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दोबारा जांच के नाम पर बाबू मांग रहा था 20 हजार रुपये
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बरेली। फरीदपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत भगवानपुर फुलवा में 20 लाख के घोटाले की शिकायत की जांच पहले गैर टेक्निकल अफसर पशु चिकित्साधिकारी से कराई गई। शिकायतकर्ता इस जांच से असंतुष्ट था, इसलिए डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह की तरफ से दोबारा जांच के आदेश लघु सिंचाई के एक्सईएन को दिए गए थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोबारा जांच कराने के नाम पर डीपीआरओ दफ्तर का एक बाबू उससे 20 हजार रुपये की डिमांड कर रहा था। इस वजह से जांच को पूरा करने में जानबूझकर देरी की जा रही थी। जबकि डीपीआरओ के कर्मचारियों ने इस मामले के शिकायतकर्ता पर यह आरोप लगाया है कि उसने 24 अगस्त को दफ्तर में पहुंचकर सरकारी रिकार्ड को फाड़ने की कोशिश की है। इस मामले की डीपीआरओ की ओर से कानूनी कार्रवाई भी की गई है।
ग्राम पंचायत भगवानपुर फुलवा के प्रधान कमलकांत पर पूर्व प्रधान वीरपाल कश्यप सहित कई लोगों ने मई 2018 में गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायतकर्ता ने यह शपथ पत्र दिया था कि ग्राम पंचायत में 20 लाख खर्च करके सिर्फ कागजों पर ही विकास कार्य करा दिए गए। डीएम के आदेश पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र सिंह ने पिछले साल जुलाई में जांच रिपोर्ट दे दी, जिसमें उन्होंने हैंडपंपों की रिबोरिंग, मरम्मत, शौचालय, खड़ंजा सहित कई कामों को ठीक बताते हुए ग्राम प्रधान को क्लीन चिट दे दी। बताते हैं कि गैर तकनीकि अधिकारी से कराई गई जांच पर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाते हुए इस साल जून में दोबारा जांच की आवश्यकता बताई। शिकायतकर्ता वीरपाल का कहना है कि उसके पास शिकायत को लेकर प्रधान से जारी चेक और दूसरे सबूत थे लेकिन जांच अधिकारी ने इसे कोई तवज्जो ही नहीं दी। डीएम ने इस प्रकरण में दोबारा आदेश देते हुए सिंचाई विभाग के एई को जांच अधिकारी नामित कर दिया गया। इसके बाद से जांच लटकी हुई थी। इस बीच, 24 अगस्त को डीपीआरओ दफ्तर पहुंचे शिकायतकर्ता वीरपाल पर बाबुओं ने यह आरोप लगा दिया कि वीरपाल ने कार्यालय में पहुंचकर बाबुओं से अभद्रता करते हुए सरकारी रिकार्ड फाड़ने की कोशिश की है। जबकि वीरपाल ने बाबुओं पर ही पलटवार करते हुए डीएम को शिकायत की है कि एक बाबू ने दोबारा जांच कराने के नाम पर बीस हजार रुपये की डिमांड कर रहा था। वीरपाल का कहना है कि बाबू ने उसे खुद धमकी दी थी।
मैं सिर्फ शिकायत की देरी की कारण पूछने आया था। मुझसे एक बाबू ने दोबारा जांच कराने के नाम पर सुविधा शुल्क मांगा जा रहा है। मुझ पर रिकार्ड फाड़ने का आरोप लगत है। -वीरपाल कश्यप, शिकायतकर्ता
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ग्राम पंचायत भगवानपुर फुलवा के प्रधान कमलकांत पर पूर्व प्रधान वीरपाल कश्यप सहित कई लोगों ने मई 2018 में गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायतकर्ता ने यह शपथ पत्र दिया था कि ग्राम पंचायत में 20 लाख खर्च करके सिर्फ कागजों पर ही विकास कार्य करा दिए गए। डीएम के आदेश पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र सिंह ने पिछले साल जुलाई में जांच रिपोर्ट दे दी, जिसमें उन्होंने हैंडपंपों की रिबोरिंग, मरम्मत, शौचालय, खड़ंजा सहित कई कामों को ठीक बताते हुए ग्राम प्रधान को क्लीन चिट दे दी। बताते हैं कि गैर तकनीकि अधिकारी से कराई गई जांच पर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाते हुए इस साल जून में दोबारा जांच की आवश्यकता बताई। शिकायतकर्ता वीरपाल का कहना है कि उसके पास शिकायत को लेकर प्रधान से जारी चेक और दूसरे सबूत थे लेकिन जांच अधिकारी ने इसे कोई तवज्जो ही नहीं दी। डीएम ने इस प्रकरण में दोबारा आदेश देते हुए सिंचाई विभाग के एई को जांच अधिकारी नामित कर दिया गया। इसके बाद से जांच लटकी हुई थी। इस बीच, 24 अगस्त को डीपीआरओ दफ्तर पहुंचे शिकायतकर्ता वीरपाल पर बाबुओं ने यह आरोप लगा दिया कि वीरपाल ने कार्यालय में पहुंचकर बाबुओं से अभद्रता करते हुए सरकारी रिकार्ड फाड़ने की कोशिश की है। जबकि वीरपाल ने बाबुओं पर ही पलटवार करते हुए डीएम को शिकायत की है कि एक बाबू ने दोबारा जांच कराने के नाम पर बीस हजार रुपये की डिमांड कर रहा था। वीरपाल का कहना है कि बाबू ने उसे खुद धमकी दी थी।
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मैं सिर्फ शिकायत की देरी की कारण पूछने आया था। मुझसे एक बाबू ने दोबारा जांच कराने के नाम पर सुविधा शुल्क मांगा जा रहा है। मुझ पर रिकार्ड फाड़ने का आरोप लगत है। -वीरपाल कश्यप, शिकायतकर्ता
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