आइसोलेशन वार्ड वाले कोच अब रेलवे की मुसीबत बनने लगे, नई ट्रेनों के संचालन में दिक्कत
- ट्रेनों की संख्या बढ़ने पर प्लेटफार्म की उपलब्धता की दिख रही दिक्कत
- आठ महीने में एक भी कोविड मरीज भर्ती नहीं हुआ इन कोच में
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रेलवे बोर्ड के निर्देश पर इज्जतनगर रेलवे वर्कशाप ने मई माह में कोविड मरीजों को भर्ती करने के लिए पुराने करीब चार सौ कोचों का आइसोलेशन वार्ड में तब्दील किया था। ताकि अस्पताल में जगह न होने पर कोविड मरीजों को आईसोलेशन कोच में भर्ती किया जा सके। दस कोच सिटी स्टेशन और दस कोच जंक्शन के प्लेटफार्म वाली पटरियों पर खड़े किए गए। जंक्शन पर सेकेंड एंट्री की तरफ मरीजों की एंबुलेंस सीधे प्लेटफार्म पर पहुंच सके, इसके लिए रेलवे ने लाखों रुपये खर्च किए थे।
सूत्रों का कहना है कि एक कोच आइसोलेशन वार्ड में तब्दील करने में करीब 50 हजार रुपये का खर्च आया। एक कोच में एक समय में आठ मरीज भर्ती किए जा सकते हैं। कोच की ऊपर और बीच की बर्थ निकालकर केवल नीचे की बर्थ छोड़ी गई, ताकि मरीज को उठने बैठने और स्वास्थ्यकर्मियों को इलाज करने में दिक्कत न हो। कोच तैयार करने के बाद उन्हें स्वास्थ्य विभाग को सुपुर्द कर दिया गया था।
जंक्शन पर प्लेटफार्म छह और सिटी स्टेशन के प्लेटफार्म दो पर कोच खड़े किए गए थे, लेकिन अब तक इन कोचों में कोई भी मरीज भर्ती नहीं किया गया। अब दिसंबर में कोरोना की दूसरी लहर देखते हुए कोच जल्द नहीं हट सकेंगे। इससे सबसे अधिक दिक्कत ट्रेनों के संचालन को होगी। रेलवे बोर्ड जल्द ही पैसेंजर ट्रेनों को चलाने का आदेश दे सकता है, ऐेसे में ट्रेनों के लिए प्लेटफार्म खाली न मिलने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
ट्रेनें चलने पर आइसोलेशन वार्ड वाले कोच को प्रशासन की सुविधा के अनुसार शिफ्ट किया जाएगा। कोच अभी स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में हैं। कोरोना की दूसरी लहर देखते हुए कोचों के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है। -आशुतोष पंत, डीआरएम, इज्जतनगर रेल मंडल