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मैदान पर छाए गोरखपुर के जुड़वां भाई
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Mon, 05 Feb 2018 12:48 PM IST
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बैडमिंटन में ब्वॉयज डबल्स के फाइनल में खेलने उतरे गोरखपुर के जुड़वा भाई किशन सिंह और कन्हैया सिंह ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए शानदार जीत हासिल की। काफी हद तक एक जैसी शक्ल वाले यह जुड़वां भाई पहली बार किसी प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में एक साथ खेलने उतरे और जीत दर्ज की। मुकाबले में दोनों में कमाल का तालमेल दिखाया। बैडमिंटन हाल में मौजूद लोग उनके खेल की तकनीक के साथ ही उनकी शक्ल भी गौर से देख रहे थे, क्योंकि दोनों ही एक से लग रहे थे।
प्रतियोगिता में पहले दोनों एकल मुकाबले में उतरे लेकिन हार गए। किशन भी एकल का क्वार्टर फाइनल हारे और कन्हैया भी। तब दोनों ने खुद ही तय किया कि डबल्स में वे एक साथ खेलेंगे। जीतके प्रति उनका आत्मविश्वास देखकर कोच अभिषेक ने उनकी जोड़ी कोर्ट पर उतार दी। उनका मेरठ के शटलरों से मुकाबला हुआ। पहला सेट 17-21 से गवांने के बाद दोनों भाइयों ने जबरदस्त वापसी की। दूसरा सेट 21-13 और तीसरा सेट 21-16 से जीता। क्वार्टर फाइनल में भी उनका तालमेल देखने लायक था।
उनके कोच अभिषेक कहते हैं कि दोनों साथ खेलते हैं तो उनका तालमेल अपने आप ही बन जाता है, उनको बताने की भी जरूरत नहीं होती। किशन और कन्हैया कहते हैं कि पिता अनुग्रह नारायण सिंह के देहांत के बाद चाचा मानिक प्रसाद सिंह ने मनोबल बढ़ाया। बड़े भाई धमेंद्र बैडमिंटन के नेशनल खिलाड़ी रहे चुके हैं। अब उन दोनों का सपना देश के लिए मेडल जीतने का है।
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प्रतियोगिता में पहले दोनों एकल मुकाबले में उतरे लेकिन हार गए। किशन भी एकल का क्वार्टर फाइनल हारे और कन्हैया भी। तब दोनों ने खुद ही तय किया कि डबल्स में वे एक साथ खेलेंगे। जीतके प्रति उनका आत्मविश्वास देखकर कोच अभिषेक ने उनकी जोड़ी कोर्ट पर उतार दी। उनका मेरठ के शटलरों से मुकाबला हुआ। पहला सेट 17-21 से गवांने के बाद दोनों भाइयों ने जबरदस्त वापसी की। दूसरा सेट 21-13 और तीसरा सेट 21-16 से जीता। क्वार्टर फाइनल में भी उनका तालमेल देखने लायक था।
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उनके कोच अभिषेक कहते हैं कि दोनों साथ खेलते हैं तो उनका तालमेल अपने आप ही बन जाता है, उनको बताने की भी जरूरत नहीं होती। किशन और कन्हैया कहते हैं कि पिता अनुग्रह नारायण सिंह के देहांत के बाद चाचा मानिक प्रसाद सिंह ने मनोबल बढ़ाया। बड़े भाई धमेंद्र बैडमिंटन के नेशनल खिलाड़ी रहे चुके हैं। अब उन दोनों का सपना देश के लिए मेडल जीतने का है।
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