फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Bareilly municipal slop straggling

नगर निगम की ढिलाई से पिछड़ गया बरेली

Wed, 21 Sep 2016 02:21 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Wed, 21 Sep 2016 02:21 AM IST
विज्ञापन
मेयर और नगर आयुक्त के दावे फिर फेल हो गए। स्मार्ट सिटी की दौड़ में इस बार भी बरेली का नंबर नहीं आया जबकि आगरा, वाराणसी और कानपुर बाजी मार ले गए। अब बरेली को जनवरी में चौथी सूची का इंतजार करना होगा।
विज्ञापन

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू की ओर से जारी की गई तीसरी सूची में शामिल किए गए 27 शहराें में यूपी के वाराणसी, कानपुर और आगरा को जगह मिल गई। कुल 100 शहराें को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए चुना जाना है। पहली सूची में 20, दूसरी सूची में 13 और तीसरी में 27 शहर शामिल किए गए हैं।
विज्ञापन

सूरत और बेलगांव को स्मार्ट सिटी में शामिल करवाने वाली हैदराबाद की कंसल्टेंट एजेंसी दराशा कंपनी एंड प्राइवेट लिमिटेड ने बरेली के लिए कुल 1625 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाया था। स्मार्ट सिटी के लिए रेट्रोफिंटिंग को ही शहर के लोगाें ने बेस्ट बताया। इसके लिए राजेंद्रनगर, पीलीभीत बाईपास और सिविल लाइंस एरिया में सिविल लाइंस को सबसे अधिक मत देकर यहां स्मार्ट सिटी का खाका खींचा गया था। एजेंसी के प्लानिंग हेड मुजीबुर्रहमान का कहना है कि प्रोजेक्ट में कोई कमी नहीं थी। बरेली में ‘आय’ का स्रोत बढ़ाने में नगर निगम फिसड्डी है। स्मार्ट सिटी की तीसरी सूची में पंजाब के दो, महाराष्ट्र के पांच, तमिलनाडु और कनार्टक के चार-चार शहर शामिल हैं। आपसी प्रतियोगिता के आधार पर चयनित शहरों में टॉप पर पंजाब का अमृतसर रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

