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चौकाचूल्हा पहला काम, प्रधानी तो चलती रहेगी
बरेली
Updated Sun, 29 Nov 2015 01:36 AM IST
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अफसाना बेगम :
नवाबगंज के ग्राम पंचायत सिंजौलिया में अपराह्न दो बजे वोटरों की लंबी लाइन लगी थी। मौजूदा प्रधान अफसाना बेगम के पति हारून वोटरों को बूथ तक लाने में व्यस्त थे। लोग उन्हें ही प्रधान जी कहकर बुला रहे थे। अफसाना दस साल से प्रधान हैं मगर उनका दखल सिर्फ दस्तखत तक सीमित रहता है। अमर उजाला टीम प्रधान के घर पहुंची तो अफसाना बेगम सिलबट्टे पर मसाला पीस रही थीं। घर में मेहमानों का जमावड़ा लगा था। पांचवीं क्लास तक पढ़ी अफसाना ने बताया कि 10 साल से प्रधान हैं। पहले सास अनीसा बानो प्रधान थीं। विकास कार्यों के बारे में पूछने पर जवाब मिला कि यह सब शौहर ही बताएंगे। हमें तो जहां बताया गया वहां साइन कर दिए। यह भी बताया कि घरवालों ने ही वोट मांग लिए। कभी-कभार महिलाओं से कहकर वोट देने देने की अपील कर दी गई। वोटिंग के दिन भी घर में व्यस्त रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब जो बाहर से मेहमान आए हैं, उन्हें खाना और नाश्ता कराना भी तो जिम्मेदारी है। प्रधानी तो चलती रहेगी।
मेहरूनिशा :
इसी गांव से मुख्त्यार की पत्नी मेहरूनिशा भी प्रधानी का चुनाव लड़ रही हैं। मतदान के दिन अपने छोटे से घर में वह खाना बनाने के लिए चावल साफ कर रही थीं। शौहर पोलिंग बूथ पर डटे थे। मेहरूनिशा ने बताया कि पिछली बार भी चुनाव लड़े थे। इस बार यदि जनता ने चुना तो गांव को चमका देंगे। ग्राम पंचायत लभेड़ा में सलमा बेगम, समर जहां, शमीम बानो और शबाना, ग्राम पंचायत रिछौला में चंदा बी, सहाना बी, नूरबानो, मेहरूनिशा, इशरत भी प्रधानी का चुनाव लड़ीं, मगर, गांव में सभी लोग इनके शौहरों को ही जानते मिले।
सरिता सिंह :
बहेड़ी के ग्राम पंचायत गुलड़िया भवानी में चौधरी वीरेंद्र सिंह की पत्नी सरिता सिंह पहली बार प्रधान पद के चुनाव लड़ रही हैं। वोटिंग के दिन भी उन्होंने घर का चूल्हा संभाला। उन्होंने कहा कि वह ग्रेजुएट हैं। राजनीति शास्त्र पढ़ा है इसलिए सियासत कैसे करनी है उन्हें इसकी समझ है। हरियाणा में मायका है। बचपन में इस तरह के चुनावों को बखूबी प्रबंधन किया है इसलिए चुनाव प्रचार और घर में सामंजस्य बनाने में दिक्कत नहीं हुई।
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शगुफ्ता बेगम :
बहेड़ी के ही मंडनपुर शुमाली की मौजूदा प्रधान शगुफ्ता बेगम ने पूरे पांच साल तक घर का चूल्हा संभाला और प्रधानी पति अनवार मलिक ने की। मतदान के दिन भी वह घर पर हीं रहीं। इस बार उनकी सौतन ने नामांकन कर उनके आगे रोड़ा अटका दिया था। हालांकि बाद में वह मान गईं और अपना नाम वापस ले लिया।
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नवाबगंज के ग्राम पंचायत सिंजौलिया में अपराह्न दो बजे वोटरों की लंबी लाइन लगी थी। मौजूदा प्रधान अफसाना बेगम के पति हारून वोटरों को बूथ तक लाने में व्यस्त थे। लोग उन्हें ही प्रधान जी कहकर बुला रहे थे। अफसाना दस साल से प्रधान हैं मगर उनका दखल सिर्फ दस्तखत तक सीमित रहता है। अमर उजाला टीम प्रधान के घर पहुंची तो अफसाना बेगम सिलबट्टे पर मसाला पीस रही थीं। घर में मेहमानों का जमावड़ा लगा था। पांचवीं क्लास तक पढ़ी अफसाना ने बताया कि 10 साल से प्रधान हैं। पहले सास अनीसा बानो प्रधान थीं। विकास कार्यों के बारे में पूछने पर जवाब मिला कि यह सब शौहर ही बताएंगे। हमें तो जहां बताया गया वहां साइन कर दिए। यह भी बताया कि घरवालों ने ही वोट मांग लिए। कभी-कभार महिलाओं से कहकर वोट देने देने की अपील कर दी गई। वोटिंग के दिन भी घर में व्यस्त रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब जो बाहर से मेहमान आए हैं, उन्हें खाना और नाश्ता कराना भी तो जिम्मेदारी है। प्रधानी तो चलती रहेगी।
मेहरूनिशा :
इसी गांव से मुख्त्यार की पत्नी मेहरूनिशा भी प्रधानी का चुनाव लड़ रही हैं। मतदान के दिन अपने छोटे से घर में वह खाना बनाने के लिए चावल साफ कर रही थीं। शौहर पोलिंग बूथ पर डटे थे। मेहरूनिशा ने बताया कि पिछली बार भी चुनाव लड़े थे। इस बार यदि जनता ने चुना तो गांव को चमका देंगे। ग्राम पंचायत लभेड़ा में सलमा बेगम, समर जहां, शमीम बानो और शबाना, ग्राम पंचायत रिछौला में चंदा बी, सहाना बी, नूरबानो, मेहरूनिशा, इशरत भी प्रधानी का चुनाव लड़ीं, मगर, गांव में सभी लोग इनके शौहरों को ही जानते मिले।
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सरिता सिंह :
बहेड़ी के ग्राम पंचायत गुलड़िया भवानी में चौधरी वीरेंद्र सिंह की पत्नी सरिता सिंह पहली बार प्रधान पद के चुनाव लड़ रही हैं। वोटिंग के दिन भी उन्होंने घर का चूल्हा संभाला। उन्होंने कहा कि वह ग्रेजुएट हैं। राजनीति शास्त्र पढ़ा है इसलिए सियासत कैसे करनी है उन्हें इसकी समझ है। हरियाणा में मायका है। बचपन में इस तरह के चुनावों को बखूबी प्रबंधन किया है इसलिए चुनाव प्रचार और घर में सामंजस्य बनाने में दिक्कत नहीं हुई।
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शगुफ्ता बेगम :
बहेड़ी के ही मंडनपुर शुमाली की मौजूदा प्रधान शगुफ्ता बेगम ने पूरे पांच साल तक घर का चूल्हा संभाला और प्रधानी पति अनवार मलिक ने की। मतदान के दिन भी वह घर पर हीं रहीं। इस बार उनकी सौतन ने नामांकन कर उनके आगे रोड़ा अटका दिया था। हालांकि बाद में वह मान गईं और अपना नाम वापस ले लिया।