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बैंकों के ब्रांच स्टाफ के सुझाव बनेंगे पांच खरब की अर्थव्यवस्था की बुनियाद
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बरेली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले पांच सालों में भारत को पांच खरब की अर्थव्यवस्था बनाने के अपने दावे को लेकर हवा में नहीं उड़ना चाहते, इसलिए उन्होंने इसके लिए उन्होंने अपनी प्लानिंग की शुरूआत ऊपर से नहीं बल्कि ग्रास रूट से की है। बैंकों की सबसे निचली इकाई यानी ब्रांच स्टाफ से फीड बैक लिया जा रहा है कि रूरल इंडिया को किस तरह डिजिटल इंडिया के तौर पर आगे बढ़ाया जाए। कैशलेस पेमेंट के साथ स्टैंड अप इंडिया, मुद्रा लोन और किसानों की ऋण योजनाओं पर खास फोकस किया जा रहा है। इनके रास्ते में क्या दिक्कतें आ रही हैं और उनसे कैसे पार पाया जाए, इस पर बैंकों के ब्रांच स्टाफ से मिले सुझाव सीधे वित्त मंत्रालय तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।
अमर उजाला से खास बातचीत में ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के महाप्रबंधक सुरेंद्र नाथ दीक्षित ने बताया कि केंद्र सरकार ने पहली बार अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए देशभर की विभिन्न सरकारी बैंकों की करीब 1700 बैंक शाखाओं के स्टाफ से फीडबैक लेने की शुरुआत की है। इसके जरिये यह जानने की कोशिश की जा रही है कि डिजिटल इंडिया की राह में बड़ी अड़चनें क्या हैं। सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि पब्लिक का रूझान कैशलेस सिस्टम की ओर बढ़ाया जाए। इसी तरह मुद्रा लोन और स्टैंड अप इंडिया को कैसे खड़ा किया जाए। यह भी सुझाव मांगा गया है कि अशिक्षित किसान को आखिर किस तरह इतना सक्षम बनाया जाए कि वह डिजिटल पेमेंट के जरिये कृषि उपकरण, खाद और अपनी जरूरत की दूसरी चीजें खरीदने के लिए प्रेरित हो। सुरेश नाथ के मुताबिक ब्रांचों के स्टाफ से अब तक मिले सुझावों से यह बात सामने आई हैं कि लोग लेनदेन के लिए एटीएम या सीडीएम का इस्तेमाल करने के बजाय बैंक काउंटर पर लाइन में लगने की मानसिकता से बाहर नहीं आ रहे। ऐसे में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता और विश्वास दोनों पैदा करने की जरूरत है।
खास बातें
बैंक स्टाफ की ओर से सरकार को कुछ खास सुझाव
-एटीएम कार्ड से संबंधित धोखाधड़ी रोकने के लिए कोड नंबर के बजाय मशीनों में अंगूठा लगाने का सिस्टम बनाया जाए।
-कैशलेस पेमेंट के लिए पॉज मशीन रखने पर दुकानदारों से मासिक शुल्क और ट्रांजेक्शन चार्ज खत्म हो।
-ऑनलाइन भुगतान के लिए इंटरनेट की सुलभता और कनेक्टिविटी का नेटवर्क और मजबूत बने।
-लोगों को ऑनलाइन एप और प्लास्टिक करेंसी के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जाए।
-सरकारी भुगतान सौ फीसदी कैशलेस हो, उपभोक्ताओं के लिए कैशबैक की सुविधा बढ़ाई जाए।
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अमर उजाला से खास बातचीत में ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के महाप्रबंधक सुरेंद्र नाथ दीक्षित ने बताया कि केंद्र सरकार ने पहली बार अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए देशभर की विभिन्न सरकारी बैंकों की करीब 1700 बैंक शाखाओं के स्टाफ से फीडबैक लेने की शुरुआत की है। इसके जरिये यह जानने की कोशिश की जा रही है कि डिजिटल इंडिया की राह में बड़ी अड़चनें क्या हैं। सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि पब्लिक का रूझान कैशलेस सिस्टम की ओर बढ़ाया जाए। इसी तरह मुद्रा लोन और स्टैंड अप इंडिया को कैसे खड़ा किया जाए। यह भी सुझाव मांगा गया है कि अशिक्षित किसान को आखिर किस तरह इतना सक्षम बनाया जाए कि वह डिजिटल पेमेंट के जरिये कृषि उपकरण, खाद और अपनी जरूरत की दूसरी चीजें खरीदने के लिए प्रेरित हो। सुरेश नाथ के मुताबिक ब्रांचों के स्टाफ से अब तक मिले सुझावों से यह बात सामने आई हैं कि लोग लेनदेन के लिए एटीएम या सीडीएम का इस्तेमाल करने के बजाय बैंक काउंटर पर लाइन में लगने की मानसिकता से बाहर नहीं आ रहे। ऐसे में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता और विश्वास दोनों पैदा करने की जरूरत है।
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खास बातें
बैंक स्टाफ की ओर से सरकार को कुछ खास सुझाव
-एटीएम कार्ड से संबंधित धोखाधड़ी रोकने के लिए कोड नंबर के बजाय मशीनों में अंगूठा लगाने का सिस्टम बनाया जाए।
-कैशलेस पेमेंट के लिए पॉज मशीन रखने पर दुकानदारों से मासिक शुल्क और ट्रांजेक्शन चार्ज खत्म हो।
-ऑनलाइन भुगतान के लिए इंटरनेट की सुलभता और कनेक्टिविटी का नेटवर्क और मजबूत बने।
-लोगों को ऑनलाइन एप और प्लास्टिक करेंसी के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जाए।
-सरकारी भुगतान सौ फीसदी कैशलेस हो, उपभोक्ताओं के लिए कैशबैक की सुविधा बढ़ाई जाए।