{"_id":"58adde874f1c1b731cb23658","slug":"children-s-toys-have-become-the-real-fake-e-rickshaw","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों के खिलौने बन गए असली-नकली ई रिक्शा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों के खिलौने बन गए असली-नकली ई रिक्शा
बरेली।
Updated Thu, 23 Feb 2017 01:06 AM IST
विज्ञापन
Children's toys have become the real-fake e-rickshaw
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वैध अवैध आटो टेम्पो का बोझ झेल रही बरली की सड़कों पर नया बोझ बने ई रिक्शा के लिए कोई कायदा कानून है ही नहीं। एक बार मुख्यमंत्री ने कुछ ई रिक्शा बांटे तो जैसे अघोषित आदेश हो गया कि जो हो रहा है होने दें। बरेली में ये ई रिक्शा बच्चों के खिलौने बन गए हैं। जो चाहे इसे चला सकता है। कुछ का रजिस्ट्रेशन नगर निगम कर रहा है तो कुछ का आरटीओ में हो रहा है। बिना किसी लाइसेंस देने का ठेका नगर निगम के पास है। 250 रुपये दो और नगर की सीमा में जहां चाहे रिक्शा चलाओ। वही, चेसिस नंबर वाले रिक्शा का रजिस्ट्रेशन आरटीओ कार्यालय में हो रहा है। इसके लिए ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है। नगर निगम ने अपने यहां 690 ई- रिक्शा पंजीकृत कर रखे हैं। आरटीओ कार्यालय ने करीब 500 रिक्शा के पंजीकरण कर नंबर जारी किए हैं और इनके मालिकों को ड्राइविंग लाइसेंस भी दिया है। नवंबर से नगर निगम में आफिशियली रजिस्ट्रेशन बंद है लेकिन इनकी बिक्री जारी है। अफसर भी दाएं-बाएं करने के अंदाज में कह दे रहे हैं ये तो साइकिल रिक्शा की तरह हैं उसी कायदे से चल सकते हैं।
एक नजर देख कर इन दो तरह के ई- रिक्शा शहर में अंतर कर पाना मुश्किल है । नगर निगम ने जिनका रजिस्ट्रेशन किया है वो रिक्शा इधर-उधर के क लपुर्जों से बनाए जा रहे हैं। इनमें चेसिस नंबर नहीं है। इनकी कीमत 75 से 80 हजार के बीच है। इन रिक्शों पर नगर निगम यूपी 25 एनएनवी की सीरीज से नंबर जारी किए हैं। इसे कोई भी चलाए, कोई चेक करने वाला नहीं है। जबकि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चेसिस नंबर वाले ई- रिक्शा ही शहर में चलने हैं और इनका रजिस्ट्रेशन होकर चालक को ड्राइविंग लाइसेंस भी लेना है। इनकी कीमत करीब सवा लाख है। नगर निगम ने जब कुछ ज्यादा ही रिक्शों का पंजीकरण कर दिया तो बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाकर इसे बंद करवाना पड़ा। विवेक मोटर्स के नाम से एक दुकान चल रही हैं ये बिना चेसिस नंबर वाली गाड़ी ज्यादा बेचते हैं। विक्रेता का कहना है कि उनका रिक्शा 75 हजार रुपए में बिक जाता है। आरटीओ से रजिस्ट्रेशन कराने की जिम्मेदारी हमारी नहीं है। वहीं दिव्या इंटरप्राइजेज के मालिक कहते हैं कि वे चेसिस नंबर वाले ई रिक्शा ही बेचते हैं। नगर निगम गलत तरीके से बिना चेसिस वाली गाड़ियों को रजिस्ट्रेशन कर रहा है।
आरटीओ कार्यालय में सिर्फ चेसिस वाले ई- रिक्शा का ही रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इनके लाइसेंस भी दिए जाते हैं। नगर निगम जिनका रजिस्ट्रेशन कर रहा है वह मोटर व्हीकल एक्ट के तहत हमारे दायरे में नहीं आते हैं। आरटीओ जिसका रजिस्ट्रेशन करते हैं उनको डीएल भी दिया जाता है। नगर निगम की ओर से किए गए रजिस्ट्रेशन का ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जा रहा है।
विज्ञापन
आरपी सिंह, एआरटीओ प्रशासन
विज्ञापन
एक नजर देख कर इन दो तरह के ई- रिक्शा शहर में अंतर कर पाना मुश्किल है । नगर निगम ने जिनका रजिस्ट्रेशन किया है वो रिक्शा इधर-उधर के क लपुर्जों से बनाए जा रहे हैं। इनमें चेसिस नंबर नहीं है। इनकी कीमत 75 से 80 हजार के बीच है। इन रिक्शों पर नगर निगम यूपी 25 एनएनवी की सीरीज से नंबर जारी किए हैं। इसे कोई भी चलाए, कोई चेक करने वाला नहीं है। जबकि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चेसिस नंबर वाले ई- रिक्शा ही शहर में चलने हैं और इनका रजिस्ट्रेशन होकर चालक को ड्राइविंग लाइसेंस भी लेना है। इनकी कीमत करीब सवा लाख है। नगर निगम ने जब कुछ ज्यादा ही रिक्शों का पंजीकरण कर दिया तो बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाकर इसे बंद करवाना पड़ा। विवेक मोटर्स के नाम से एक दुकान चल रही हैं ये बिना चेसिस नंबर वाली गाड़ी ज्यादा बेचते हैं। विक्रेता का कहना है कि उनका रिक्शा 75 हजार रुपए में बिक जाता है। आरटीओ से रजिस्ट्रेशन कराने की जिम्मेदारी हमारी नहीं है। वहीं दिव्या इंटरप्राइजेज के मालिक कहते हैं कि वे चेसिस नंबर वाले ई रिक्शा ही बेचते हैं। नगर निगम गलत तरीके से बिना चेसिस वाली गाड़ियों को रजिस्ट्रेशन कर रहा है।
विज्ञापन
आरटीओ कार्यालय में सिर्फ चेसिस वाले ई- रिक्शा का ही रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इनके लाइसेंस भी दिए जाते हैं। नगर निगम जिनका रजिस्ट्रेशन कर रहा है वह मोटर व्हीकल एक्ट के तहत हमारे दायरे में नहीं आते हैं। आरटीओ जिसका रजिस्ट्रेशन करते हैं उनको डीएल भी दिया जाता है। नगर निगम की ओर से किए गए रजिस्ट्रेशन का ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जा रहा है।
विज्ञापन
आरपी सिंह, एआरटीओ प्रशासन