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मुसलमान अपने मसले शरई अदालतों में लाएं
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Mon, 28 Nov 2016 12:41 AM IST
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Bring your issues Muslim Sharia courts
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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इस्लामिक स्टडीज सेंटर, मथुरापुर में भी बड़ी संख्या में अकीदतमंदों की मौजूदगी में ताजुश्शरिया मुफ्ती अख्तर रजा खां उर्फ अजहरी मियां ने दोपहर 2.38 बजे 98वें उर्स-ए-रजवी कादरी में इमाम अहमद रजा फाजिले बरेलवी के कुल शरीफ पर दुआ कराई। यहां देशभर से आए उलमा ने कहा कि मुसलमान अपने मसलों को कोर्ट में ले जाने के बजाए शरई अदालतों में लाएं। शरीयत का कानून किसी दुनिया वाले का कानून नहीं है। यह कानून अल्लाह के रसूल ने बनाया हुआ है। इसे कोई नहीं बदल सकता है।
तीसरे दिन उर्स का आगाज तिलावते कुरआन से कारी वसीम रजा ने किया। कालपी शरीफ के सज्जादानशीन सैय्यद ग्यास मियां ने कहा कि बरेली हमारा मरकज है। हमें इश्क के मुस्तफा इसी दर से मिला है। शुद्धिकरण की तहरीक से लेकर नसबंदी का फतवा और अब मुस्लिम पर्सनल लॉ, तीन तलाक आला हजरत के दरबार में ही काम हुआ। मुफ्ती जियाउल मुस्तफा ने कहा कि आला हजरत के दो नगीने मौलाना हामिद रजा खां और मुफ्ती आजम-ए-हिंद थे। ताजुश्शरिया उन्हीं की निशानी हैं। मुफ्ती शमशान हुसैन रजवी ने कहा कि हम मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नहीं, बल्कि शरई कांउसलिंग ऑफ इंडिया के मुताबिक चलने वालों में से हैं। मुफ्ती मिराज उल कादरी का जोर मुसलमानों के मसलों पर रहा। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अपने मसले शरई अदालतों में निपटाने चाहिए। कोर्ट में जाने से बचने की जरूरत है। संचालन कर रहे मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि जमात-रजा-ए-मुस्तफा तीन तलाक और मुस्लिम पर्सनल लॉ का मसला पूरे मुल्क में उठा रही है। मुफ्ती रियाजउद्दीन बनारसी, मौलाना शहजाद आलम, मौलाना जाकिर हुसैन, मुफ्ती गुलजार, मौलाना मुख्तार कलकत्तवी आदि विचार रखे। हस्सान रजा, शाहिद रजा, राशिद रजा, सईद मुजफ्फर ने नातिया कलाम पेश किया।
मौलाना अफजाल रजवी, कारी फैजुल नबी आदि ने फातिहा पढ़ी। दुआ कराने के बाद हजारों की तादात में लोग अजहरी मियां के मुरीद हुए। शाम को मौलाना असजद मियां ने बगदाद शरीफ से आई चादर पेश की। इस मौके पर मौलाना शकील, मौलाना जाहिद रजा, काजी काजिम रजा, मौलना नश्तर फारुकी आदि मौजूद रहे।
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तीसरे दिन उर्स का आगाज तिलावते कुरआन से कारी वसीम रजा ने किया। कालपी शरीफ के सज्जादानशीन सैय्यद ग्यास मियां ने कहा कि बरेली हमारा मरकज है। हमें इश्क के मुस्तफा इसी दर से मिला है। शुद्धिकरण की तहरीक से लेकर नसबंदी का फतवा और अब मुस्लिम पर्सनल लॉ, तीन तलाक आला हजरत के दरबार में ही काम हुआ। मुफ्ती जियाउल मुस्तफा ने कहा कि आला हजरत के दो नगीने मौलाना हामिद रजा खां और मुफ्ती आजम-ए-हिंद थे। ताजुश्शरिया उन्हीं की निशानी हैं। मुफ्ती शमशान हुसैन रजवी ने कहा कि हम मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नहीं, बल्कि शरई कांउसलिंग ऑफ इंडिया के मुताबिक चलने वालों में से हैं। मुफ्ती मिराज उल कादरी का जोर मुसलमानों के मसलों पर रहा। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अपने मसले शरई अदालतों में निपटाने चाहिए। कोर्ट में जाने से बचने की जरूरत है। संचालन कर रहे मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि जमात-रजा-ए-मुस्तफा तीन तलाक और मुस्लिम पर्सनल लॉ का मसला पूरे मुल्क में उठा रही है। मुफ्ती रियाजउद्दीन बनारसी, मौलाना शहजाद आलम, मौलाना जाकिर हुसैन, मुफ्ती गुलजार, मौलाना मुख्तार कलकत्तवी आदि विचार रखे। हस्सान रजा, शाहिद रजा, राशिद रजा, सईद मुजफ्फर ने नातिया कलाम पेश किया।
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मौलाना अफजाल रजवी, कारी फैजुल नबी आदि ने फातिहा पढ़ी। दुआ कराने के बाद हजारों की तादात में लोग अजहरी मियां के मुरीद हुए। शाम को मौलाना असजद मियां ने बगदाद शरीफ से आई चादर पेश की। इस मौके पर मौलाना शकील, मौलाना जाहिद रजा, काजी काजिम रजा, मौलना नश्तर फारुकी आदि मौजूद रहे।
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