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सिविल इंक्लेव नहीं, अब मिनी एयरपोर्ट बनेगा
ब्ययूराो अमर उजाला बरेली
Updated Thu, 12 May 2016 01:18 AM IST
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बरेली के लोगों के लिए अच्छी खबर है। यहां के लोगों को दूसरे शहरों को उड़ान भरने के लिए अब मिनी एयरपोर्ट स्थापित होगा। एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया ने सविल इंक्लेव के स्थान पर मिनी एयरपोर्ट स्थापित करने को हरी झंडी दे दी है। साथ में 50 करोड़ रुपये भी मंजूर किए हैं, यह राशि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय से एयरपोर्ट अथारिटी को विकास के लिए मिलेगी जो सिविल इंक्लेव के लिए प्रस्तावित राशि से अलग है। इसके लिए उपलब्ध 10 हेक्टेयर जमीन को कम बताते हुए दो हेक्टेयर जमीन और मांगी गई है। इस बारे में लखनऊ में हुई बैठक में निदेशक नागरिक उड्डयन ने डीएम को जानकारी दी। साथ ही अतिरिक्त भूमि भी किसानों से बैनामा के आधार पर उपलब्ध कराने के बारे में कहा है।
एयरफोर्स के साथ एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया ने छह साल पहले बरेली में सिविल इंक्लेव स्थापित कराने के लिए अनुबंध किया था। जिसमें एयरफोर्स के एयरबेस के कुछ हिस्से को इस्तेमाल करने पर सहमति बन गई थी। उसी के सटी मुड़िया अहमद नगर की 10 हेक्टेयर जमीन में सिविल इंक्लेव की स्थापना की जानी थी। प्रदेश सरकार और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालयय ने विचार विमर्श किया और मुरादाबाद सहित कुछ शहरों से सिविल इंक्लेव स्थापित न करने का फैसला लिया था। साथ में यह भी तर्क रखा कि बरेली का प्रस्तावित सिविल इंक्लेव मुरादाबाद के नजदीक है। उत्तराखंड के कुछ भी शहर बरेली के नजदीक है। ऐसे में बरेली में प्रस्तावित सिविल इंक्लेव को अपग्रेड करके मिनी एयरपोर्ट बनवा दिया जाए। जिसका लाभ मुरादाबाद मंडल के अलावा उत्तराखंड के हल्द्वानी, ऊधम सिंहनगर, लालकुआ, काठगोदाम के लोगों को भी मिल सकेगा। इन शहरों से बरेली आने-जाने के लिए रोड भी बेहतर है। यहां मिनी एयरपोर्ट स्थापित कराने के पीछे सेना, वायु सेना क्षेत्र के अलावा आईवीआरआई, आईटीबीटी, एनईआर का इज्जतनगर मंडल कार्यालय । डीजल लोकोमोटिव वर्कशाप होने का तर्क दिया जा रहा है। इसके अलावा डीएमयू की वर्कशाप भी यहां प्रस्तावित है।
ये है प्रगति
95 किसानों की 10 हेक्टेयर जमीन बैनामा के अधार पर 53,10,30,000 रुपये से खरीदी जानी थी। इसमें से 38 करोड़ रुपयों से 69 किसानों की 8.5 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है। अभी 16 किसानों की डेढ़ हेक्टेयर जमीन का बैनामा होना शेष है, जबकि अनुबंध हो चुका है।
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बाउंड्रीवाल के लिए धनराशि का इंतजार
इसके लिए जिलाधिकारी ने 2.61 करोड़ रुपये बाउंड्रीवाल के लिए शासन से मांगी है। यहां पर बाउंड्रीवाल बनाने की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई है। बाउंड्रीवाल का निर्माण एयरपोर्ट अथारिटी के मानकों के अनुसार होगा।
‘बैठक में मिले निर्देशों के आधार पर यह जमीन कम मानी गई है। अभी और जमीन खरीदने के लिए किसानों से वार्ता होनी है। अथारिटी और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यहां के हवाई अड्डे को नई डिजायन में अपग्रेड करते हुए बनाने का फैसला लिया है। इसीलिए और जमीन मांगी गई है।’ गौरव दयाल, डीएम
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एयरफोर्स के साथ एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया ने छह साल पहले बरेली में सिविल इंक्लेव स्थापित कराने के लिए अनुबंध किया था। जिसमें एयरफोर्स के एयरबेस के कुछ हिस्से को इस्तेमाल करने पर सहमति बन गई थी। उसी के सटी मुड़िया अहमद नगर की 10 हेक्टेयर जमीन में सिविल इंक्लेव की स्थापना की जानी थी। प्रदेश सरकार और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालयय ने विचार विमर्श किया और मुरादाबाद सहित कुछ शहरों से सिविल इंक्लेव स्थापित न करने का फैसला लिया था। साथ में यह भी तर्क रखा कि बरेली का प्रस्तावित सिविल इंक्लेव मुरादाबाद के नजदीक है। उत्तराखंड के कुछ भी शहर बरेली के नजदीक है। ऐसे में बरेली में प्रस्तावित सिविल इंक्लेव को अपग्रेड करके मिनी एयरपोर्ट बनवा दिया जाए। जिसका लाभ मुरादाबाद मंडल के अलावा उत्तराखंड के हल्द्वानी, ऊधम सिंहनगर, लालकुआ, काठगोदाम के लोगों को भी मिल सकेगा। इन शहरों से बरेली आने-जाने के लिए रोड भी बेहतर है। यहां मिनी एयरपोर्ट स्थापित कराने के पीछे सेना, वायु सेना क्षेत्र के अलावा आईवीआरआई, आईटीबीटी, एनईआर का इज्जतनगर मंडल कार्यालय । डीजल लोकोमोटिव वर्कशाप होने का तर्क दिया जा रहा है। इसके अलावा डीएमयू की वर्कशाप भी यहां प्रस्तावित है।
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ये है प्रगति
95 किसानों की 10 हेक्टेयर जमीन बैनामा के अधार पर 53,10,30,000 रुपये से खरीदी जानी थी। इसमें से 38 करोड़ रुपयों से 69 किसानों की 8.5 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है। अभी 16 किसानों की डेढ़ हेक्टेयर जमीन का बैनामा होना शेष है, जबकि अनुबंध हो चुका है।
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बाउंड्रीवाल के लिए धनराशि का इंतजार
इसके लिए जिलाधिकारी ने 2.61 करोड़ रुपये बाउंड्रीवाल के लिए शासन से मांगी है। यहां पर बाउंड्रीवाल बनाने की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई है। बाउंड्रीवाल का निर्माण एयरपोर्ट अथारिटी के मानकों के अनुसार होगा।
‘बैठक में मिले निर्देशों के आधार पर यह जमीन कम मानी गई है। अभी और जमीन खरीदने के लिए किसानों से वार्ता होनी है। अथारिटी और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यहां के हवाई अड्डे को नई डिजायन में अपग्रेड करते हुए बनाने का फैसला लिया है। इसीलिए और जमीन मांगी गई है।’ गौरव दयाल, डीएम