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Bareilly News: जामा मस्जिद मामले में बौद्ध अनुयायी भी पहुंचे अदालत

Tue, 29 Nov 2022 11:56 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 29 Nov 2022 11:56 PM IST
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Buddhist followers also reached the court in Jama Masjid case
दावा - बौद्ध धर्म की है संपत्ति, पक्षकार बनाने की अपील, हिंदू महासभा भी दाखिल करेगी एतराज
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अब सात दिसंबर को होगी मुकदमे की अगली सुनवाई
बदायूं। शहर की जामा मस्जिद को हिंदू धर्मस्थल बताने संबंधी मुकदमे में अब एक और पक्ष सामने आ गया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने पक्षकार बनने के लिए अर्जी दी है। उनके वकील मोहर सिंह शाक्य ने जामा मस्जिद को सम्राट अशोक का किला बताते हुए उसे बौद्ध धर्म की संपत्ति होने का दावा किया है। अगली सुनवाई सात दिसंबर को होगी। इसी दिन हिंदू महासभा की ओर से एतराज दाखिल किया जाएगा।
सिविल जज सीनियर डिवीजन के न्यायाधीश विजय कुमार गुप्ता की अदालत में विचाराधीन जामा मस्जिद के मुकदमे की मंगलवार को सुनवाई हुई। इसमें हिंदू महासभा और इंतजामिया कमेटी के वकील पहुंचे। सुनवाई के दौरान न्यायालय में हाजिर न होने वाले पक्षकारों के लिए गजट का आदेश होना था। इसके अलावा पिछली तारीखों पर दाखिल प्रपत्रों को लेकर बहस होनी थी, लेकिन सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया।
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अब इस मुकदमे में बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने पक्षकार बनने के लिए अपनी अर्जी पेश की है। उनके वकील मोहर सिंह शाक्य का कहना है कि जिला सूचना डायरी में 19 अगस्त 1986 और 2006- 2007 में वर्णित मुस्लिम इतिहासकार फीरोज खां लोधी के अनुसार 256ईसवीं में सम्राट अशोक ने बदायूं में एक किला और एक बौद्ध विहार बनवाया था। उस किले को बौद्धमऊ नाम दिया गया था। उनका दावा है कि गजेटियर में भी किले को बौद्ध राजा द्वारा निर्मित कराया जाना लिखा है। उन्होंने इस जामा मस्जिद को उस किले की संपत्ति बताते न्यायालय से पक्षकार बनाने की अपील की है। बौद्ध अनुयायियों की ओर से अर्जी पर मोहर सिंह शाक्य, कालीचरन सिंह शाक्य, दयाशंकर, भूप सिंह और अभिलाख सिंह के हस्ताक्षर मौजूद हैं। न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए सात दिसंबर तारीख तय की है।
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सम्राट अशोक ने नहीं राठौर वंश के राजा ने बनवाया था किला
हिंदू महासभा के वकील वेदप्रकाश साहू ने बताया कि राठौर वंश के राजा बुद्धा बदायूं आए थे। राजा विग्रहपाल, राजा भुवन पाल, राजा अजयपाल और राजा महीपाल आदि सब उनके वंशज थे। यह किला सम्राट अशोक ने नहीं बनवाया था। यह किला राठौर वंश के राजा ने बनवाया और शासन किया। इसके सुबूत तमाम किताबों में दर्ज हैं। बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने जो अर्जी दी है। वह अगली सुनवाई पर खारिज हो जाएगी। इसका हम जवाब भी देंगे।

राजा महीपाल के किले के लिए हमने लड़ी है लड़ाई : मुकेश
हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल ने बताया कि राजा महीपाल के किले को लेकर हमने लड़ाई लड़ी है। काफी समय से हम इसे मुक्त कराने की मांग करते आए हैं। यह मामला हमने शासन तक पहुंचाया था। साथ ही न्यायालय में इसका मुकदमा दायर कराया। अगर यह किला सम्राट अशोक ने बनवाया होता तो वह इसे मुक्त कराने की कोशिश करते। उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। बीच में आकर एक अर्जी दे दी। इसका हम विरोध करते हैं।

बौद्ध धर्म की संपत्ति है किला
पिछले कई दिन से हम इस मामले को देख रहे थे। हमने कुछ किताबें देखीं। उनमें सम्राट अशोक द्वारा यह किला बनवाए जाने का जिक्र था। इससे हमने न्यायालय में पक्षकार बनाए जाने की अर्जी दी है।

- मोहर सिंह शाक्य, बौद्ध धर्म के अनुयायियों के वकील

यह है मामला
हिंदू महासभा की ओर से आठ अगस्त 2022 को सिविल जज सीनियर डिजीवन की अदालत में भगवान नीलकंठ बनाम इंतजामिया कमेटी जामा मस्जिद के नाम से परिवाद दायर कराया गया था। 11 अगस्त को इसमें न्यायालय प्रबंधक की आख्या मांगी गई थी। 22 अगस्त को इंतजामिया कमेटी हाजिर हुई। इसके बाद सुनवाई को 26 अगस्त तारीख लगी थी। उसी दिन इंतजामिया कमेटी ने परिवाद खारिज कराने को प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें एक सितंबर को बहस हुई। दूसरे दिन मुकदमा स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद डीएम की ओर से वकील हाजिर हुए और उन्होंने भी मुकदमा खारिज कराने की मांग की थी। इसमें अभी तक पुरातत्व विभाग, यूनियन ऑफ इंडिया, मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन और वक्फ बोर्ड आदि पक्षकार हाजिर नहीं हुए हैं। उनके लिए गजट कराया जा रहा है।
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