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जिला अस्पताल रोड फड़ वालों के कब्जे में, कैसे निकले एंबुलेंस
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बीते दिनों जाम में एंबुलेंस के फंसने से हो चुकी है एक मरीज की मौत
जिला अस्पताल के गेट पर हर समय लगा रहता है ई-रिक्शा चालकों का जाम
बरेली। जिला अस्पताल के गेट पर रोजाना एंबुलेंस फंसती हैं। कारण, फुटपाथ फड़ वालों ने कब्जा रखे हैं और जिला अस्पताल के गेट पर ई-रिक्शा चालकों का जमावड़ा रहता है, जिससे आए दिन आने वाले मरीजों और ई-रिक्शा चालकों में मारपीट तक की नौबत आ जाती है। पुलिस कई बार फ ड़ वालों को खदेड़ चुकी है, लेकिन स्थिति जस की तस है।
31 दिसंबर की रात जिला अस्पताल रोड के आगे कुतुबखाने के पास लगे जाम में एंबुलेंस करीब 25 मिनट तक फंसी रही। इससे मरीज देरी से अस्पताल पहुंच सका और तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों का कहना था जल्दी पहुंचता तो शायद जान बच जाती। इसके बाद बुधवार को पुलिस ने दोपहर में दो बार फड़ वालों को वहां से खदेड़ा, लेकिन पुलिस के जाते ही वह फिर से फुटपाथ पर काबिज हो गए। नगर निगम की ओर से सख्त कार्रवाई न होने से वहां जाम की समस्या बनी हुई है।
सीएमएस डॉ. टीएस आर्या का कहना है कि वह इसके लिए निगम व प्रशासन के अन्य अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं इस रोड पर अक्सर मरीजाें की एंबुलेंस फंसी रहती हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
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जिला अस्पताल के गेट पर हर समय लगा रहता है ई-रिक्शा चालकों का जाम
बरेली। जिला अस्पताल के गेट पर रोजाना एंबुलेंस फंसती हैं। कारण, फुटपाथ फड़ वालों ने कब्जा रखे हैं और जिला अस्पताल के गेट पर ई-रिक्शा चालकों का जमावड़ा रहता है, जिससे आए दिन आने वाले मरीजों और ई-रिक्शा चालकों में मारपीट तक की नौबत आ जाती है। पुलिस कई बार फ ड़ वालों को खदेड़ चुकी है, लेकिन स्थिति जस की तस है।
31 दिसंबर की रात जिला अस्पताल रोड के आगे कुतुबखाने के पास लगे जाम में एंबुलेंस करीब 25 मिनट तक फंसी रही। इससे मरीज देरी से अस्पताल पहुंच सका और तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों का कहना था जल्दी पहुंचता तो शायद जान बच जाती। इसके बाद बुधवार को पुलिस ने दोपहर में दो बार फड़ वालों को वहां से खदेड़ा, लेकिन पुलिस के जाते ही वह फिर से फुटपाथ पर काबिज हो गए। नगर निगम की ओर से सख्त कार्रवाई न होने से वहां जाम की समस्या बनी हुई है।
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सीएमएस डॉ. टीएस आर्या का कहना है कि वह इसके लिए निगम व प्रशासन के अन्य अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं इस रोड पर अक्सर मरीजाें की एंबुलेंस फंसी रहती हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
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