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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से टूटा बच्चों का सुरक्षा चक्र

Thu, 23 Sep 2021 02:11 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 23 Sep 2021 02:11 AM IST
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Bareilly: Roads submerged in water and power failure
जिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़।

जिले में 70 फीसदी से ज्यादा बच्चों का नहीं हो पाया टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की सेहत की भी परवाह नहीं

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बरेली। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जिले में हजारों मासूमों का सुरक्षा चक्र टूट गया है। तमाम बीमारियों से उन्हें सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण अभियान सिर्फ 30 फीसदी बच्चों को टीके लगाने के बाद ठहर गया। बच्चों के अलावा ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को भी टीके नहीं लग पाए। विभागीय सर्विलांस में यह लापरवाही सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अब कोरोना को इसके लिए जिम्मेदार बता रहा है।
कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान तो ‘मिशन इंद्रधनुष’ के तहत होने वाला नियमित टीकाकरण अभियान बुरी तरह प्रभावित हुआ ही, उसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग इस अभियान पर काम नहीं शुरू किया। बच्चों को अलग-अलग आयुवर्ग के हिसाब से दस वैक्सीन लगाई जाती हैं मगर जिले में हजारों बच्चे अब तक इन टीकों से वंचित हैं। हजारों की तादाद में गर्भवती महिलाओं को भी टिटनेस और डिप्थीरिया (टीडी) की वैक्सीन नहीं लगी है।
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स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में इस बार सिर्फ 32 फीसदी गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण हुआ है। बच्चों के टीकाकरण की हालत और खराब है। अलग-अलग आयुवर्ग के बच्चों को 16 से 30 फीसदी तक ही टीका लग पाया है। कई महीनों से जिले में कोरोना के नाममात्र केसों पर खुशी जता रहे अफसरों का दावा है कि अगर कोरोना संक्रमण हावी न हुआ तो शेष 70 फीसदी टीकाकरण अगले छह महीने में पूरा कर लिया जाएगा।
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बच्चों को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखता है टीकाकरण

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश अग्रवाल बताते हैं कि टीकाकरण से नवजात बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है और वे गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं। प्रतिरोधक क्षमता से ही बच्चे कोरोना संक्रमित होकर भी सुरक्षित रहे। 12 से 24 महीने के बीच बच्चों को दो, चार, नौ, 12 और 24 महीने के अंतर पर टीके लगते हैं। टीके न लगने से बच्चों रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।

गर्भवती महिलाओं की सेहत से भी खिलवाड़

स्वास्थ्य विभाग को वर्ष 2021-22 में 151859 टीडी वैक्सीन लगाने का लक्ष्य मिला था मगर 48774 वैक्सीन ही लगाई जा सकीं। गर्भवती को दो बार टिटनेस का इंजेक्शन लगाया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार बड़ी तादाद में यह इंजेक्शन भी नहीं लगा।

ये बच्चों के टीकाकरण का शेड्यूल

  • - जन्म के 24 घंटे में बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी, ओरल पोलिया वैक्सीन (ओपीवी-0)
  • - छह हफ्ते होने पर डीपीटी-1, इनएक्टिवेटिड पोलियो वैक्सीन (आईपीवी-1), ओपीवी-1, रोटावायरस-1, न्यूमोकॉकल कॉन्जुगेट वैक्सीन (पीसीवी-1)
  • - दस हफ्ते होने पर डीपीटी-2, ओपीवी-2, रोटावायरस-2
  • - 14 हफ्ते होने पर डीपीटी-3, ओपीसी-3, रोटावायरस-3, आईपीवी-2, पीसीवी-2
  • - 9 से 12 महीने होने पर खसरा और रूबेला-1
  • - 16 से 24 महीने होने पर खसरा-2, डीपीटी बूस्टर-1, ओपीवी बूस्टर
  • - पांच, दस और 16 वर्ष होने पर टीडी वैक्सीन

इन बीमारियों से बचाते हैं टीके

  • बीसीजी तपेदिक या टीबी
  • पेंटावेलेंट काली खांसी, डिप्थीरिया, टिटनेस
  • चिकिनपॉक्स चिकिनपॉक्स
  • इन्फ्लूएंजा सर्दी, खांसी और जुकाम
  • एमएमआर खसरा, गलसुआ और रूबैला
  • रोटावायरस वायरस का संक्रमण
  • नियोमोकोकल निमोनिया
  • पोलियो अपंगता से बचाव
  • हीमोफिलस बी हेपेटाइटिस

कोरोना के दौरान नियमित टीकाकरण प्रभावित हुआ था। दूसरी लहर थमने के बाद तेजी से लक्ष्य पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। गर्भवती महिलाएं और बच्चों के परिजन खुद भी जागरूक हो जाएं तो लक्ष्य पूरा करने में सहयोग मिलेगा। - डॉ. बलबीर सिंह, सीएमओ

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