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महायोजना-2031 : ग्रीन बेल्ट से बाहर हो सकते हैं बुखारा, डोहरा, पीलीभीत रोड
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बरेली। महायोजना-2031 पर आई आपत्तियों पर सुनवाई पूरी करने के बाद बीडीए अफसरों ने साफ किया है कि विकसित हो चुके आवासीय और व्यावसायिक इलाकों को उजाड़े बगैर वहां हरियाली बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। इसके बाद माना जा रहा है कि शहर के कई इलाकों को ग्रीन बेल्ट से बाहर किया जा सकता है। जिला प्रशासन और बीडीए के अफसर इस पर अंतिम निर्णय इसी महीने लेंगे।
महायोजना-2031 को अमलीजामा पहनाने से पहले बीडीए ने 25 मई से आपत्तियों पर सुनवाई शुरू की थी जो चार जून को पूरी हो गई। आखिरी दिन भी ढाई सौ लोगों को बुलाया गया। बीडीए को महायोजना पर कुल मिलाकर करीब डेढ़ हजार 1500 आपत्तियां मिली थीं जिनमें से अधिकांश ग्रीन बेल्ट को लेकर थीं। इन आपत्तियों का लब्बोलुआब यह था कि पीलीभीत मार्ग, बुखारा रोड, डोहरा रोड, आंशिक सिविल लाइंस और मुड़िया अहमद नगर का इलाका व्यावसायिक और आवासीय तौर पर विकसित हो चुके हैं लेकिन महायोजना में इन्हें ग्रीन बेल्ट में शामिल कर लिया गया है।
इन आपत्तियों में यह भी तर्क दिया गया था कि बीडीए ने खुद इन इलाकों में मकानों और दुकानों के नक्शे पास किए हैं। बाकायदा रजिस्ट्री होने के बाद बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया कराई हैं। अब बगैर सोचे-समझे इन्हें ग्रीन बेल्ट घोषित किया जा रहा है। इन आपत्तियों के बाद जिला प्रशासन और बीडीए के अधिकारियों की मंशा अब इन इलाकों को ग्रीन बेल्ट से छूट देने की है। बताया जा रहा है कि इस बारे में इसी महीने कमेटी अंतिम निर्णय लेगी।
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25 मीटर कम हो सकता है बड़ा बाईपास का ग्रीन एरिया
आपत्तियाें में बड़ा बाईपास के सेंटर से लेकर 140 मीटर दूरी तरह महायोजना में ग्रीन बेल्ट का प्रावधान करने का जिक्र था। सैकड़ों आपत्तियाें में कहा गया था कि इससे 15 हजार से अधिक किसान प्रभावित होंगे और 140 मीटर के दायरे में उनकी सैकड़ों हेक्टेयर भूमि चली जाएगी। माना जा रहा है कि इस दूरी को 25 मीटर तक घटाया जा सकता है। ग्राम इटौवा बेनीराम ठाकुरान को कृषि भूमि में शामिल किया गया है जबकि यह क्षेत्र शैक्षिक दृष्टि से उभर रहा है। इसके लिए भी राहत दी जा सकती हे। बैरियर टू से रिठौरा तक का क्षेत्र भी ग्रीन बेल्ट से बाहर किया जा सकता है। इसके लिए भी 150 से अधिक आपत्तियां पहुंचीं थीं।
इनसेट---
महिलाएं बोलीं- जिंदगी भर की कमाई
लगी है, ग्रीन बेल्ट से निकालो
लाल फाटक के पास बनीं बालाजी धाम कॉलोनी के सौ से ज्यादा लोग शनिवार को बीडीए पहुंचे। इनमें ज्यादातर महिलाएं थीं। उन्होंने कहा कि बिल्डर ने बीडीए से स्वीकृत बताकर 114 बीघा जमीन पर कॉलोनी बसाई है। घर बनने के बाद पता चला कि वर्ष 2011 में ही यह क्षेत्र ग्रीन बेल्ट था। इस मामले में उन्हें घर उजाड़ने की बात कहकर डराने के बजाय बिल्डर पर कार्रवाई की जाए। लोगों ने कहा कि इस कॉलोनी में एक हजार से ज्यादा घर हैं। इनमें ज्यादातर फौजी और शिक्षक हैं। महिलाओं ने कहा कि इस क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट से बाहर निकाला जाए वर्ना उनकी जिंदगी भर की कमाई मिट्टी में मिल जाएगी। इसी तरह बुखारा और करेली क्षेत्र के लोगों ने भी अधिकारियों के सामने आपत्तियां रखीं। बीडीए सचिव योगेंद्र कुमार ने उनसे बात की।
