तो जान लें ये तेल-हल्दी-मिर्च सब है अनसेफ

न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Tue, 17 Apr 2018 06:47 PM IST
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मार्च के महीने में त्योहारी सीजन के दौरान जब कारोबारी बाजार में करोड़ों रुपये की खाद्य सामग्री खपाने में जुटे हुए थे, उसी दौरान जिला प्रशासन ने अभियान चलाकर हल्दी, मिर्च और सरसों के तेल नमूने भरकर उन्हें परीक्षण के लिए भेजा था। अब लैब से आई रिपोर्ट में इन नमूनों को अनसेफ बताया गया है यानी हल्दी-मिर्च से लेकर सरसों का तेल तक खाने लायक नहीं निकला। प्रशासनिक स्तर पर इन कारोबारियों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी तो शुरू कर दी गई है, लेकिन जिन लोगों ने इन चीजों का जाने-अनजाने इस्तेमाल किया था, जाहिर है कि वे इसका खामियाजा भुगत ही रहे होंगे। 
सरकारी महकमों की साठगांठ और भ्रष्ट सिस्टम की आड़ में मुनाफाखोर किस हद तक जा सकते हैं, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं है। महीना भर पहले 12 से 18 मार्च तक खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) की टीम ने बाजार में नमूने भरने का अभियान चलाया था। इस दौरान मोहनपुर में सोनू वर्मा की दुकान से सफलता नामक ब्रांड का कच्ची सरसों के तेल का नमूना भरा गया जिसे लैब में हुए परीक्षण के बाद असुरक्षित बताया गया है। कालीबाड़ी में अमित दीक्षित चक्की वाले और मोहित गुप्ता के यहां से हल्दी- मिर्च पाउडर के सैंपल लिए गए थे, इन दोनों स्थानों से लिए सैंपल भी लैब परीक्षण में अनसेफ पाए गए, यानी यह दोनों मसाले खाने योग्य नहीं थे। लैब से जारी की गई रिपोर्ट में सरसों के तेल और इन मसालों में घातक केमिकल कलर मिलाने की भी पुष्टि की गई है।
श्यामगंज में सचिन, किरन और जयभारत ब्रांड के खाद्य तेल के नमूने भी लैब परीक्षण में मानकों पर खरे नहीं उतरे। याद दिला दें कि जब यहां ये नमूने भरे गए थे, उस दौरान व्यापारियों ने उसका विरोध भी किया था। अभियान के दौरान एफएसडीए ने दोनों प्रतिष्ठानों पर स्टाक सीज कर दिया था। एफएसडीए की अभिहित अधिकारी ममता कुमारी ने बताया कि इससे पहले भी यह ब्रांड जांच में सही नहीं मिले थे। सफलता ब्रांड का कच्ची घानी सरसों का तेल दूसरे जिले का उत्पाद है। इसे बरेली में बेचा जा रहा था, इसलिए दुकानदार और निर्माता दोनों पर कानूनी कार्रवाई होगी। कोर्ट में मुकदमा दायर करने की अनुमति खाद्य आयुक्त से मांगी गई है। उन्होंने बताया कि जल्द ही खाद्य तेल और मसालों के और भी सैंपल भरे जाएंगे, क्योंकि सहालग शुरू हो गए हैं।  

यह है लैब रिपोर्ट

उत्पाद                 विश्लेषण      विक्रेता/निर्माता
सफलता कच्ची 
घानी सरसों तेल      अनसेफ       सोनू वर्मा, मोहनपुर
मिर्च पाउडर          अनसेफ      अमित दीक्षित, कालीबाड़ी
हल्दी पाउडर         अनसेफ       मोहित गुप्ता, श्यामगंज
सचिन ब्रांड
पामोलिन तेल        मिसब्रांड,      जेएसएस कंपनी, श्यामगंज
                     सबस्टैंडर्ड     
जयभारत ब्रांड        मिसब्रांड,     लालचंद एग्रो, राधेश्याम भाटिया
इडेबल ऑयल       सबस्टैंडर्ड 
 
तेल में घातक केमिकल 
साधारण आयातित खाद्य तेल को कम खर्च पर सरसों का तेल बनाने का धंधा बरेली समेत कई जिलों पर बड़े पैमाने पर चल रहा है। खाद्य तेल में पीला सिंथेटिक रंग और एसेंस मिलाया जाता है। दोनों केमिकल बाजार में उपलब्ध हैं। घर-घर के किचन में ये हल्दी-मिर्च और खाद्य तेल इस्तेमाल होता है। बड़े पैमाने पर इसकी मांग है।

20 करोड़ का कारोबार
मांग ज्यादा होने से गली मोहल्लों में सौ से ज्यादा चक्कियाें पर हल्दी, मिर्च, धनिया, खटाई, गर्म मसाला पाउडर तैयार हो रहे हैं। छोटे-बडे़ और ग्रामीण बाजारों तक इसकी सप्लाई का नेटवर्क बना हुआ है। सबसे ज्यादा सप्लाई हलवाई, रेस्त्रां और शादी ब्याह में होती है। हर माह बीस करोड़ रुपये से ज्यादा कारोबार हो रहा है।

सिंथेटिक कलर और एसेंस से ये हैं नुकसान
सरसों का तेल बनाने में इस्तेमाल होने वाला ऑयल मस्टर्ड पूरी तरह सिंथेटिक है।  महाराजा नामक एसेंस बनाने वाली कंपनी कंपनी गुजरात में है। खाद्य तेल अथवा अन्य चीजों में इसे मिलाना अनुचित है। इसके इस्तेमाल से त्वचा में बड़े स्तर पर जलन, खुजली आदि होती है। आंखों के लिए तो ये बेहद घातक माना जाता है, इससे आंख की रोशनी तक प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस केमिकल का असर तुरंत नहीं दिखता है, यह स्लो प्वाइजन है। हल्दी- मिर्च पाउडर में लाल और पीला सिंथेटिक रंग पिसाई के दौरान ही मिलाया जाता है। खाद्य पदार्थों में सिंथेटिक रंग और एसेंस आदि मिलाने में काफी सतर्कता बरती जाती है, क्योंकि जरा भी अनुपात बिगड़ने पर ये केमिकल अपना जहरीला प्रभाव तेजी से दिखाता है।

क्या करें
अगर आप अपने स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील हैं तो सस्ते और चालू मार्का हल्दी- मिर्च और अन्य मसाले इस्तेमाल करने से बचें। बेहतर होगा कि घर में पीसकर किचन में इस्तेमाल करें, अन्यथा ब्रांडेड पाउडर लें। खाद्य तेल में ब्रांड और उत्पाद चयन सावधानी बरतें, क्योंकि सस्ते के चक्कर में ज्यादातर लोग  मिलावटी खाद्य तेल खरीदते हैं, दुकानदारों को भी इसमें ज्यादा मार्जिन मिलता है।

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