शर्त पूरी कर नहीं करेंगे तो कैसे बनेगा स्मार्ट शहर
पहली बार भी दावे धरे रह गए । स्मार्ट सिटी की दौड़ में बरेली पिछड़ा था, तब भी मंथन हुआ था। इस बार फिर फेल हुआ है तो मंथन की तैयारी है। स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव तैयार करने से पहले कंसल्टेंट एजेंसी दराशा ने शर्तें साफ साफ बता दी थीं पर इन पर काम ही नहीं हुआ। केवल 1625 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार करना ही उपलब्धि नहीं रही। इसमें केवल 877 करोड़ रुपये ही केंद्र सरकार देती बाकी 457 करोड़ रुपये कंवर्जेंस कास्ट और 291 करोड़ रुपये निवेश से रकम जुटानी थी। यह निगम कहां से लाएगा यही साफ नहीं हो पाया। नगर निगम टैक्स कलेक्शन तक तो कर नहीं पा रहा। शायद कारण रहा कि केंद्र ने बरेली को फिलहाल स्टॉप का चिह्न दिखा दिया। 
नगर निगम हर साल विभिन्न स्रोतों से करीब 135 करोड़ रुपये कमाता है। जबकि खर्च इससे अधिक है। सात शर्तों में एक टैक्स की स्थिति सुधारने पर भी जोर देने को कहा था, लेकिन यह भी नहीं हो सका। इन सभी शर्तों पर निगम सबसे कमजोर साबित हुआ।   ये थीं शर्तें  
शर्त नंबर- 1 आर्थिक विकास
आवास विकास, बीडीए, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, आरईएस जैसी एजेंसियां हर साल साढ़े तीन सौ करोड़ से ज्यादा बजट शहर के विकास में खर्च करती हैं। आमदनी 80 करोड़ से कम है। टैक्स ज्यादा आता नहीं। आर्थिक विकास में बरेली पिछड़ा है। 
शर्त नंबर- 2 बेरोजगार पीढ़ी 
रबड़, आईटीआर, किसान और विमको बंद होने से 6000 से अधिक लोग बेरोजगार हुए। जरी जरदोजी माल का एक्सपोर्ट बंद हुआ तो एक साल में 50 करोड़ से अधिक का टर्न ओवर और 10 हजार से ज्यादा परिवार प्रभावित होने की संभावना है। यहां युवाआें को नौकरी भी नहीं मिल रही। 
शर्त नंबर- 3 महिला व बच्चाें की सुरक्षा
पिछले तीन साल में सिर्फ बरेली में 1175 अपराध महिलाआें से जुड़े हैं। इनमें हत्या, दुष्कर्म, अपहरण, छेड़खानी, महिला उत्पीड़न, चेन स्नेचिंग, दहेज हत्या शामिल हैं। इनके आंकड़े घट नहीं रहे बल्कि बढ़ रहे हैं। बच्चे भी अपराध में शामिल हो रहे हैं। 
शर्त नंबर- 4 शहरी गरीबाें के लिए सुविधाएं
शहर में 85 मलिन बस्तियाें में करीब तीन लाख 50 हजार लोग रहते हैं। इनमें अतिरिक्त धनराशि भी विकास को दिये गए लेकिन कुछ नहीं हुआ। इनकी हालत अभी भी खराब है। 
शर्त नंबर- 5 सुशासन
गवर्नेंस न होने से हम औंधे मुंह गिरते दिखाई पड़ते हैं। अभी भी अधिकतर काम कागजों पर ही होते हैं। शहर में मात्र 10 फीसदी लोग ही हैं जो ई- गवर्नेंस का फायदा उठा रहे हैं, बाकी तो लाइन में लगते हैं। आनलाइन सिस्टम फेल है। 
शर्त नंबर- 6 फुटपाथ दुकानदाराें की समस्या
नगर निगम बोर्ड ने दो साल पहले शहर में फेरी नीति लागू करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया था। सर्वे में पांच हजार वेंडर चिह्नित किए। रजिस्ट्रेशन में फर्जी वाड़ा हुआ। फेरी नीति पर सर्वे का काम बंद है। 
शर्त नंबर- 7 इंवेस्टमेंट कम होना
स्मार्ट सिटी की आठ बाधाआें में इंवेस्टमेंट को भी जरूरी बताया गया। जिले में पिछले एक साल से इस दिशा में काफी काम हुआ है और अब तक एक हजार करोड़ रुपया कारोबारी निवेश कर चुके हैं। इससे करीब 25 हजार रोजगार भी सृजित हुए हैं।  
यह था रेट्रोफिटिंग प्रोजेक्ट में  
रेट्रोफिटिंग के तहत 500 एकड़ में बसे बसाएं हिस्से में कुछ नया और आधुनिक निर्माण कर या फिर वहीं पर सुविधाएं देकर उसे बेहतर बनाया जाने का प्रोजेक्ट तैयार किया था। सिविल लाइंस को इसमें बेहतर बताया गया। यहां स्मार्ट सिटी बनने के लिए स्टेशन, पार्क, स्कूल, अस्पताल, पार्किंग, बाजार, कारोबार, विश्वविद्यालय जैसी खूबियां हैं। यहीं आमूल चूल परिवर्तन कर इसे और अच्छा बनाना था। यहां सीवर, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, साफ पानी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, पार्किं ग, फुटपाथ, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, बिजली, आईटी कनेक्टिविटी, स्मार्ट मीटरिंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट, लैंड स्कैपिंग, स्पेस का इस्तेमाल, सुरक्षा, हरियाली व अन्य सुविधाएं देनी है। 
हमारा प्रोजेक्ट अच्छा था। इसे नहीं बदलेंगे और न ही एजेंसी बदली जाएगी। कानपुर का सेलेक्शन जिस रेवेन्यू के आधार पर तय करने की बात आ रही है वह एक कारण हो सकता है। कानपुर में उद्योग और करदाता अधिक हैं। यहां रेवेन्यू जितना है उतना ही रहेगा। अब अगली बार इसी प्रोजेक्ट को फिर रखेंगे। 
डॉ. आईएस तोमर, मेयर 
स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट पर काफी मेहनत की गई है और यह अच्छा बना है। रेवेन्यू के मामले में हमारा शहर छोटा है। अभी यह पता नहीं चला है कि बरेली को कितने अंक मिले हैं। संभावना है कि यह कुछ ही अंकाें से पिछड़ा होगा। 
शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त 
हमारी एजेंसी ने यूपी में कानपुर का भी प्रोजेक्ट तैयार किया था।  बरेली रह गया।  निगम रेवेन्यू बढ़ाने का प्रयास नहीं कर रहा है।  यह कमी दूर हो जाती तो इसके सेलेक्शन में दिक्कत न आती। रेवेन्यू में कमजोर होने के चलते प्रोजेक्ट अन्य शहराें के मुकाबले स्टैंड ही नहीं कर पाया। अगर हम लोगाें को दोबारा चुना जाता है तो  इसमें भी जो बदलाव जरूरी होंगे वह किये जाएंगे। 
मुजीबुर्रहमान, प्लानिंग हेड, कंसल्टेंट एजेंसी दराशा 
हवाई अड्डे से लेकर सड़क, आईटीआई, जीटीआई के जो काम हमने कराए उनको ही मोदी सरकार पूरे करा दे तभी बरेली का विकास हो जाएगा। लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ सपने दिखा रही है। इनका एजेंडा तो बड़े पूंजीपतियों का विकास कराना ही है। गांव और कस्बाें के विकास से इनको कोई लेना देना नहीं। 
प्रवीण सिंह ऐरन, पूर्व सांसद 
स्मार्ट सिटी के लिए जिनको मानक पूरे करने चाहिए थे उन जिम्मेदार लोगों से यह पूछा जाना चाहिए कि वे बरेली को पिछड़ा बनाए रखने के लिए जिम्मेदार हैं या नहीं। यह दुर्भाग्य की स्थिति है कि जिम्मेदार लोगाें में बरेली को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिलाने के लिए समुचित प्रयास नहीं किया। 
राजेश अग्रवाल, कैंट विधायक 
भाजपा की केंद्र सरकार सिर्फ झूठे वायदे करना जानती है। नगर निगम की ओर से सारे प्रयास किये गए कि बरेली को स्मार्ट सिटी में शामिल कराया जाए, लेकिन सांसद और शहर व कैंट विधायकाें ने पैरवी नहीं की। 
जफरबेग, महानगर अध्यक्ष, सपा
नगर निगम अधिकारी शहर को बेहतर बिजली सप्लाई के लिए भूमि उपलब्ध कराने तक में रोड़े अटका रहा है। ऐसे में स्मार्ट सिटी बन ही नहीं सकता। आए दिन फर्जी आंकड़े और कथित एनजीओ को फायदा पहुंचाने का ड्रामा होता है। 
उमेश कठेरिया, महानगर अध्यक्ष, भाजपा 
बरेली को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए नगर निगम के अफसर बेहतर प्रेजेंटेशन नहीं कर पाए। अगर इनका प्रेजेंटेशन बेहतर होता तो बरेली को स्मार्ट सिटी घोषित करने से कोई रोक नहीं सकता था। 
डॉ. अरुण कुमार, शहर विधायक 
मेयर और नगर आयुक्त एजेंसी से ठीक काम नहीं करवा सके। नहीं तो ऐसी क्या वजह थी कि कानपुर का सेलेक्ट हो गया और बरेली रह गया। दौड़ से बाहर होने पर नगर आयुक्त और मेयर दोनों जिम्मेदार हैं। महापौर से जनता हिसाब मांगेगी। 
विकास शर्मा, नेता पार्षद दल, भाजपा 
नगर निगम जिस ढर्रे पर चल रहा है वह एक लावारिस बच्चे जैसा है जो अपने आप सड़क पार करता है। निगम भी अपने आप ही चल रहा हे। नकारा व्यवस्था और भ्रष्ट तंत्र ही इसके जिम्मेदार है।

राजेश अग्रवाल, नेता पार्षद दल, सपा 
शासन को नगर आयुक्त और सचिव बीडीए को तुरंत बदल देना चाहिए। बीडीए वीसी पद पर तेज तर्रार आईएएस ही शहर की स्थिति सुधारने का एकमात्र उपाय है। नगर निगम के सर्वोच्च पद पर बैठे जनप्रतिनिधि इतने लापरवाह होंगे यह वोट देते वक्त कल्पना भी नहीं की गई थी। 
मुहम्मद खालिद जिलानी, आरटीआई एक्टिविस्ट  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed