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Bareilly News: बोल-सुन नहीं सकते, सफलता से मचा रहे शोर
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कमजोरी को बना लिया ताकत, मेहनत और प्रतिभा से पहचान बना रहे खिलाड़ी
बरेली। मूकबधिर बच्चों को कमजोर समझकर समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है, लेकिन यही बच्चे जब अवसर, मार्गदर्शन और सहयोग पाते हैं तो अपनी प्रतिभा से असाधारण मुकाम हासिल कर लेते हैं। एथलेटिक्स में भविष्य संवार रहे ये युवा भले-बोल सुन नहीं सकते, पर अपनी सफलता से शोर मचा रहे हैं।
जापान में हुए डेफ ओलंपिक्स में पांचवें स्थान पर रहे थे विवेक
बिजनौर के 27 वर्षीय विवेक राणा, वर्ष 2012 से एथलेटिक्स में प्रशिक्षण ले रहे हैं। वह 800 मीटर दौड़ में विशेषज्ञता रखते हैं। विवेक बताते हैं कि बचपन में उनका वजन अधिक था। वजन कम करने के लिए स्कूल में उन्हें दौड़ने के लिए प्रेरित किया गया। यही अभ्यास धीरे-धीरे उनकी पहचान बन गया। विवेक ने नवंबर-2025 में जापान में आयोजित डेफ ओलंपिक्स में पांचवां स्थान हासिल किया। नवंबर 2024 में मलयेशिया में हुए एशिया पैसेफिक डेफ गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया था।
सोनाक्षी ने जैवलिन को बनाया अपना साथी
शहर के आलोक नगर में रहने वाली 18 वर्षीय सोनाक्षी, शुरू से ही सुनने और बोलने में असमर्थ हैं। उनके पिता सत्यवीर सिंह बताते हैं कि बेटी का कई सालों तक इलाज कराया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने सोनाक्षी को खेलों की ओर मोड़ने का निर्णय लिया। सोनाक्षी ने खेल के प्रति गहरी रुचि दिखाई और जैवलिन को अपना साथी बना लिया। आज सोनाक्षी नियमित अभ्यास कर रहीं हैं और इसी में अपना भविष्य संवारने के लिए पूरी ताकत से जुटी हैं।
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एथलेटिक्स में पहचान बनाना चाहती हैं रिद्धि
संत नगर निवासी 18 वर्षीय रिद्धि भी एथलेटिक्स में अपनी अलग पहचान बनाने की राह पर हैं। रिद्धि जन्म से ही सुनने-बोलने में असमर्थ हैं। उनके पिता विक्रम सिंह ने बताया कि एक बार रिद्धि जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम गईं। यहां एथलेटिक्स प्रतियोगिता देखकर उनका मन खेलों में रम गया। तब उन्होंने महसूस किया कि खेल, बेटी के भविष्य का माध्यम बन सकता है। बीते एक वर्ष से रिद्धि 100 मीटर दौड़ का नियमित अभ्यास कर रही हैं और इसी में आगे बढ़ने के लिए प्रयासरत हैं। संवाद
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बरेली। मूकबधिर बच्चों को कमजोर समझकर समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है, लेकिन यही बच्चे जब अवसर, मार्गदर्शन और सहयोग पाते हैं तो अपनी प्रतिभा से असाधारण मुकाम हासिल कर लेते हैं। एथलेटिक्स में भविष्य संवार रहे ये युवा भले-बोल सुन नहीं सकते, पर अपनी सफलता से शोर मचा रहे हैं।
जापान में हुए डेफ ओलंपिक्स में पांचवें स्थान पर रहे थे विवेक
बिजनौर के 27 वर्षीय विवेक राणा, वर्ष 2012 से एथलेटिक्स में प्रशिक्षण ले रहे हैं। वह 800 मीटर दौड़ में विशेषज्ञता रखते हैं। विवेक बताते हैं कि बचपन में उनका वजन अधिक था। वजन कम करने के लिए स्कूल में उन्हें दौड़ने के लिए प्रेरित किया गया। यही अभ्यास धीरे-धीरे उनकी पहचान बन गया। विवेक ने नवंबर-2025 में जापान में आयोजित डेफ ओलंपिक्स में पांचवां स्थान हासिल किया। नवंबर 2024 में मलयेशिया में हुए एशिया पैसेफिक डेफ गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया था।
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सोनाक्षी ने जैवलिन को बनाया अपना साथी
शहर के आलोक नगर में रहने वाली 18 वर्षीय सोनाक्षी, शुरू से ही सुनने और बोलने में असमर्थ हैं। उनके पिता सत्यवीर सिंह बताते हैं कि बेटी का कई सालों तक इलाज कराया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने सोनाक्षी को खेलों की ओर मोड़ने का निर्णय लिया। सोनाक्षी ने खेल के प्रति गहरी रुचि दिखाई और जैवलिन को अपना साथी बना लिया। आज सोनाक्षी नियमित अभ्यास कर रहीं हैं और इसी में अपना भविष्य संवारने के लिए पूरी ताकत से जुटी हैं।
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एथलेटिक्स में पहचान बनाना चाहती हैं रिद्धि
संत नगर निवासी 18 वर्षीय रिद्धि भी एथलेटिक्स में अपनी अलग पहचान बनाने की राह पर हैं। रिद्धि जन्म से ही सुनने-बोलने में असमर्थ हैं। उनके पिता विक्रम सिंह ने बताया कि एक बार रिद्धि जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम गईं। यहां एथलेटिक्स प्रतियोगिता देखकर उनका मन खेलों में रम गया। तब उन्होंने महसूस किया कि खेल, बेटी के भविष्य का माध्यम बन सकता है। बीते एक वर्ष से रिद्धि 100 मीटर दौड़ का नियमित अभ्यास कर रही हैं और इसी में आगे बढ़ने के लिए प्रयासरत हैं। संवाद