बरेलीः फिर ट्रांसफार्मरों की हेराफेरी के राज दफन करने की तैयारी
दिन भर खंगाले गए रिकॉर्ड, एसडीओ-जेई से पूछताछ फिर भी कोई नतीजा नहीं
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तीन दिन बाद भी दर्ज नहीं हुई एफआईआर, अफसर भी नहीं दिखा रहे दिलचस्पी
बरेली/भुता। सरकारी ट्रांसफार्मरों की हेराफेरी करने वाला रैकेट इस बार भी हाथ से बाहर निकलता दिख रहा है। बिजली विभाग के अधिकारी इस मुद्दे पर खामोश हैं कि किसानों के नाम स्टोर से निकले ट्रांसफार्मर किस तरह दलालों के हाथ बिक जाते हैं तो दूसरी ओर भुता पुलिस ने भी ईंट भट्ठे से सरकारी ट्रांसफार्मर बरामद होने के मामले में तीन दिन बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की है। मंगलवार को इस मामले में एसडीओ और जूनियर इंजीनियर से जरूर लंबी पूछताछ की गई लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला।
सरकारी ट्रांसफार्मरों की हेराफेरी का खेल काफी लंबे समय से चल रहा है। भुता इलाके में ही कुछ समय के अंदर तमाम ऐसे सरकारी ट्रांसफार्मर निजी संस्थानों में लगे पाए गए हैं जो बिजली विभाग के रिकॉर्ड में किसानों के नाम आवंटित हुए थे। यह मामला बिजली विभाग में ऊपर तक जानकारी में पहुंचने के बावजूद न जांच हुई न उस रैकेट को चिन्हित किया गया जो लंबे समय से यह हेराफेरी कर रहा है। हाल ही में एक फौजी की शिकायत पर उसकी पत्नी के नाम ट्यूबवेल के लिए आवंटित एक ट्रांसफार्मर का गोलमाल का ताजा मामला सामने आया है। इसकी छानबीन हुई तो पता चला कि ट्रांसफार्मर अवैध रूप से एक ईंट भट्ठे पर लगा हुआ है। पुलिस ने भट्ठे से ट्रांसफार्मर बरामद किया तो पता लगा कि वह ट्रांसफार्मर भी किसी और किसान के नाम आवंटित हुआ था। इस मामले में भी अब तक जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
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मंगलवार सुबह अधीक्षण ग्रामीण सैय्यद तारिक जलील ने अफसरों को भुता के ईंट भट्ठे से ट्रांसफार्मर बरामद होने के मामले में शाम तक रिपोर्ट तैयार कर दोषी स्टाफ को चिन्हित करने का निर्देश दिया। इसके बाद सुबह से शाम तक रिकॉर्ड खंगाले जाते रहे। पता चला कि भुता में कई सालों से यह गोलमाल चल रहा है। पिछले साल मई में भी 63 केवी के एक ट्रांसफार्मर की ऐसी ही बरामदगी के बाद जेई राजेश कुमार की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी जिसमें पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बिजली विभाग ने यह सरकारी ट्रांसफार्मर कब्जे तक में नहीं लिया और वह अब तक मौके पर ही पड़ा है। इससे पहले एक प्राइवेट कॉलेज से दो सरकारी ट्रांसफार्मर बरामद होने के मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। अफसरों ने दोनों ट्रांसफार्मरों को स्टोर में जमा कराकर मामला रफादफा करा दिया। भुता में ही अब ईंट भट्ठे से ट्रांसफार्मर बरामदगी के बाद फिर पुराने रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। हालांकि फिर भी यह कवायद किसी नतीजे पर पहुंचती नहीं दिख रही है।
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नेता जी नरेश पाल की पैरवी न करें तो खुल सकते हैं भ्रष्ट अफसरों के नाम
भुता इलाके में सरकारी ट्रांसफार्मरों की हेराफेरी में निजी कर्मचारी होने के बावजूद बिजली विभाग में खासा दखल रखने वाले नरेश पाल को सबसे प्रमुख किरदार बताया जा रहा है। बताया जाता है कि नरेश पाल के न सिर्फ बिजली विभाग में ऊपर तक संबंध हैं बल्कि एक प्रमुख जनप्रतिनिधि की सरपरस्ती भी उसे हासिल है। तमाम मामलों में उसका नाम सामने आ चुका है। मंगलवार को एसडीओ अनिल रावत और जेई राजेश कुमार से पूछताछ हुई तो जेई ने खुले तौर पर कहा कि कई बार एफआईआर होने के बावजूद प्राइवेट कर्मी नरेशपाल पर पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। पुलिस अगर सहयोग करे तो ट्रांसफार्मरों की हेराफेरी का खेल खुल सकता है।
एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंक रहे हैं बिजली अधिकारी और पुलिस
पुलिस के असहयोग से दोषियों को पकड़ना मुश्किल हो रहा है। हालांकि पुराने रिकार्ड भी देखे जा रहे हैं। सभी मामलों में प्राइवेट कर्मी नरेश पाल का ही नाम सामने आया है। उसकी मदद में राजनेता भी पत्र लिख देते हैं। पुलिस सहयोग करे तो जल्द ही इस मामले का पर्दाफाश हो जाएगा। - अनिल कुमार, एसडीओ
