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स्मार्ट सिटी में साहब को कब्जे भी शानदार चाहिए
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बरेली। स्मार्ट सिटी में चयनित हो चुके बरेली शहर में साहब को गंदे दिखने वाले कब्जे पसंद नहीं हैं। साहब चाहते हैं कि स्मार्ट सिटी में अगर कब्जे हों तो शानदार हों, जो दिखने में नजरों को चुभें नहीं। शायद इसी सोच के साथ पिछले दिनों शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान चला। अभियान के दौरान चुन-चुनकर, खोखा और फड़ जैसे अतिक्रमण हटाए गए जो सड़क की खूबसूरती बिगाड़ रहे थे। व्यवस्थित तरीके से अभियान चलाने के लिए रूटचार्ट भी तैयार किया गया। मगर उसे मंजूरी न देकर अभियान मनमर्जी से चलाया गया, जोे नगर निगम की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है।
पिछले दिनों जिला अस्पताल रोड, स्टेडियम रोड और जंक्शन रोड पर अनायास ही अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू कर दिया गया। लोग हैरत में थे कि इसके लिए तो कोई प्लानिंग ही नहीं थी। मगर, जब यह अभियान चला तो लोगों को समझ में आ गया कि ये अभियान सिर्फ अतिक्रमण के बजाय सड़क के किनारे आंखों को चुभने वाले गरीबों को हटाने के लिए चला है। क्योंकि नगर निगम ने इसके लिए न तो कोई प्लानिंग की और न ही कार्रवाई के दौरान शानदार दिखने वाले कब्जे हटाने की मंशा दिखाई। यही वजह रही कि अभियान के दौरान ठेला-खोखा जैसे अवैध कब्जे ही हटाए गए। सड़क किनारे बने होटल, दुकानों आदि के पक्के कब्जे अब भी बरकरार हैं।
अभियान चार्ट से नहीं साहब की मर्जी से
पिछले दिनों निगम ने अतिक्रमण हटाओ अभियान का चार्ट सार्वजनिक किया तो लोगों को अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू होने की एक बार फिर उम्मीद जगी। मगर, साहब तो अपनी मर्जी के मालिक हैं इसलिए उन्होंने इस रूट चार्ट को दरकिनार कर दिया। लिहाजा एक जुलाई से शुरू होने वाला अभियान ठंडे बस्ते में चला गया।
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जंक्शन रोड: नाले पर खड़ी इमारतें, खोखा तहसनहस कर दिए
पिछले दिनों जंक्शन तिराहे से कचहरी तक अतिक्रमण हटाने के लिए लाल निशान सिर्फ खोखा और ठेला पर ही लगाए गए। रोजगार दफ्तर के बाहर फोटो स्टेट, बियर आदि की दुकानें भी चिह्नित की गईं, लेकिन जब कार्रवाई की बारी आई तो यहां से सिर्फ खोखा-ठेला ही हटाए गए। नाला कब्जा कर खड़ी की गई बड़ी इमारतों ने सड़क पर कितना कब्जा किया है, यह देखने के लिए सड़क की पैमाइश तक नहीं की गई।
जिला अस्पताल रोड: हटाए गए फड़ वाले, नाले पर दुकानें बरकरार
सिटी मजिस्ट्रेट के निर्देश पर निगम टीम ने जिला अस्पताल रोड पर सड़क के दोनों ओर आंखों को चुभने वाले फड़ पर जूते, चप्पल और रेडीमेड गारमेंट्स बेचने वालों को हटा दिया। मगर यहां पर कुछ दुकानें भी आगे बढ़ाकर बनाई गई हैं, जिन्हें हटाना तो दूर पैमाइश तक नहीं की गई है। आगे चलकर सिविल लाइंस में धर्मस्थल की आड़ में नाले पर बनी दुकानें हटाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है।
स्टेडियम रोड: रसूखदार कब्जेदार, इनसे सब हारे
