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बरेली कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर बने डॉ. एसी त्रिपाठी
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Thu, 30 Jun 2016 02:27 AM IST
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बरेली कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर बदल गए हैं। यह जिम्मेदारी अब डॉ. एसी त्रिपाठी को दी गई है जब कि डॉ. अजय शर्मा वाइस प्रिंसिपल बनाए गए हैं। बरेली कॉलेज में दो साल से चीफ प्रॉक्टर रहे डॉ. अजय शर्मा अब वाइज प्रिंसिपल का कार्यभार संभालेंगे। वहीं, प्रॉक्टोरियल टीम के वरिष्ठ सदस्य डॉ. एसी त्रिपाठी को चीफ प्रॉक्टर बना दिया गया है। उनके साथ ही डॉ. डीआर यादव और डॉ. वंदना शर्मा डिप्टी चीफ प्रॉक्टर बनाए गए हैं। इस संबंध में प्राचार्य डॉ. सोमेश यादव ने आदेश जारी कर दिया है। जुलाई में कॉलेज खुलने पर सभी पदाधिकारी कार्यभार संभालेंगे। बरेली कॉलेज में बुधवार को प्रबंध समिति के सचिव देवमूर्ति ने बैठक कर कॉलेज के संबंध में तमाम निर्णयों पर अपनी मोहर लगाई। उन्होंने कॉलेज की व्यवस्था बेहतर करने पर चर्चा करने के साथ ही निर्माणाधीन परीक्षा भवन, खेल का मैदान, प्राचार्य कार्यालय और हॉस्टल का भी निरीक्षण किया। इस साल हॉस्टल का एलॉटमेंट नहीं होगा। हॉस्टल का जीर्णोद्धार किया जाना है, इसलिए इसे खाली कराया जाएगा। प्राचार्य ने बास्केट बॉल कोर्ट ठीक कराने पर भी चर्चा की।
साढ़े पांच साल चीफ प्रॉक्टर रहे डॉ. अजय शर्मा
बरेली। बरेली कॉलेज में डॉ. अजय शर्मा साढ़े पांच साल तक चीफ प्रॉक्टर रहे। सबसे पहले 2010 में डॉ. शर्मा चीफ प्रॉक्टर बनाए गए। इसी बीच 2013 में छह महीने के लिए डॉ. जोगा सिंह को चीफ प्रॉक्टर की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद डॉ. जोगा सिंह का स्वास्थ्य खराब होने पर डॉ. अजय शर्मा को फिर से यह जिम्मेदारी दी गई।
बरेली कॉलेज में डॉ. अजय शर्मा लंबे समय चीफ प्रॉक्टर रहे। डॉ. जोगा सिंह के बाद लंबा समय डॉ. अजय शर्मा ही रहे। अब डॉ. एससी त्रिपाठी पहली बार चीफ प्रॉक्टर बनाए जा रहे हैं। इससे पहले वह प्रॉक्टोरियल टीम के वरिष्ठ सदस्य रहे थे। बरेली कॉलेज में अनुशासन व्यवस्था के लिए चीफ प्रॉक्टर ही जिम्मेदार होता है। ऐसे में चीफ प्रॉक्टर पर तमाम राजनैतिक दबाव भी पड़ते हैं। डॉ. अजय शर्मा ने अपने कार्यकाल में अनुशासन तोड़ने वाले छात्रनेताओं पर एफआईआर बहुत कम कराई। उन्होंने बातचीत से ही मामले को सुलझाने का प्रयास किया, ताकि किसी तरह का विरोध न हो। डॉ. अजय शर्मा के समय विपिन सिंह थापा और मदुनेश यादव के साथ मारपीट का मामला हुआ। इसके अलावा बड़ी घटनाएं नहीं हुई। इस दौरान सिर्फ एक बार छात्रसंघ चुनाव हुए।
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यह बड़े बदलाव की दस्तक तो नहीं
