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पब्लिक को हां नहीं.. मंत्री जी को ‘न’ नहीं
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बरेली। करीब दस महीने पहले शासन ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर एक अरसे से लगी रोक हटा ली थी, लेकिन बरेली में फिर भी कोई लाइसेंस नहीं बना। जिले भर के ‘माननीयों’ ने भी पूरा जोर लगाया लेकिन जिला प्रशासन टस से मस नहीं हुआ। पब्लिक की ओर से सीधे जो करीब 18 हजार आवेदन दिए गए, उनकी खैर बिसात ही क्या थी। लेकिन अब खुलासा हुआ है कि इस बीच जिला प्रशासन ने सारे नियम-कायदे भूलकर एक कैबिनेट मंत्री के बेटे और भतीजे को न सिर्फ शस्त्र लाइसेंस जारी कर दिए, वह भी व्यापारी कोटे में।
शासन के रोक हटाने के बाद मंडल के ही बदायूं और शाहजहांपुर जिलों में तो कई शस्त्र लाइसेंस जारी हुए, लेकिन बरेली में जिला प्रशासन एक भी शस्त्र लाइसेंस जारी न करने पर अड़ा रहा। प्रशासन के इस अड़ियल रवैये से जिले के उन कई विधायकों और सांसदों को भी उन लोगों के आगे शर्मसार होना पड़ा जिनसे उन्होंने चुनाव के दौरान लाइसेंस दिलाने का वादा किया था। जिले के दो कैबिनेट और एक केंद्रीय मंत्री, एमएलए, एमएलसी, एमपी और मेयर में से शायद ही कोई ऐसा हो, जिसने जिला प्रशासन से लाइसेंस बनाने की सिफारिश न की हो। जिला प्रशासन के रुख नरम होने की आस में तमाम आवेदकों ने अपनी छह महीने पुरानी पुलिस रिपोर्ट भी दोबारा सत्यापित करा ली, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। प्रशासन ने 15 हजार से ज्यादा आवेदन फार्म तो बेचे लेकिन लाइसेंस एक भी नहीं बनाया। इन आवेदकों के अपने आवेदन पर पुलिस रिपोर्ट लगवाने के लिए खर्च किए हजारों रुपये भी बेकार चले गए।
इसी बीच जिला प्रशासन के पिछले दिनों एक कैबिनेट मंत्री के बेटे और भतीजे को चुपचाप दो लाइसेंस जारी कर दिए जाने पर हल्ला कटना शुरू हो गया है। बताया जाता है कि दोनों शस्त्र लाइसेंस रिवाल्वर के हैं। प्रशासन ने लाइसेंस जारी करते वक्त पूरी कोशिश की कि इसकी किसी को भनक न लगे, लेकिन अब आने वाले दिनों में उसे माननीयों का इस पर अच्छा-खासा विरोध झेलना पड़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले को गुपचुप ढंग से हाईकमान तक पहुंचाने की भी तैयारी हो रही है।
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चार साल बाद हटी 2014 में लगी रोक
2014 में लगे प्रतिबंध के बाद पहली बार बरेली में व्यापारी वर्ग से दो शस्त्र लाइसेंस जारी हुए हैं। सितंबर 2018 में सरकार ने हाईकोर्ट से मिले दिशा-निर्देश पर निर्धारित श्रेणी में लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया बहाल करने को निर्देश दिए थे लेकिन बरेली में इसके बावजूद लाइसेंस नहीं बनाए गए। 2014 में लगे प्रतिबंध के बाद सिर्फ शूटर, जीवन भय से पीड़ित, सैनिक आदि श्रेणी में ही शस्त्र लाइसेंस देने की छूट थी। इस श्रेणी में गिने चुने की लाइसेंस जारी हो पाए।
फार्म लेने और जमा करने के लिए कोर्ट तक गए लोग
सितंबर 2018 में सरकार ने जब विशेष शर्तों के साथ लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिए तो आवेदकों की बाढ़ आ गई, लेकिन बरेली जिले में फार्म नहीं दिए गए। इस पर कई लोग हाईकोर्ट से फार्म देने और जमा करने के आदेश लेकर आए थे। प्रशासन ने जब फार्म नहीं जमा किए तो
लोगों ने डाक से भेज दिए।
शस्त्र लाइसेंस आम लोगों को नहीं दिए जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने कुछ कैटेगरी बताई हैं। इसमें निशानेबाज, जनप्रतिनिधि, अपराध पीड़ित व्यक्ति जैसे कुछ वर्ग शामिल है। इसके अलावा कुछ लोग हाईकोर्ट भी चले जाते हैं। ऐसे मामलों की जांच कराने के बाद शस्त्र लाइसेंस बनाए जा रहे हैं। विरासत वाले लाइसेंस भी ट्रांसफर हो रहे हैं। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी
