{"_id":"5e0e457d8ebc3e8816338f76","slug":"civcamenities-bareilly-news-bly390366478","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिस्टम बेहाल- जिले को ओडीएफ घोषित करने वाले अफसर एक साल से दबाए बैठे थे करीब तीन करोड़ रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिस्टम बेहाल- जिले को ओडीएफ घोषित करने वाले अफसर एक साल से दबाए बैठे थे करीब तीन करोड़ रुपये
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विधायकों की शिकायत पर पंचायती राज मंत्री ने कराया सत्यापन तो खुला मामला
जिले भर में 2467 लाभार्थियों को साल भर पहले दी जानी थी छह हजार की किस्त
बरेली। अफसरशाही ने अपने कामकाज में जनप्रतिनिधियों की दखलंदाजी खत्म करने में कामयाब रही लेकिन अब जिले के विधायकों की शिकायत पर एक के बाद एक खुद घोटालों के आरोपों में बार-बार घिर रही है। सड़कों और कंपोजिट ग्रांट के बड़े घोटाले के बाद अब प्रधानमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली स्वच्छ भारत मिशन में गड़बड़ी मिलने से नीचे से ऊपर तक अफसरों की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले दिनों विधायकों की शिकायत के बाद पंचायती राज मंत्री ने सत्यापन कराया तो पता चला कि जिले भर के 2467 लाभार्थियों के खाते में शौचालय बनाने के लिए पहली किस्त का पैसा साल भर से अफसर ही दबाए बैठे हैं। पोल खुलने के बाद अब खातों में रकम भिजवाकर मामला रफादफा करने की कोशिश शुरू कर दी गई है।
पिछले दिनों पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र चौधरी की समीक्षा बैठक के दौरान विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने अफसरों के शौचालय निर्माण का शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर जिले को ओडीएफ घोषित करने के दावे पर सवाल उठाए थे। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया था कि अफसरों ने शौचालयों के बजट में बड़े पैमाने धांधली की है। लाभार्थियों के खातों में पैसा भेजने के बजाय उसका आपस में बंदरबांट कर लिया गया है। यह भी आरोप लगाया था कि अफसरों ने पहले बनाए गए तमाम शौचालयों की जियो टैगिंग करके उनका बजट भी डकार लिया है। कई जनप्रतिनिधियों ने पंचायती राज मंत्री को यह भी बताया था कि ग्रामीण इलाकों में जो शौचालय बनाए गए हैं, उनकी गुणवत्ता बेहद खराब है और वे स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य पूरा करने लायक ही नहीं हैं। इन शौचालयों पर सरकार का लाखों रुपया बर्बाद कर दिया गया है।
जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर मंत्री ने जिला पंचायत राज अधिकारी को जिले भर में सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे। सत्यापन हुआ तो पता चला कि 2467 लाभार्थियों के खाते में तो साल भर बाद भी शौचालय की पहली किस्त का पैसा ही नहीं भेजा गया है। दूसरी किस्त का पैसा भी अफसर अटकाए हुए हैं। यह भी पता चला कि जिन खातों में पैसा भेजा गया, उनमें से भी ज्यादातर का निर्माण नहीं कराया गया। बता दें कि एक किस्त में लाभार्थी को छह हजार की रकम दी जाती है। फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद अब पंचायती राज विभाग ने खातों में साल भर से अटकी रकम भेजने और पैसा लेकर भी शौचालय न बनवाने वालों से रिकवरी करने की तैयारी शुरू कर दी है। डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि जिन लाभार्थियों के खातों में रकम नहीं भेजी गई उनका डाटा तैयार कराकर दस जनवरी के बाद रकम भेज दी जाएगी।
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उठा सवाल.. जिले को ओडीएफ घोषित करने से पहले क्यों नहीं कराया सत्यापन
जिले के अफसरों की तरफ से 19 नवंबर 2018 को केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया था कि बरेली को ओडीएफ घोषित कर दिया जाए। ऐसे में यह हैरतअंगेज माना जा रहा है कि जब लाभार्थियों को पहले किस्त तक का पैसा नहीं मिला तो अफसरों ने जिले में शौचालयों का सत्यापन कराए बगैर केंद्र सरकार को प्रस्ताव कैसे भेज दिया। बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन का केंद्र सरकार से जिलों को इकट्ठा बजट मिलता है। पंचायती राज विभाग को पहली किस्त के पैसे से निर्माण के बाद दूसरी किस्त का पैसा दिए जाने का निर्देश है। लिहाजा पहली किस्त देने के बाद भी शौचालयों का सत्यापन होना था। अफसरों के दोनों किस्त जारी न किए जाने से साफ माना जा रहा है कि स्वच्छ भारत मिशन में बड़े पैमाने पर घपले की तैयारी थी। हालांकि यह गड़बड़ी किस स्तर पर हुई, इसकी फिलहाल कोई जांच नहीं कराई जा रही है।
