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बरेली के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. बृजेश्वर की किताब का नई दिल्ली में हुआ विमोचन

Fri, 08 Apr 2022 01:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 08 Apr 2022 01:03 AM IST
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Bareilly's Orthopedic Surgeon Dr. Brijeshwar's book released in New Delhi
Bareilly's Orthopedic Surgeon Dr. Brijeshwar's book released in New Delhi
बरेली। शहर के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन, लेखक और रंगकर्मी डॉ. बृजेश्वर सिंह की दूसरी किताब ‘नेक्स्ट पेशेंट, प्लीज’ को देश के बड़े लेखकों और आलोचकों की सराहना मिल रही है। इस किताब का विमोचन पिछले दिनों नई दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में हुआ था। डॉ. बृजेश्वर ने अपने मरीजों से प्रेरित होकर इस किताब में 38 मार्मिक कहानियों को संजोया है।
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‘नेक्स्ट पेशेंट, प्लीज’ की सराहना करने वालों में दिग्गज लेखक व आलोचक तथा यूपीएससी के पूर्व सदस्य प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल भी शामिल हैं। उनका कहना है कि इंसान की टूटन केवल हाथ-पांव की ही नहीं बल्कि आत्मा और चेतना की भी होती है। डॉक्टर को मरीज से इतना व्यक्तिगत रूप से भी नहीं जुड़ना चाहिए कि ऑपरेशन करते समय उसके हाथ कांपने लगें और न ही उसे मरीज को निर्जीव वस्तु की तरह देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे डॉ. बृजेश्वर के लेखन के प्रशंसक इसलिए हैं क्योंकि इन कहानियों में उन्हें यह नाजुक संतुलन साफ नजर आता है।
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प्रख्यात लेखिका सुमन केशरी ने किताब के बारे में कहा कि डॉ. बृजेश्वर की कहानियों में इंसानी जज्बात को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। वे इस बात पर विश्वास करते हैं कि हर मरीज अलग है। उसके शरीर, मन और आत्मा की मांग अलग है। इसीलिए हर मरीज अपनी कहानी अलग तरीके से कहता है। डॉ. बृजेश्वर ने इसको सही ढंग से समझते हुए अपनी कहानियों में पिरोया है जो एकदम अद्भुत है।
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उर्दू लेखक प्रोफेसर डॉ. खालिद जावेद ने किताब पर टिप्पणी करते हुए कहा कि डॉ. बृजेश्वर की कहानियों में साफ नजर आता है कि वो एक डॉक्टर के तौर पर अपना काम करके रुक नहीं जाते, बल्कि मरीज के आंतरिक द्वंद्व और दर्द को समझकर आगे बढ़ते हैं। यही वजह है कि वे ऐसी अनूठी कहानियां हम तक पहुंचा पाते हैं।
प्रसिद्ध वैस्कुलर सर्जन और लेखक डॉ. अम्बरीश सात्विक ने भी डॉ. बृजेश्वर सिंह की किताब का सराहना की है। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह ने मरीजों के दर्द से आगे जाकर उनकी स्थिति के मर्म को समझा है, इसीलिए वे इतनी असरदार सच्ची कहानियां लिख सके।

अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शायर प्रो. वसीम बरेलवी ने इस किताब का प्राक्कथन लिखा है, जिसमें उन्होंने डॉ. बृजेश्वर सिंह की दिली कैफियत को अपने एक शेर के माध्यम से उकेरा है। ‘अजीब दर्द का रिश्ता दिखाई देता है, कि हर गम आशना अपना दिखाई देता है।’ इसके अतिरिक्त हिंदी फिल्म जगत के प्रसिद्ध युवा फिल्मकार इम्तियाज अली ने इस किताब के कवर पेज पर अपनी टिप्पणी लिखी है। मशहूर रंगकर्मी, लेखक व अभिनेता मानव कौल नई दिल्ली में आयोजित विमोचन समारोह के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने भी डॉ. बृजेश्वर सिंह के लेखन और रंगकर्म के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की।
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