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सीवर में समा सकती है गांधी आश्रम की कमाई
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Mon, 28 Nov 2016 12:41 AM IST
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Can fit in the sewer earned Gandhi Ashram
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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ईसाईयों की पुलिया स्थित गांधी आश्रम और सीवर के पानी का तालमेल भारत के स्वच्छ भारत अभियान को मुंह चिढ़ा रहा है। सालों से गांधी आश्रम के सामने खुला नाला बह रहा है। नाले की दीवारें दिन पर दिन गिरती जा रही हैं। सीवर का पानी दुकान की बुनियाद खोखली कर रहा है। पर नगर निगम को इसकी सुध नहीं।
लगभग 22-23 साल पहले ईसाईयों की पुलिया पर स्थापित श्री गांधी आश्रम कई सालों से अपनी दुर्दशा को रो रहा है। सड़क से आप देखें तो समझ नहीं पाएंगे कि गांधी आश्रम जाने का रास्ता किधर से है। दुकान के सामने सिर्फ नाला ही है। गौर करने पर बगल से दुकान तक पहुंचने का रास्ता दिखेगा। आश्रम के व्यवस्थापक रवींद्र तिवारी बताते हैं कि सात-आठ साल पहले नगर निगम ने सीवर साफ करने के लिए नाले के सीमेंटेड कवर को तोड़ा था। सीवर तो साफ न हो सका। नाला भी तब से खुला ही पड़ा है, जिसने दुकान का रास्ता ही बंद कर दिया। समस्या कितनी खतरनाक है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नाले के ऊपर दुकान की ओर से लोहे का जाल डलवाया गया था, जिसे सीवर से निकलने वाली जहरीली गैसों ने गला डाला। इन्हीं गैसों की बदबू में दुकान का तीन स्टाफ सुबह से शाम गुजारता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में इस समस्या के बारे में वार्ड के सभासद और मेयर को लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कुछ न हुआ। इस बारिश में नगर आयुक्त टीम के साथ निरीक्षण को आए। लेकिन उसके बाद कोई झांकने नहीं आया। इसका असर यह भी हुआ कि दुकान की वार्षिक आय 20 से 25 प्रतिशत कम हो गई।
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लगभग 22-23 साल पहले ईसाईयों की पुलिया पर स्थापित श्री गांधी आश्रम कई सालों से अपनी दुर्दशा को रो रहा है। सड़क से आप देखें तो समझ नहीं पाएंगे कि गांधी आश्रम जाने का रास्ता किधर से है। दुकान के सामने सिर्फ नाला ही है। गौर करने पर बगल से दुकान तक पहुंचने का रास्ता दिखेगा। आश्रम के व्यवस्थापक रवींद्र तिवारी बताते हैं कि सात-आठ साल पहले नगर निगम ने सीवर साफ करने के लिए नाले के सीमेंटेड कवर को तोड़ा था। सीवर तो साफ न हो सका। नाला भी तब से खुला ही पड़ा है, जिसने दुकान का रास्ता ही बंद कर दिया। समस्या कितनी खतरनाक है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नाले के ऊपर दुकान की ओर से लोहे का जाल डलवाया गया था, जिसे सीवर से निकलने वाली जहरीली गैसों ने गला डाला। इन्हीं गैसों की बदबू में दुकान का तीन स्टाफ सुबह से शाम गुजारता है।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में इस समस्या के बारे में वार्ड के सभासद और मेयर को लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कुछ न हुआ। इस बारिश में नगर आयुक्त टीम के साथ निरीक्षण को आए। लेकिन उसके बाद कोई झांकने नहीं आया। इसका असर यह भी हुआ कि दुकान की वार्षिक आय 20 से 25 प्रतिशत कम हो गई।
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