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नहाय-खाय के साथ छठ पूजा कल से
बरेली।
Updated Mon, 23 Oct 2017 01:49 AM IST
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प्रकृति और भगवान सूर्य की उपासना के त्योहार छठ की रौनक शहर में भी दिखने लगी है। मंगलवार को नहाय खाय के साथ चार दिवसीय उत्सव शुरू हो जाएगा। इस बार शोभन योग में त्योहार मनाया जाएगा जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ गई है। महिलाएं 36 घंटे के व्रत के बाद 27 अक्तूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारायण करेंगी।
24 अक्तूबर को नहाय खाय के साथ छठ पर्व शुरू हो जाएगा। 25 अक्तूबर को खरना होगा और 26 अक्तूबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। शहर में रामगंगा घाट, धोपेश्वरनाथ मंदिर, डिफेंस कालोनी, आईवीआरआई, रेलवे कालोनी, कर्मचारी नगर, रुहेलखंड विश्वविद्यालय में 26 अक्तूबर को अर्घ्य के दिन खास रौनक दिखेगी। आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि यह यह पर्व 27 योगाें में सबसे ज्यादा यश को सुशोभित करने वाला शोभन योग से शुरू हो रहा है।
- सूर्य रहेंगे तीन ग्रहों में गतिशील
आचार्य मुकेश के अनुसार छठ के दौरान सूर्य देव गुरु और बुध ग्रह के साथ तुला राशि में गतिशील रहेेंगे। ये त्रिग्रही योग यश, वैभव, प्रतिष्ठा, उन्नति, संपन्नता का कारक माना जाता है। जिन जातकों की कुंडली में सूर्य की दशा खराब चल रही है ऐसे लोगाें को यह पर्व काफी लाभ देगा। इस पर्व से दुख दूर होते हैं।
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द्रोपदी ने भी किया था व्रत
जब पांडव जुए में कौरवों से राजपाट हार गए थे तब द्रोपदी ने छठ का व्रत किया था। व्रत करने से द्रोपदी की सभी मनोवांछित इच्छाएं पूर्ण हुई थी। एक अन्य मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद श्रीराम और सीता जी ने भी यह व्रत रामराज्य की स्थापना के लिए किया था।
24 अक्तूबर को नहाय खाय के साथ छठ पर्व शुरू हो जाएगा। 25 अक्तूबर को खरना होगा और 26 अक्तूबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। शहर में रामगंगा घाट, धोपेश्वरनाथ मंदिर, डिफेंस कालोनी, आईवीआरआई, रेलवे कालोनी, कर्मचारी नगर, रुहेलखंड विश्वविद्यालय में 26 अक्तूबर को अर्घ्य के दिन खास रौनक दिखेगी। आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि यह यह पर्व 27 योगाें में सबसे ज्यादा यश को सुशोभित करने वाला शोभन योग से शुरू हो रहा है।
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- सूर्य रहेंगे तीन ग्रहों में गतिशील
आचार्य मुकेश के अनुसार छठ के दौरान सूर्य देव गुरु और बुध ग्रह के साथ तुला राशि में गतिशील रहेेंगे। ये त्रिग्रही योग यश, वैभव, प्रतिष्ठा, उन्नति, संपन्नता का कारक माना जाता है। जिन जातकों की कुंडली में सूर्य की दशा खराब चल रही है ऐसे लोगाें को यह पर्व काफी लाभ देगा। इस पर्व से दुख दूर होते हैं।
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द्रोपदी ने भी किया था व्रत
जब पांडव जुए में कौरवों से राजपाट हार गए थे तब द्रोपदी ने छठ का व्रत किया था। व्रत करने से द्रोपदी की सभी मनोवांछित इच्छाएं पूर्ण हुई थी। एक अन्य मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद श्रीराम और सीता जी ने भी यह व्रत रामराज्य की स्थापना के लिए किया था।