ईंट पजाया चौराहा से डेलापीर मोड़ तक स्टेडियम रोड पर भी अभियान चला था। कार्रवाई के नाम पर दुकानों के आगे रखा सामान हटवा दिया गया। मगर रसूखदार रेता-बजरी वालों का कब्जा हटवाने का प्रयास नहीं हुआ। डेलापीर पेट्रोल पंप के बराबर में रेता, बजरी का ढेर सड़क पर अब भी है। संजय नगर गुरुद्वारा गेट पर भी यही हाल है। यहां भी पक्के कब्जों की जांच के लिए पैमाइश नहीं हुई।
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पिछले दिनों जिला अस्पताल रोड, स्टेडियम रोड और जंक्शन रोड पर अनायास ही अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू कर दिया गया। लोग हैरत में थे कि इसके लिए तो कोई प्लानिंग ही नहीं थी। मगर, जब यह अभियान चला तो लोगों को समझ में आ गया कि ये अभियान सिर्फ अतिक्रमण के बजाय सड़क के किनारे आंखों को चुभने वाले गरीबों को हटाने के लिए चला है। क्योंकि नगर निगम ने इसके लिए न तो कोई प्लानिंग की और न ही कार्रवाई के दौरान शानदार दिखने वाले कब्जे हटाने की मंशा दिखाई। यही वजह रही कि अभियान के दौरान ठेला-खोखा जैसे अवैध कब्जे ही हटाए गए। सड़क किनारे बने होटल, दुकानों आदि के पक्के कब्जे अब भी बरकरार हैं।
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अभियान चार्ट से नहीं साहब की मर्जी से
पिछले दिनों निगम ने अतिक्रमण हटाओ अभियान का चार्ट सार्वजनिक किया तो लोगों को अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू होने की एक बार फिर उम्मीद जगी। मगर, साहब तो अपनी मर्जी के मालिक हैं इसलिए उन्होंने इस रूट चार्ट को दरकिनार कर दिया। लिहाजा एक जुलाई से शुरू होने वाला अभियान ठंडे बस्ते में चला गया।
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जंक्शन रोड: नाले पर खड़ी इमारतें, खोखा तहसनहस कर दिए
पिछले दिनों जंक्शन तिराहे से कचहरी तक अतिक्रमण हटाने के लिए लाल निशान सिर्फ खोखा और ठेला पर ही लगाए गए। रोजगार दफ्तर के बाहर फोटो स्टेट, बियर आदि की दुकानें भी चिह्नित की गईं, लेकिन जब कार्रवाई की बारी आई तो यहां से सिर्फ खोखा-ठेला ही हटाए गए। नाला कब्जा कर खड़ी की गई बड़ी इमारतों ने सड़क पर कितना कब्जा किया है, यह देखने के लिए सड़क की पैमाइश तक नहीं की गई।
जिला अस्पताल रोड: हटाए गए फड़ वाले, नाले पर दुकानें बरकरार
सिटी मजिस्ट्रेट के निर्देश पर निगम टीम ने जिला अस्पताल रोड पर सड़क के दोनों ओर आंखों को चुभने वाले फड़ पर जूते, चप्पल और रेडीमेड गारमेंट्स बेचने वालों को हटा दिया। मगर यहां पर कुछ दुकानें भी आगे बढ़ाकर बनाई गई हैं, जिन्हें हटाना तो दूर पैमाइश तक नहीं की गई है। आगे चलकर सिविल लाइंस में धर्मस्थल की आड़ में नाले पर बनी दुकानें हटाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है।
स्टेडियम रोड: रसूखदार कब्जेदार, इनसे सब हारे
ईंट पजाया चौराहा से डेलापीर मोड़ तक स्टेडियम रोड पर भी अभियान चला था। कार्रवाई के नाम पर दुकानों के आगे रखा सामान हटवा दिया गया। मगर रसूखदार रेता-बजरी वालों का कब्जा हटवाने का प्रयास नहीं हुआ। डेलापीर पेट्रोल पंप के बराबर में रेता, बजरी का ढेर सड़क पर अब भी है। संजय नगर गुरुद्वारा गेट पर भी यही हाल है। यहां भी पक्के कब्जों की जांच के लिए पैमाइश नहीं हुई।