बरेली। बरेली कॉलेज में चीफ प्रॉक्टर का बदलाव भले ही सहज लग रहा हो, लेकिन यह इतना सामान्य नहीं है। अगले चरण में बड़ा बदलाव हो सकता है। बरेली कॉलेज में चीफ प्रॉक्टर रहे डॉ. अजय शर्मा को उप प्राचार्य बनाना, कई सवाल खड़े खड़ा करता है। जब पहले से प्राचार्य और कार्यवाहक प्राचार्य हों तो उप प्राचार्य बनाने की जरूरत की मंशा पर अटकल लगना लाजिमी है। पहली बार डिप्टी चीफ प्रॉक्टर का पद बनाया गया है। अब तक चीफ प्रॉक्टर अपनी अनुपस्थित में प्रॉक्टोरियल टीम के वरिष्ठ सदस्य को चार्ज दे कर जाते थे। तमाम बदलाव के बाद इस साल कुछ और चौंकाने वाले परिवर्तन हो सकते हैं। कयास लग रहा है कि प्राचार्य, कार्यवाहक प्राचार्य और उपप्राचार्य बनाने के बाद कार्यों का भी विभाजन हो सकता है।
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साढ़े पांच साल चीफ प्रॉक्टर रहे डॉ. अजय शर्मा
बरेली। बरेली कॉलेज में डॉ. अजय शर्मा साढ़े पांच साल तक चीफ प्रॉक्टर रहे। सबसे पहले 2010 में डॉ. शर्मा चीफ प्रॉक्टर बनाए गए। इसी बीच 2013 में छह महीने के लिए डॉ. जोगा सिंह को चीफ प्रॉक्टर की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद डॉ. जोगा सिंह का स्वास्थ्य खराब होने पर डॉ. अजय शर्मा को फिर से यह जिम्मेदारी दी गई।
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बरेली कॉलेज में डॉ. अजय शर्मा लंबे समय चीफ प्रॉक्टर रहे। डॉ. जोगा सिंह के बाद लंबा समय डॉ. अजय शर्मा ही रहे। अब डॉ. एससी त्रिपाठी पहली बार चीफ प्रॉक्टर बनाए जा रहे हैं। इससे पहले वह प्रॉक्टोरियल टीम के वरिष्ठ सदस्य रहे थे। बरेली कॉलेज में अनुशासन व्यवस्था के लिए चीफ प्रॉक्टर ही जिम्मेदार होता है। ऐसे में चीफ प्रॉक्टर पर तमाम राजनैतिक दबाव भी पड़ते हैं। डॉ. अजय शर्मा ने अपने कार्यकाल में अनुशासन तोड़ने वाले छात्रनेताओं पर एफआईआर बहुत कम कराई। उन्होंने बातचीत से ही मामले को सुलझाने का प्रयास किया, ताकि किसी तरह का विरोध न हो। डॉ. अजय शर्मा के समय विपिन सिंह थापा और मदुनेश यादव के साथ मारपीट का मामला हुआ। इसके अलावा बड़ी घटनाएं नहीं हुई। इस दौरान सिर्फ एक बार छात्रसंघ चुनाव हुए।
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यह बड़े बदलाव की दस्तक तो नहीं
बरेली। बरेली कॉलेज में चीफ प्रॉक्टर का बदलाव भले ही सहज लग रहा हो, लेकिन यह इतना सामान्य नहीं है। अगले चरण में बड़ा बदलाव हो सकता है। बरेली कॉलेज में चीफ प्रॉक्टर रहे डॉ. अजय शर्मा को उप प्राचार्य बनाना, कई सवाल खड़े खड़ा करता है। जब पहले से प्राचार्य और कार्यवाहक प्राचार्य हों तो उप प्राचार्य बनाने की जरूरत की मंशा पर अटकल लगना लाजिमी है। पहली बार डिप्टी चीफ प्रॉक्टर का पद बनाया गया है। अब तक चीफ प्रॉक्टर अपनी अनुपस्थित में प्रॉक्टोरियल टीम के वरिष्ठ सदस्य को चार्ज दे कर जाते थे। तमाम बदलाव के बाद इस साल कुछ और चौंकाने वाले परिवर्तन हो सकते हैं। कयास लग रहा है कि प्राचार्य, कार्यवाहक प्राचार्य और उपप्राचार्य बनाने के बाद कार्यों का भी विभाजन हो सकता है।