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सर्वर डाउन बताकर उड़ाए थे 30 लाख रुपये
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बदायूं। संग्रामपुर के डाकघर में हवाला के धंधेबाजों के साथ-साथ आम आदमी के रुपये भी उड़ा लिए गए। दो दर्जन से अधिक लोगों की पासबुकें नहीं दी गईं हैं। अब पासबुकें किसके पास हैं, कुछ पता नहीं है। कई दिन तक लोगों ने हंगामा भी किया था, लेकिन पासबुकें नहीं मिल सकीं।
डाकघर में तैनात डाकपाल राजू अक्सर लोगों की पासबुकें रख लेता था। चूंकि डाकघर गांव में था, इससे लोग फर्जीबाड़ा होने का अनुमान भी नहीं लगा पाते थे, जो लोग रुपये जमा करने आते थे। डाकपाल उन्हें बता देता था कि सर्वर डाउन है। ये कहकर उनकी पासबुकें और रुपये रख लेता था। जब ग्राहकों को समय मिलता था, तब डाकघर आते और अपनी पासबुक ले जाते। करीब दो दर्जन ग्राहक ऐसे रहे, जिनकी पासबुकें ही गायब कर दी गईं। उनके करीब तीस लाख रुपये गायब कर दिए गए। इस बात को लेकर ग्राहकों ने एक सप्ताह तक डाकघर में खूब हंगामा भी किया था। लोगों को जब पता चला कि मामले की जांच शुरू हो गई है। तब कहीं उन्होंने राहत की सांस ली है।
- जब डाकघर में ऑनलाइन कार्य नहीं होता था। तब डाकपाल ने करीब एक दर्जन लोगों के रुपये जमा करके पासबुक पर एंट्री कर दी लेकिन डाकघर के अभिलेखों में कहीं पर ये दर्ज नहीं किया कि ग्राहक ने रुपये जमा किए हैं। मामले की छानबीन में ऐसे करीब 12 ग्राहक निकले हैं।
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अभी मामले की जांच चल रही है। करीब 12 लोग ऐसे मिले हैं, जिनकी पासबुकों पर एंट्री है और डाकघर की मुहर भी लगी है लेकिन उन्होंने रुपये जमा किए थे, डाकघर में ऐसे कोई रिकॉर्ड नहीं है। बाकी ऑनलाइन रुपये जमा करने में फर्जीबाड़ा सामने आया है। जांच पूरी होने के बाद सारी बातें निकलकर सामने आएंगी।
- सतीश कुमार मीना, निरीक्षक पोस्ट मास्टर
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डाकघर में तैनात डाकपाल राजू अक्सर लोगों की पासबुकें रख लेता था। चूंकि डाकघर गांव में था, इससे लोग फर्जीबाड़ा होने का अनुमान भी नहीं लगा पाते थे, जो लोग रुपये जमा करने आते थे। डाकपाल उन्हें बता देता था कि सर्वर डाउन है। ये कहकर उनकी पासबुकें और रुपये रख लेता था। जब ग्राहकों को समय मिलता था, तब डाकघर आते और अपनी पासबुक ले जाते। करीब दो दर्जन ग्राहक ऐसे रहे, जिनकी पासबुकें ही गायब कर दी गईं। उनके करीब तीस लाख रुपये गायब कर दिए गए। इस बात को लेकर ग्राहकों ने एक सप्ताह तक डाकघर में खूब हंगामा भी किया था। लोगों को जब पता चला कि मामले की जांच शुरू हो गई है। तब कहीं उन्होंने राहत की सांस ली है।
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- जब डाकघर में ऑनलाइन कार्य नहीं होता था। तब डाकपाल ने करीब एक दर्जन लोगों के रुपये जमा करके पासबुक पर एंट्री कर दी लेकिन डाकघर के अभिलेखों में कहीं पर ये दर्ज नहीं किया कि ग्राहक ने रुपये जमा किए हैं। मामले की छानबीन में ऐसे करीब 12 ग्राहक निकले हैं।
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अभी मामले की जांच चल रही है। करीब 12 लोग ऐसे मिले हैं, जिनकी पासबुकों पर एंट्री है और डाकघर की मुहर भी लगी है लेकिन उन्होंने रुपये जमा किए थे, डाकघर में ऐसे कोई रिकॉर्ड नहीं है। बाकी ऑनलाइन रुपये जमा करने में फर्जीबाड़ा सामने आया है। जांच पूरी होने के बाद सारी बातें निकलकर सामने आएंगी।
- सतीश कुमार मीना, निरीक्षक पोस्ट मास्टर