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बरेली दूरदर्शन केंद्र
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दूरदर्शन केंद्र कार्यालय।
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बरेली। लोकप्रियता की बुलंदियों का सफर कर चुके दूरदर्शन के दिन बीत गए। रामायण और महाभारत जैसे धारावाहिकों के प्रसारण के दौरान शहरों में कर्फ्यू जैसे हालात पैदा कर देने वाले दूरदर्शन के क्षेत्रीय केंद्र बंद होने लगे हैं। निजी चैनलों के शोरशराबे में बरेली के दूरदर्शन केंद्र से 15 दिन पहले प्रसारण बंद हो गया और किसी को पता भी नहीं चला। बरेली जैसे तमाम दूरदर्शन केंद्र क्षेत्रीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के नाम पर खोले गए थे लेकिन अब इसकी जरूरत महसूस नहीं की जा रही।
बरेली दूरदर्शन केंद्र की शुरुआत 30 जून 1995 को हुई थी। 31 अक्तूबर को इसका प्रसारण बंद कर दिया गया। इस केंद्र का काफी स्टाफ दूसरे दूरदर्शन केंद्रों पर शिफ्ट कर दिया गया है। टेक्निकल स्टाफ आकाशवाणी के एफएम केंद्र पर भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि इन केंद्रों से सरकार को राजस्व की अपेक्षा थी जो पूरी नहीं हो पाई। उल्टे सरकार को इस केंद्र पर हर महीने स्टाफ के वेतन, आउटसोर्सिंग और आमंत्रित कलाकारों पर 50 लाख से लेकर एक करोड़ तक खर्च करना पड़ रहा था। (संवाद)
नहीं तैयार हो पा रहे
थे स्तरीय कार्यक्रम
बरेली दूरदर्शन केंद्र पर स्तरीय कार्यक्रम भी तैयार न हो पाने की बात कही जा रही है। हालांकि सरकार ने काफी समय पहले ही इन केंद्रों पर स्टाफ कम करना शुरू कर दिया था। काफी समय से बरेली केंद्र पर स्टेशन हेड की तैनाती नहीं थी। उसकी जगह प्रोग्राम हेड से काम लिया जा रहा था। तमाम और जरूरी स्टाफ की कमी हो चुकी थी। एक तरफ दूरदर्शन केंद्र की कार्यक्षमता घटी तो दूसरी तरफ भ्रष्टाचार की शिकायतें भी मिलने लगीं।
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करीब 15 साल का सुनहरा दौर
बरेली में दूरदर्शन केंद्र की स्थापना के बाद शुरुआती दौर में यहां काफी बेहतर कार्यक्रम तैयार किए गए थे। क्षेत्र की ऐसी प्रतिभाओं को दूरदर्शन पर आने का मौका मिला जिनके लिए उस समय अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए कोई उपयुक्त मंच उपलब्ध नहीं था। दर्शकों में भी स्थानीय कार्यक्रमों की लोकप्रियता थी। कई अच्छे वक्ताओं, विशेषज्ञों और गायकों ने इस दूरदर्शन केंद्र के जरिए अपनी पहचान बनाई और नाम कमाया।
रिकॉर्डिंग कर लखनऊ भेजे जा रहे हैं कार्यक्रम
बरेली दूरदर्शन केंद्र के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि यहां से प्रसारण बंद हुआ लेकिन अभी यहां कार्यक्रमों की रिकार्डिंग चल रही है। यहां तैयार किए गए कार्यक्रमों को मदर सेंटर लखनऊ केंद्र भेजा जा रहा है जहां से उनका प्रसारण किया जाता है।
एक दौर वो भी था...
15 सितंबर 1959 को देश के पहले टीवी चैनल दूरदर्शन की शुरुआत हुई थी, उस समय इसका नाम दूरदर्शन नहीं बल्कि टेलीविजन इंडिया हुआ करता था। शुरुआत में हफ्ते में तीन दिन ही इसका सिर्फ आधे घंटे के लिए प्रसारण होता था।
शुरुआत में दूरदर्शन पर स्कूली बच्चों और किसानों के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे। 1965 से हफ्ते में तीन दिन की जगह रोज प्रसारण शुरू हुआ। पांच मिनट का न्यूज बुलेटिन भी शुरू किया गया।
1975 में छह राज्यों में सेटेलाइट इन्स्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरिमेंट शुरू किया गया। इन राज्यों में सामुदायिक टीवी लगाए गए थे। इसी साल टेलीविजन इंडिया का नाम बदलकर दूरदर्शन कर दिया गया। 1976 में दूरदर्शन आल इंडिया रेडियो से अलग हो गया।
1982 में दूरदर्शन ब्लैक एंड व्हाइट से रंगीन हो गया। इसी साल दूरदर्शन ने इनसेट-1 के जरिए पहली बार राष्ट्रीय प्रसारण किया। एशियाई खेलों के प्रसारण के बाद दूरदर्शन की लोकप्रियता काफी बढ़ गई।
कृषि दर्शन, चित्रहार और रंगोली जैसे प्रोग्राम काफी लोकप्रिय हुए। 1966 में शुरू हुआ कृषि दर्शन कार्यक्रम हरित क्रांति लाने का सूत्रधार बना।