महायोजना की आपत्तियों पर सुनवाई पूरी हो गई है। कॉमर्शियल और आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित हो चुके इलाकों को कुछ राहत मिलेगी। आपत्तियों का निस्तारण जल्द होगा। - जोगिंदर कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए
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महायोजना-2031 को अमलीजामा पहनाने से पहले बीडीए ने 25 मई से आपत्तियों पर सुनवाई शुरू की थी जो चार जून को पूरी हो गई। आखिरी दिन भी ढाई सौ लोगों को बुलाया गया। बीडीए को महायोजना पर कुल मिलाकर करीब डेढ़ हजार 1500 आपत्तियां मिली थीं जिनमें से अधिकांश ग्रीन बेल्ट को लेकर थीं। इन आपत्तियों का लब्बोलुआब यह था कि पीलीभीत मार्ग, बुखारा रोड, डोहरा रोड, आंशिक सिविल लाइंस और मुड़िया अहमद नगर का इलाका व्यावसायिक और आवासीय तौर पर विकसित हो चुके हैं लेकिन महायोजना में इन्हें ग्रीन बेल्ट में शामिल कर लिया गया है।
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इन आपत्तियों में यह भी तर्क दिया गया था कि बीडीए ने खुद इन इलाकों में मकानों और दुकानों के नक्शे पास किए हैं। बाकायदा रजिस्ट्री होने के बाद बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया कराई हैं। अब बगैर सोचे-समझे इन्हें ग्रीन बेल्ट घोषित किया जा रहा है। इन आपत्तियों के बाद जिला प्रशासन और बीडीए के अधिकारियों की मंशा अब इन इलाकों को ग्रीन बेल्ट से छूट देने की है। बताया जा रहा है कि इस बारे में इसी महीने कमेटी अंतिम निर्णय लेगी।
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25 मीटर कम हो सकता है बड़ा बाईपास का ग्रीन एरिया
आपत्तियाें में बड़ा बाईपास के सेंटर से लेकर 140 मीटर दूरी तरह महायोजना में ग्रीन बेल्ट का प्रावधान करने का जिक्र था। सैकड़ों आपत्तियाें में कहा गया था कि इससे 15 हजार से अधिक किसान प्रभावित होंगे और 140 मीटर के दायरे में उनकी सैकड़ों हेक्टेयर भूमि चली जाएगी। माना जा रहा है कि इस दूरी को 25 मीटर तक घटाया जा सकता है। ग्राम इटौवा बेनीराम ठाकुरान को कृषि भूमि में शामिल किया गया है जबकि यह क्षेत्र शैक्षिक दृष्टि से उभर रहा है। इसके लिए भी राहत दी जा सकती हे। बैरियर टू से रिठौरा तक का क्षेत्र भी ग्रीन बेल्ट से बाहर किया जा सकता है। इसके लिए भी 150 से अधिक आपत्तियां पहुंचीं थीं।
इनसेट---
महिलाएं बोलीं- जिंदगी भर की कमाई
लगी है, ग्रीन बेल्ट से निकालो
लाल फाटक के पास बनीं बालाजी धाम कॉलोनी के सौ से ज्यादा लोग शनिवार को बीडीए पहुंचे। इनमें ज्यादातर महिलाएं थीं। उन्होंने कहा कि बिल्डर ने बीडीए से स्वीकृत बताकर 114 बीघा जमीन पर कॉलोनी बसाई है। घर बनने के बाद पता चला कि वर्ष 2011 में ही यह क्षेत्र ग्रीन बेल्ट था। इस मामले में उन्हें घर उजाड़ने की बात कहकर डराने के बजाय बिल्डर पर कार्रवाई की जाए। लोगों ने कहा कि इस कॉलोनी में एक हजार से ज्यादा घर हैं। इनमें ज्यादातर फौजी और शिक्षक हैं। महिलाओं ने कहा कि इस क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट से बाहर निकाला जाए वर्ना उनकी जिंदगी भर की कमाई मिट्टी में मिल जाएगी। इसी तरह बुखारा और करेली क्षेत्र के लोगों ने भी अधिकारियों के सामने आपत्तियां रखीं। बीडीए सचिव योगेंद्र कुमार ने उनसे बात की।
महायोजना की आपत्तियों पर सुनवाई पूरी हो गई है। कॉमर्शियल और आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित हो चुके इलाकों को कुछ राहत मिलेगी। आपत्तियों का निस्तारण जल्द होगा। - जोगिंदर कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए