जीआईसी में बनाए गए मूल्यांकन केंद्र का हाल बेहाल है। बिजली न होने से कई कमरों में अंधेरा है। पंखे न चलने से परीक्षक पसीने से तरबतर होकर कापियां जांच रहे हैं। रविवार को संयुक्त शिक्षा निदेशक शिवप्रकाश द्विवेदी ने निरीक्षण किया तो इस समस्या से रूबरू हुए। परीक्षकों ने बताया कि पंखे चलने की बात छोड़िए, बल्ब न जलने से अंधेरे में कापियों पर लिखा पढ़ भी नहीं पा रहे है। कई परीक्षक कमरे की खिड़की की ओर खड़े होकर कापियां जांच रहे थे। जेडी ने उपनियंत्रक प्रिंसिपल आरके सिंह को तत्काल लाइट की व्यवस्था करने के आदेश दिए लेकिन प्रिंसिपल विवशता जताने लगे। बोले- लाइट नहीं आ रही है और जनरेटर के इंतजाम के लिए कोई बजट नहीं है। जेडी ने उन्हें विद्यालय मद से जनरेटर की व्यवस्था करने की हिदायत दी। मूल्यांकन केंद्र पर परीक्षकों को पानी का भी पर्याप्त इंतजाम नहीं पाया गया। वहीं, जीआईसी केंद्र पर मूल्यांकन को पहुंचीं एक शिक्षिका ने रिटायर्ड लिपिक पर मोबाइल छीनकर तोड़ने का आरोप लगाया। शिक्षिका ने इसकी शिकायत प्रिंसिपल से की।
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इंसेट...
बंडल आए, कॉपियां नहीं
बिशप मंडल इंटर कालेज के मूल्यांकन केंद्र पर गुजराती और कन्नड़ विषय की हाईस्कूल कापियों के बंडल तो यूपी बोर्ड ने भिजवाए हैं लेकिन उनमें एक भी कापी नहीं है। उपनियंत्रक प्रिंसिपल जगमोहन सिंह ने बताया कि उर्दू की कापियां जांचने के लिए नियुक्त 16 परीक्षकों में से अभी तक सिर्फ पांच ही आए हैं। वहीं, इस केंद्र पर देर से पहुंचे शिक्षकों से प्रिंसिपल ने मूल्यांकन नहीं कराया तो विरोध में वह हंगामा करने लगे।
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पिछले साल की बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल गणित के परीक्षार्थियों को तीन सवालों के जवाब लिखने थे इसलिए कापी पर मूल्यांकन के कालम में क, ख, ग के विकल्प ही थे लेकिन इस साल इन परीक्षार्थियों को छह सवालों के जवाब लिखने हैं इसलिए इस साल की कापी पर मूल्यांकन के लिए क से च तक विकल्प हैं। ऐसे में मूल्यांकन को मिले बंडल में क, ख, ग कालम वाली कापियां पाकर शिक्षक हैरान रह गए। इन कापियों पर लिखी राइटिंग ने उनकी हैरानी और बढ़ा दी। एक परीक्षक ने बताया कि इस कापी पर जिसने भी सवालों के जवाब लिखे हैं, वह किसी विशेषज्ञ की ओर से ही लिखे गए हैं। उन्हें हाईस्कूल स्तर का कोई परीक्षार्थी नहीं लिख सकता। इतना ही नहीं, इस परीक्षा केंद्र की इस साल की कापियों के साथ लगाई गई बी कापियों की राइटिंग ए कापी की राइटिंग से अलग है और ए के बाद बी कापी पर लिखे जवाब का तारतम्य भी नहीं बन रहा है। वैसे, मूल्यांकन केंद्र के उपनियंत्रक ने इस मामले को अभी यूपी बोर्ड या शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नहीं भेजा है। उनका कहना है कि अगर अधिकारी रिपोर्ट मांगेंगे तभी भेजेंगे।
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अंधेरे में तय हो रहा भविष्य
बरेली। जीआईसी में बनाए गए मूल्यांकन केंद्र का हाल बेहाल है। बिजली न होने से कई कमरों में अंधेरा है। पंखे न चलने से परीक्षक पसीने से तरबतर होकर कापियां जांच रहे हैं। रविवार को संयुक्त शिक्षा निदेशक शिवप्रकाश द्विवेदी ने निरीक्षण किया तो इस समस्या से रूबरू हुए। परीक्षकों ने बताया कि पंखे चलने की बात छोड़िए, बल्ब न जलने से अंधेरे में कापियों पर लिखा पढ़ भी नहीं पा रहे है। कई परीक्षक कमरे की खिड़की की ओर खड़े होकर कापियां जांच रहे थे। जेडी ने उपनियंत्रक प्रिंसिपल आरके सिंह को तत्काल लाइट की व्यवस्था करने के आदेश दिए लेकिन प्रिंसिपल विवशता जताने लगे। बोले- लाइट नहीं आ रही है और जनरेटर के इंतजाम के लिए कोई बजट नहीं है। जेडी ने उन्हें विद्यालय मद से जनरेटर की व्यवस्था करने की हिदायत दी। मूल्यांकन केंद्र पर परीक्षकों को पानी का भी पर्याप्त इंतजाम नहीं पाया गया। वहीं, जीआईसी केंद्र पर मूल्यांकन को पहुंचीं एक शिक्षिका ने रिटायर्ड लिपिक पर मोबाइल छीनकर तोड़ने का आरोप लगाया। शिक्षिका ने इसकी शिकायत प्रिंसिपल से की।
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बिशप मंडल इंटर कालेज के मूल्यांकन केंद्र पर गुजराती और कन्नड़ विषय की हाईस्कूल कापियों के बंडल तो यूपी बोर्ड ने भिजवाए हैं लेकिन उनमें एक भी कापी नहीं है। उपनियंत्रक प्रिंसिपल जगमोहन सिंह ने बताया कि उर्दू की कापियां जांचने के लिए नियुक्त 16 परीक्षकों में से अभी तक सिर्फ पांच ही आए हैं। वहीं, इस केंद्र पर देर से पहुंचे शिक्षकों से प्रिंसिपल ने मूल्यांकन नहीं कराया तो विरोध में वह हंगामा करने लगे।