1986 में दूरदर्शन्र पर रामायण का प्रसारण हुआ। इसके बाद महाभारत का प्रसारण किया गया। इसके बाद दूरदर्शन की लोकप्रियता आसमान की बुलंदियों पर पहुंच गई। हम लोग जैसे सीरियल ने इसकी लोकप्रियता को चार चांद लगा दिए।
तीन नवंबर 2003 को दूरदर्शन का 24 घंटे चलने वाला समाचार चैनल शुरू हुआ। दूरदर्शन शुरू करने के लिए यूनेस्को ने भारत को 20000 डॉलर और 180 फिलिप्स टीवी सेट दिए थे।
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बरेली दूरदर्शन केंद्र की शुरुआत 30 जून 1995 को हुई थी। 31 अक्तूबर को इसका प्रसारण बंद कर दिया गया। इस केंद्र का काफी स्टाफ दूसरे दूरदर्शन केंद्रों पर शिफ्ट कर दिया गया है। टेक्निकल स्टाफ आकाशवाणी के एफएम केंद्र पर भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि इन केंद्रों से सरकार को राजस्व की अपेक्षा थी जो पूरी नहीं हो पाई। उल्टे सरकार को इस केंद्र पर हर महीने स्टाफ के वेतन, आउटसोर्सिंग और आमंत्रित कलाकारों पर 50 लाख से लेकर एक करोड़ तक खर्च करना पड़ रहा था। (संवाद)
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नहीं तैयार हो पा रहे
थे स्तरीय कार्यक्रम
बरेली दूरदर्शन केंद्र पर स्तरीय कार्यक्रम भी तैयार न हो पाने की बात कही जा रही है। हालांकि सरकार ने काफी समय पहले ही इन केंद्रों पर स्टाफ कम करना शुरू कर दिया था। काफी समय से बरेली केंद्र पर स्टेशन हेड की तैनाती नहीं थी। उसकी जगह प्रोग्राम हेड से काम लिया जा रहा था। तमाम और जरूरी स्टाफ की कमी हो चुकी थी। एक तरफ दूरदर्शन केंद्र की कार्यक्षमता घटी तो दूसरी तरफ भ्रष्टाचार की शिकायतें भी मिलने लगीं।
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करीब 15 साल का सुनहरा दौर
बरेली में दूरदर्शन केंद्र की स्थापना के बाद शुरुआती दौर में यहां काफी बेहतर कार्यक्रम तैयार किए गए थे। क्षेत्र की ऐसी प्रतिभाओं को दूरदर्शन पर आने का मौका मिला जिनके लिए उस समय अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए कोई उपयुक्त मंच उपलब्ध नहीं था। दर्शकों में भी स्थानीय कार्यक्रमों की लोकप्रियता थी। कई अच्छे वक्ताओं, विशेषज्ञों और गायकों ने इस दूरदर्शन केंद्र के जरिए अपनी पहचान बनाई और नाम कमाया।
रिकॉर्डिंग कर लखनऊ भेजे जा रहे हैं कार्यक्रम
बरेली दूरदर्शन केंद्र के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि यहां से प्रसारण बंद हुआ लेकिन अभी यहां कार्यक्रमों की रिकार्डिंग चल रही है। यहां तैयार किए गए कार्यक्रमों को मदर सेंटर लखनऊ केंद्र भेजा जा रहा है जहां से उनका प्रसारण किया जाता है।
एक दौर वो भी था...
15 सितंबर 1959 को देश के पहले टीवी चैनल दूरदर्शन की शुरुआत हुई थी, उस समय इसका नाम दूरदर्शन नहीं बल्कि टेलीविजन इंडिया हुआ करता था। शुरुआत में हफ्ते में तीन दिन ही इसका सिर्फ आधे घंटे के लिए प्रसारण होता था।
शुरुआत में दूरदर्शन पर स्कूली बच्चों और किसानों के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे। 1965 से हफ्ते में तीन दिन की जगह रोज प्रसारण शुरू हुआ। पांच मिनट का न्यूज बुलेटिन भी शुरू किया गया।
1975 में छह राज्यों में सेटेलाइट इन्स्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरिमेंट शुरू किया गया। इन राज्यों में सामुदायिक टीवी लगाए गए थे। इसी साल टेलीविजन इंडिया का नाम बदलकर दूरदर्शन कर दिया गया। 1976 में दूरदर्शन आल इंडिया रेडियो से अलग हो गया।
1982 में दूरदर्शन ब्लैक एंड व्हाइट से रंगीन हो गया। इसी साल दूरदर्शन ने इनसेट-1 के जरिए पहली बार राष्ट्रीय प्रसारण किया। एशियाई खेलों के प्रसारण के बाद दूरदर्शन की लोकप्रियता काफी बढ़ गई।
कृषि दर्शन, चित्रहार और रंगोली जैसे प्रोग्राम काफी लोकप्रिय हुए। 1966 में शुरू हुआ कृषि दर्शन कार्यक्रम हरित क्रांति लाने का सूत्रधार बना।
1986 में दूरदर्शन्र पर रामायण का प्रसारण हुआ। इसके बाद महाभारत का प्रसारण किया गया। इसके बाद दूरदर्शन की लोकप्रियता आसमान की बुलंदियों पर पहुंच गई। हम लोग जैसे सीरियल ने इसकी लोकप्रियता को चार चांद लगा दिए।
तीन नवंबर 2003 को दूरदर्शन का 24 घंटे चलने वाला समाचार चैनल शुरू हुआ। दूरदर्शन शुरू करने के लिए यूनेस्को ने भारत को 20000 डॉलर और 180 फिलिप्स टीवी सेट दिए थे।