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जिले भर में 2467 लाभार्थियों को साल भर पहले दी जानी थी छह हजार की किस्त
बरेली। अफसरशाही ने अपने कामकाज में जनप्रतिनिधियों की दखलंदाजी खत्म करने में कामयाब रही लेकिन अब जिले के विधायकों की शिकायत पर एक के बाद एक खुद घोटालों के आरोपों में बार-बार घिर रही है। सड़कों और कंपोजिट ग्रांट के बड़े घोटाले के बाद अब प्रधानमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली स्वच्छ भारत मिशन में गड़बड़ी मिलने से नीचे से ऊपर तक अफसरों की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले दिनों विधायकों की शिकायत के बाद पंचायती राज मंत्री ने सत्यापन कराया तो पता चला कि जिले भर के 2467 लाभार्थियों के खाते में शौचालय बनाने के लिए पहली किस्त का पैसा साल भर से अफसर ही दबाए बैठे हैं। पोल खुलने के बाद अब खातों में रकम भिजवाकर मामला रफादफा करने की कोशिश शुरू कर दी गई है।
पिछले दिनों पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र चौधरी की समीक्षा बैठक के दौरान विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने अफसरों के शौचालय निर्माण का शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर जिले को ओडीएफ घोषित करने के दावे पर सवाल उठाए थे। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया था कि अफसरों ने शौचालयों के बजट में बड़े पैमाने धांधली की है। लाभार्थियों के खातों में पैसा भेजने के बजाय उसका आपस में बंदरबांट कर लिया गया है। यह भी आरोप लगाया था कि अफसरों ने पहले बनाए गए तमाम शौचालयों की जियो टैगिंग करके उनका बजट भी डकार लिया है। कई जनप्रतिनिधियों ने पंचायती राज मंत्री को यह भी बताया था कि ग्रामीण इलाकों में जो शौचालय बनाए गए हैं, उनकी गुणवत्ता बेहद खराब है और वे स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य पूरा करने लायक ही नहीं हैं। इन शौचालयों पर सरकार का लाखों रुपया बर्बाद कर दिया गया है।
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जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर मंत्री ने जिला पंचायत राज अधिकारी को जिले भर में सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे। सत्यापन हुआ तो पता चला कि 2467 लाभार्थियों के खाते में तो साल भर बाद भी शौचालय की पहली किस्त का पैसा ही नहीं भेजा गया है। दूसरी किस्त का पैसा भी अफसर अटकाए हुए हैं। यह भी पता चला कि जिन खातों में पैसा भेजा गया, उनमें से भी ज्यादातर का निर्माण नहीं कराया गया। बता दें कि एक किस्त में लाभार्थी को छह हजार की रकम दी जाती है। फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद अब पंचायती राज विभाग ने खातों में साल भर से अटकी रकम भेजने और पैसा लेकर भी शौचालय न बनवाने वालों से रिकवरी करने की तैयारी शुरू कर दी है। डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि जिन लाभार्थियों के खातों में रकम नहीं भेजी गई उनका डाटा तैयार कराकर दस जनवरी के बाद रकम भेज दी जाएगी।
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उठा सवाल.. जिले को ओडीएफ घोषित करने से पहले क्यों नहीं कराया सत्यापन
जिले के अफसरों की तरफ से 19 नवंबर 2018 को केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया था कि बरेली को ओडीएफ घोषित कर दिया जाए। ऐसे में यह हैरतअंगेज माना जा रहा है कि जब लाभार्थियों को पहले किस्त तक का पैसा नहीं मिला तो अफसरों ने जिले में शौचालयों का सत्यापन कराए बगैर केंद्र सरकार को प्रस्ताव कैसे भेज दिया। बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन का केंद्र सरकार से जिलों को इकट्ठा बजट मिलता है। पंचायती राज विभाग को पहली किस्त के पैसे से निर्माण के बाद दूसरी किस्त का पैसा दिए जाने का निर्देश है। लिहाजा पहली किस्त देने के बाद भी शौचालयों का सत्यापन होना था। अफसरों के दोनों किस्त जारी न किए जाने से साफ माना जा रहा है कि स्वच्छ भारत मिशन में बड़े पैमाने पर घपले की तैयारी थी। हालांकि यह गड़बड़ी किस स्तर पर हुई, इसकी फिलहाल कोई जांच नहीं कराई जा रही है।