47,538 पुराने शस्त्र लाइसेंस हैं जिले में
17,935 आवेदन लंबित पड़े हैं जिला प्रशासन के पास
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शासन के रोक हटाने के बाद मंडल के ही बदायूं और शाहजहांपुर जिलों में तो कई शस्त्र लाइसेंस जारी हुए, लेकिन बरेली में जिला प्रशासन एक भी शस्त्र लाइसेंस जारी न करने पर अड़ा रहा। प्रशासन के इस अड़ियल रवैये से जिले के उन कई विधायकों और सांसदों को भी उन लोगों के आगे शर्मसार होना पड़ा जिनसे उन्होंने चुनाव के दौरान लाइसेंस दिलाने का वादा किया था। जिले के दो कैबिनेट और एक केंद्रीय मंत्री, एमएलए, एमएलसी, एमपी और मेयर में से शायद ही कोई ऐसा हो, जिसने जिला प्रशासन से लाइसेंस बनाने की सिफारिश न की हो। जिला प्रशासन के रुख नरम होने की आस में तमाम आवेदकों ने अपनी छह महीने पुरानी पुलिस रिपोर्ट भी दोबारा सत्यापित करा ली, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। प्रशासन ने 15 हजार से ज्यादा आवेदन फार्म तो बेचे लेकिन लाइसेंस एक भी नहीं बनाया। इन आवेदकों के अपने आवेदन पर पुलिस रिपोर्ट लगवाने के लिए खर्च किए हजारों रुपये भी बेकार चले गए।
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इसी बीच जिला प्रशासन के पिछले दिनों एक कैबिनेट मंत्री के बेटे और भतीजे को चुपचाप दो लाइसेंस जारी कर दिए जाने पर हल्ला कटना शुरू हो गया है। बताया जाता है कि दोनों शस्त्र लाइसेंस रिवाल्वर के हैं। प्रशासन ने लाइसेंस जारी करते वक्त पूरी कोशिश की कि इसकी किसी को भनक न लगे, लेकिन अब आने वाले दिनों में उसे माननीयों का इस पर अच्छा-खासा विरोध झेलना पड़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले को गुपचुप ढंग से हाईकमान तक पहुंचाने की भी तैयारी हो रही है।
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चार साल बाद हटी 2014 में लगी रोक
2014 में लगे प्रतिबंध के बाद पहली बार बरेली में व्यापारी वर्ग से दो शस्त्र लाइसेंस जारी हुए हैं। सितंबर 2018 में सरकार ने हाईकोर्ट से मिले दिशा-निर्देश पर निर्धारित श्रेणी में लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया बहाल करने को निर्देश दिए थे लेकिन बरेली में इसके बावजूद लाइसेंस नहीं बनाए गए। 2014 में लगे प्रतिबंध के बाद सिर्फ शूटर, जीवन भय से पीड़ित, सैनिक आदि श्रेणी में ही शस्त्र लाइसेंस देने की छूट थी। इस श्रेणी में गिने चुने की लाइसेंस जारी हो पाए।
फार्म लेने और जमा करने के लिए कोर्ट तक गए लोग
सितंबर 2018 में सरकार ने जब विशेष शर्तों के साथ लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिए तो आवेदकों की बाढ़ आ गई, लेकिन बरेली जिले में फार्म नहीं दिए गए। इस पर कई लोग हाईकोर्ट से फार्म देने और जमा करने के आदेश लेकर आए थे। प्रशासन ने जब फार्म नहीं जमा किए तो
लोगों ने डाक से भेज दिए।
शस्त्र लाइसेंस आम लोगों को नहीं दिए जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने कुछ कैटेगरी बताई हैं। इसमें निशानेबाज, जनप्रतिनिधि, अपराध पीड़ित व्यक्ति जैसे कुछ वर्ग शामिल है। इसके अलावा कुछ लोग हाईकोर्ट भी चले जाते हैं। ऐसे मामलों की जांच कराने के बाद शस्त्र लाइसेंस बनाए जा रहे हैं। विरासत वाले लाइसेंस भी ट्रांसफर हो रहे हैं। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी
47,538 पुराने शस्त्र लाइसेंस हैं जिले में
17,935 आवेदन लंबित पड़े हैं जिला प्रशासन के पास