बिजली विभाग की ओर से अभी तक हमें कोई तहरीर नहीं मिली है। बिजली विभाग जिस प्राइवेट कर्मचारी नरेश पाल को घोटालेबाज बता रहा है, वही एफआईआर दर्ज कराने के लिए बार-बार संपर्क कर रहा है जबकि इस मामले जेई या और किसी अधिकारी को तहरीर देनी चाहिए। - रविंद्र सिंह, भुता एसओ
तीन दिन बाद भी दर्ज नहीं हुई एफआईआर, अफसर भी नहीं दिखा रहे दिलचस्पी बरेली/भुता। सरकारी ट्रांसफार्मरों की हेराफेरी करने वाला रैकेट इस बार भी हाथ से बाहर निकलता दिख रहा है। बिजली विभाग के अधिकारी इस मुद्दे पर खामोश हैं कि किसानों के नाम स्टोर से निकले ट्रांसफार्मर किस तरह दलालों के हाथ बिक जाते हैं तो दूसरी ओर भुता पुलिस ने भी ईंट भट्ठे से सरकारी ट्रांसफार्मर बरामद होने के मामले में तीन दिन बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की है। मंगलवार को इस मामले में एसडीओ और जूनियर इंजीनियर से जरूर लंबी पूछताछ की गई लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला।
सरकारी ट्रांसफार्मरों की हेराफेरी का खेल काफी लंबे समय से चल रहा है। भुता इलाके में ही कुछ समय के अंदर तमाम ऐसे सरकारी ट्रांसफार्मर निजी संस्थानों में लगे पाए गए हैं जो बिजली विभाग के रिकॉर्ड में किसानों के नाम आवंटित हुए थे। यह मामला बिजली विभाग में ऊपर तक जानकारी में पहुंचने के बावजूद न जांच हुई न उस रैकेट को चिन्हित किया गया जो लंबे समय से यह हेराफेरी कर रहा है। हाल ही में एक फौजी की शिकायत पर उसकी पत्नी के नाम ट्यूबवेल के लिए आवंटित एक ट्रांसफार्मर का गोलमाल का ताजा मामला सामने आया है। इसकी छानबीन हुई तो पता चला कि ट्रांसफार्मर अवैध रूप से एक ईंट भट्ठे पर लगा हुआ है। पुलिस ने भट्ठे से ट्रांसफार्मर बरामद किया तो पता लगा कि वह ट्रांसफार्मर भी किसी और किसान के नाम आवंटित हुआ था। इस मामले में भी अब तक जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
मंगलवार सुबह अधीक्षण ग्रामीण सैय्यद तारिक जलील ने अफसरों को भुता के ईंट भट्ठे से ट्रांसफार्मर बरामद होने के मामले में शाम तक रिपोर्ट तैयार कर दोषी स्टाफ को चिन्हित करने का निर्देश दिया। इसके बाद सुबह से शाम तक रिकॉर्ड खंगाले जाते रहे। पता चला कि भुता में कई सालों से यह गोलमाल चल रहा है। पिछले साल मई में भी 63 केवी के एक ट्रांसफार्मर की ऐसी ही बरामदगी के बाद जेई राजेश कुमार की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी जिसमें पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बिजली विभाग ने यह सरकारी ट्रांसफार्मर कब्जे तक में नहीं लिया और वह अब तक मौके पर ही पड़ा है। इससे पहले एक प्राइवेट कॉलेज से दो सरकारी ट्रांसफार्मर बरामद होने के मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। अफसरों ने दोनों ट्रांसफार्मरों को स्टोर में जमा कराकर मामला रफादफा करा दिया। भुता में ही अब ईंट भट्ठे से ट्रांसफार्मर बरामदगी के बाद फिर पुराने रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। हालांकि फिर भी यह कवायद किसी नतीजे पर पहुंचती नहीं दिख रही है।
नेता जी नरेश पाल की पैरवी न करें तो खुल सकते हैं भ्रष्ट अफसरों के नाम
भुता इलाके में सरकारी ट्रांसफार्मरों की हेराफेरी में निजी कर्मचारी होने के बावजूद बिजली विभाग में खासा दखल रखने वाले नरेश पाल को सबसे प्रमुख किरदार बताया जा रहा है। बताया जाता है कि नरेश पाल के न सिर्फ बिजली विभाग में ऊपर तक संबंध हैं बल्कि एक प्रमुख जनप्रतिनिधि की सरपरस्ती भी उसे हासिल है। तमाम मामलों में उसका नाम सामने आ चुका है। मंगलवार को एसडीओ अनिल रावत और जेई राजेश कुमार से पूछताछ हुई तो जेई ने खुले तौर पर कहा कि कई बार एफआईआर होने के बावजूद प्राइवेट कर्मी नरेशपाल पर पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। पुलिस अगर सहयोग करे तो ट्रांसफार्मरों की हेराफेरी का खेल खुल सकता है।एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंक रहे हैं बिजली अधिकारी और पुलिस
पुलिस के असहयोग से दोषियों को पकड़ना मुश्किल हो रहा है। हालांकि पुराने रिकार्ड भी देखे जा रहे हैं। सभी मामलों में प्राइवेट कर्मी नरेश पाल का ही नाम सामने आया है। उसकी मदद में राजनेता भी पत्र लिख देते हैं। पुलिस सहयोग करे तो जल्द ही इस मामले का पर्दाफाश हो जाएगा। - अनिल कुमार, एसडीओ
बिजली विभाग की ओर से अभी तक हमें कोई तहरीर नहीं मिली है। बिजली विभाग जिस प्राइवेट कर्मचारी नरेश पाल को घोटालेबाज बता रहा है, वही एफआईआर दर्ज कराने के लिए बार-बार संपर्क कर रहा है जबकि इस मामले जेई या और किसी अधिकारी को तहरीर देनी चाहिए। - रविंद्र सिंह, भुता एसओ