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Bareilly News: मरीजों को सता रही ठंड, चिकित्सक के खाली कक्ष भी गर्म
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बरेली। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच जिला अस्पताल में भर्ती मरीज एक अदद कंबल के भरोसे हैं। इमरजेंसी में हीटर लगे हैं, पर वे चलते नहीं। अन्य कई वार्ड में भी ठंड से निजात के इंतजाम नाकाफी हैं। उधर, चिकित्सक और स्टाफ के खाली कक्ष को भी हीटर गर्म कर रहे हैं।
शासन की ओर से दस दिन पूर्व ही जिला अस्पताल सहित स्वास्थ्य केंद्राें को ठंड से बचाव के इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। तब जिला अस्पताल प्रशासन ने सभी वार्डों में हीटर लगे होने का दावा किया था। अमर उजाला टीम ने बुधवार को इसकी पड़ताल की तो दावे कागजी साबित हुए। वार्ड में भर्ती मरीज एक अदद कंबल से खुद को ढकने की नाकाम कोशिश करते दिखे, वहीं तीमारदार बाहर अलाव सेंकते नजर आए।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी फीमेल और मेल वार्ड में एक-एक रूम हीटर लगे दिखे, पर दोनों बंद थे। स्टाफ नर्स कक्ष में कई नर्स हीटर के पास बैठीं दिखीं। पूछने पर कहा कि किसी ने प्लग निकाल दिया होगा, इसलिए बंद हैं। हालांकि, प्लग लगाने के लिए उनमें से कोई आगे नहीं बढ़ा।
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ऑर्थो, टीबी वार्ड में नहीं लगे हीटर, स्टाफ
का जबाव- जब मिलेगा तभी तो चलाएंगे
जिला अस्पताल के पुराने परिसर में बाहर पार्किंग के पास तीमारदार अलाव जलाकर ठिठुरन से निजात पाने की कोशिश करते दिखे। अंदर पोस्ट ऑपरेशन मेल ऑर्थो वार्ड में 21 मरीज भर्ती थे पर हॉल में एक अदद हीटर, ब्लोअर या वार्मर नहीं था। यही स्थिति फीमेल वार्ड की रही। मौजूद स्टाफ ने बताया कि उपकरण मिले ही नहीं। मिलेंगे तभी तो चलाएंगे। चिकित्सक नदारद थे, पर कुर्सी के पास हीटर जल रहा था।
रैन बसेरे में न हीटर न रजाई
अस्पताल के रैन बसेरे में न ओढ़ने के लिए रजाई थी, न ही हीटर लगे थे। शौचालय गंदे पड़े थे। कुछ लोग बेड पर लेटे थे। पूछने पर तीमारदार अन्नू ने बताया कि वे अपना कंबल लेकर आए हैं। रजाई-गद्दे मिलेंगे या नहीं, यहां पर कोई जानकारी देने वाला नहीं है। पानी गर्म करने तक की व्यवस्था नहीं है। अलाव भी नहीं जल रहे हैं।
प्रत्येक वार्ड में हीटर लगे हैं। इसके उपयोग के निर्देश दिए हैं। रैन बसेरे में भी सारी व्यवस्था है, पर खुला रखने पर लोग उसे साथ लेकर चले जाते हैं। इसलिए मांगने पर ही दिया जाता है। - डॉ. अलका शर्मा, एडी एसआईसी, जिला अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
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शासन की ओर से दस दिन पूर्व ही जिला अस्पताल सहित स्वास्थ्य केंद्राें को ठंड से बचाव के इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। तब जिला अस्पताल प्रशासन ने सभी वार्डों में हीटर लगे होने का दावा किया था। अमर उजाला टीम ने बुधवार को इसकी पड़ताल की तो दावे कागजी साबित हुए। वार्ड में भर्ती मरीज एक अदद कंबल से खुद को ढकने की नाकाम कोशिश करते दिखे, वहीं तीमारदार बाहर अलाव सेंकते नजर आए।
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जिला अस्पताल के इमरजेंसी फीमेल और मेल वार्ड में एक-एक रूम हीटर लगे दिखे, पर दोनों बंद थे। स्टाफ नर्स कक्ष में कई नर्स हीटर के पास बैठीं दिखीं। पूछने पर कहा कि किसी ने प्लग निकाल दिया होगा, इसलिए बंद हैं। हालांकि, प्लग लगाने के लिए उनमें से कोई आगे नहीं बढ़ा।
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ऑर्थो, टीबी वार्ड में नहीं लगे हीटर, स्टाफ
का जबाव- जब मिलेगा तभी तो चलाएंगे
जिला अस्पताल के पुराने परिसर में बाहर पार्किंग के पास तीमारदार अलाव जलाकर ठिठुरन से निजात पाने की कोशिश करते दिखे। अंदर पोस्ट ऑपरेशन मेल ऑर्थो वार्ड में 21 मरीज भर्ती थे पर हॉल में एक अदद हीटर, ब्लोअर या वार्मर नहीं था। यही स्थिति फीमेल वार्ड की रही। मौजूद स्टाफ ने बताया कि उपकरण मिले ही नहीं। मिलेंगे तभी तो चलाएंगे। चिकित्सक नदारद थे, पर कुर्सी के पास हीटर जल रहा था।
रैन बसेरे में न हीटर न रजाई
अस्पताल के रैन बसेरे में न ओढ़ने के लिए रजाई थी, न ही हीटर लगे थे। शौचालय गंदे पड़े थे। कुछ लोग बेड पर लेटे थे। पूछने पर तीमारदार अन्नू ने बताया कि वे अपना कंबल लेकर आए हैं। रजाई-गद्दे मिलेंगे या नहीं, यहां पर कोई जानकारी देने वाला नहीं है। पानी गर्म करने तक की व्यवस्था नहीं है। अलाव भी नहीं जल रहे हैं।
प्रत्येक वार्ड में हीटर लगे हैं। इसके उपयोग के निर्देश दिए हैं। रैन बसेरे में भी सारी व्यवस्था है, पर खुला रखने पर लोग उसे साथ लेकर चले जाते हैं। इसलिए मांगने पर ही दिया जाता है। - डॉ. अलका शर्मा, एडी एसआईसी, जिला अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो