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नहाय खाय के साथ छठ पूजा शुरू... खरना आज

Tue, 09 Nov 2021 01:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 09 Nov 2021 01:28 AM IST
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Chhath Puja begins with Nahay Khai... Kharna today
छठ पूजा की तैयारी करती एक महिला। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
रेलवे कॉलोनी, रुहेलखंड विश्वविद्यालय और कैंट के इलाकों में बड़े पैमाने पर तैयारियां
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बरेली। सूर्य उपासना के चार दिवसीय छठ महापर्व की नहाय-खाय के साथ सोमवार से शुरूआत हो गई। पहले दिन व्रती महिलाओं ने घर पर कद्दू और लौकी के साथ घरों पर हाथ से पीसे गए गेहूं के आटे की कचौड़ियों का प्रसाद लेकर व्रत का संकल्प लिया। छठ महापर्व के तहत मंगलवार का दिन खरना के रूप में मनाया जाएगा।
छठ पूजा को लेकर महिलाओं ने घरों की साफ-सफाई कर पवित्र किया। इसके बाद मिट्टी के नए चूल्हे पर बना भोजन ग्रहण कर व्रत का संकल्प लिया। भगवान सूर्य की उपासना के महापर्व को लेकर व्रती महिलाओं में भी उत्साह देखने को मिला। घरों पर छठ पूजा की तैयारियों के साथ बाजार में भी महिलाएं व्रत की सामग्री की खरीदारी करती नजर आईं। महिलाओं ने छठ पूजा में इस्तेमाल होने वाले सूप, नारियल, गन्ना के साथ कपड़ों और पूजा में इस्तेमाल होने वाली हर छोटी-बड़ी चीज की खरीदारी की। साज-श्रृंगार की दुकानों पर भी महिलाओं की भीड़ रही। यूनिवर्सिटी में छठ पूजा के लिए घाट बनाने का काम सोमवार को भी जारी रहा। सूर्य को अर्घ्य देने के लिए सोमवार को पूरा दिन घाट की साज-सज्जा का काम चलता रहा।
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कार्तिक शुक्ल की पंचमी तिथि को मनाया जाता है खरना
कार्तिक शुक्ल पंचमी तिथि को खरना मनाए जाने का प्रावधान है। इस दिन व्रती महिलाएं दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद शाम के समय गन्ने के रस में पकाए गए चावल की खीर के साथ दूध चावल और घी से चुपड़ी रोटी प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं। खरना के साथ व्रत का पारायण करने के बाद ही व्रती महिलाएं भोजन करती हैं।
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ऐसे हुई छठ पूजा की शुरूआत
छठ पूजा का वर्णन ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है। कथा के अनुसार जब राजा मनु के पुत्र राजा प्रियव्रत को कोई संतान नहीं हुई तो महर्षि कश्यप के कहने पर उन्होंने महायज्ञ आयोजित किया। इसके परिणामस्वरूप रानी गर्भवती हुई मगर दुर्भाग्यवश बच्चे का देहांत गर्भ में ही हो गया। अजन्मे शिशु की मौत की खबर पर पूरी प्रजा में शोक की लहर दौड़ गई। इसी समय आसमान में छठी मइया प्रकट हुईं। राजा प्रियव्रत की प्रार्थना पर उन्होंने बच्चे को जीवित कर दिया। मान्यता है कि तभी से यह त्योहार मनाया जाता है।
पीढ़ियों से हो रही है छठ पूजा
रुहेलखंड यूनिवसिर्टी के पास रहने वाली रेखा ने बताया परिवार में कई पीढ़ियों से छठी मइया की पूजा होती आ रही है। मायके से उन्हें यह व्रत करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने बताया छठी मइया से अब तक जो भी मनौती मांगी है, वह पूरी हुई है।

अनामिका शर्मा ने बताया साल भर छठ महापर्व का इंतजार रहता है। परिवार के दूसरे सदस्य भी महापर्व के दौरान घर पर इकठ्ठा होते हैं। परिवार के दूसरे सदस्य भी वर्षों से व्रत को करते आ रहे हैं। उनकी आस्था ने ही छठ व्रत रखने के लिए प्रेरित किया।
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