{"_id":"5eefbfd58ebc3e42c8355adb","slug":"closets-of-temples-closed-with-sutak-lamps-of-ghee-burned-on-the-doors-of-houses-bareilly-news-bly410014926","type":"story","status":"publish","title_hn":"सूतक लगने के साथ बंद हुए मंदिरों के कपाट, घरों के दरवाजे पर जलाए गए घी के चिराग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सूतक लगने के साथ बंद हुए मंदिरों के कपाट, घरों के दरवाजे पर जलाए गए घी के चिराग
सार
आसमान का नजारा बदला और मौसम भी। सूरज के प्रचंड ताप को चंद्रमा की शीतल छाया ने धरती तक आने से रोका तो तापमान एकाएक कई डिग्री नीचे आ गिरा। धरती पर गिरने वाले सूर्य के चमकदार प्रकाश पर काली छाया में तब्दील होते देखना नई पीढ़ी के लिए यह रोमांचित करने वाला तजुर्बा था जिसने उनकी उत्सुकता को इतना बढ़ाया कि विज्ञानियों और ज्योतिषाचार्यों की मनाही के बावजूद वे खुद को सूर्य ग्रहण देखने से नहीं रोक पाए। तमाम लोगों ने यह उत्सुकता सुरक्षा के जरूरी साधनों के जरिये सूर्य ग्रहण देखकर पूरी की तो तमाम लोगों ने इसके बगैर ही इस दुर्लभ खगोलीय घटना का नजारा किया।
विज्ञापन
बरेली में सूर्य ग्रहण देखते लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
विस्तार
बरेली। शनिवार रात सूतक लगने से पहले ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। रविवार को दोपहर बाद ग्रहण के मोक्ष के बाद शाम को मंदिरों में साफ-सफाई की गई और उसके बाद कपाट खोले गए। ग्रहण के दौरान देव प्रतिमाएं भी कपड़े से ढकी रहीं। घर के बाहर लोगों ने घी के दीपक जलाए ताकि ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा अंदर प्रवेश न कर सके।
सूर्यग्रहण के कारण रविवार सुबह रोज की तरह मंदिरों के कपाट नहीं खुले। दोपहर ढाई बजे के बाद मंदिरों में धुलाई करने के बाद भगवान को भी स्नान कराया गया और फिर नए कपड़े पहनाकर शृंगार किया गया। शाम पांच बजे मंदिर खोल दिए गए। हालांकि फिर भी भक्तों की भीड़ कम ही रही। घरों में सूर्य ग्रहण के बाद लोगों ने स्नान करके दान करने के बाद भोजन ग्रहण किया। ग्रहण के दौरान शहर के बांके बिहारी मंदिर, हरि मंदिर, वनखंडी नाथ, धोपेश्वरनाथ, अलखनाथ, नौ देवी, चौरासी घंटा, त्रिवटीनाथ मंदिर आदि सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सूर्यग्रहण के कारण रविवार सुबह रोज की तरह मंदिरों के कपाट नहीं खुले। दोपहर ढाई बजे के बाद मंदिरों में धुलाई करने के बाद भगवान को भी स्नान कराया गया और फिर नए कपड़े पहनाकर शृंगार किया गया। शाम पांच बजे मंदिर खोल दिए गए। हालांकि फिर भी भक्तों की भीड़ कम ही रही। घरों में सूर्य ग्रहण के बाद लोगों ने स्नान करके दान करने के बाद भोजन ग्रहण किया। ग्रहण के दौरान शहर के बांके बिहारी मंदिर, हरि मंदिर, वनखंडी नाथ, धोपेश्वरनाथ, अलखनाथ, नौ देवी, चौरासी घंटा, त्रिवटीनाथ मंदिर आदि सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे।
विज्ञापन
40 प्रतिशत कम हुआ उजाला
सूर्य ग्रहण सुबह 10.23 से शुरू हुआ। लोग उम्मीद कर रहे थे कि दोपहर 12 बजे अंधेरा छा जाएगा और दिन में तारे दिखेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। साठ प्रतिशत उजाला रहा जबकि लखनऊ, देहरादून, दिल्ली आदि शहरों में अंधेरा छा जाने की खबरें आईं। ग्रहण के दौरान आसमान पर बादल नहीं थे लिहाजा सूर्य में आए परिवर्तन साफ दिखाई दिए।
विज्ञापन