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जुलूस-ए- मोहम्मदी में डीजे पर पाबंदी से अंजुमनें बेचैन
सार
जुलूस-ए-मोहम्मदी में इस बार डीजे शामिल न करने के फैसले पर आयोजकों और अंजुमनों के बीच रस्साकशी शुरू हो गई है।कुछ दिन पहले दरगाह आला हजरत की ओर से जुलूस में इस बार किसी भी हालत में डीजे न लाने की हिदायत दी थी।एब डीजे कैंसिल करने पर उन्हें काफी नुकसान होगा।
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विस्तार
बरेली। जुलूस-ए-मोहम्मदी में इस बार डीजे शामिल न करने के फैसले पर आयोजकों और अंजुमनों के बीच रस्साकशी शुरू हो गई है। कई अंजुमनें डीजे के लिए लाखों एडवांस दे दिए जाने का हवाला देते हुए फैसला बदलने की मांग कर रही हैं, दूसरी ओर आयोजक दरगाह आला हजरत के प्रमुख सुब्हानी मियां के फरमान पर सख्ती से पाबंदी लगाने की बात पर अड़े हुए हैं।
जुलूस-ए- मोहम्मदी आठ और नौ अक्तूबर को निकलना है। कुछ दिन पहले दरगाह आला हजरत की ओर से जुलूस में इस बार किसी भी हालत में डीजे न लाने की हिदायत दी थी। आयोजकों ने दरगाह का यह फरमान जुलूस में शामिल होने वाली अंजुमनों को सुनाया तो उनमें खलबली मच गई। अंजुमनों के सदर डीजे के लिए पहले ही एडवांस रकम दे दिए जाने की बात कहते हुए इस पाबंदी को हटाने की मांग कर रहे हैं तो दूसरी तरफ आयोजक भी टस से मस होने को तैयार नहीं हैं। कई बैठकें होने के बावजूद अब तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है।
अंजुमनों के सदर का यह भी कहना है कि कमेटी ने अचानक यह फैसला लिया है। एब डीजे कैंसिल करने पर उन्हें काफी नुकसान होगा। अंजुमन में शामिल होने वाले लोग भी बगैर डीजे के आने को तैयार नहीं हैं और अपने पैसे वापस मांग रहे हैं। बड़ी अंजुमनों का कहना है कि एक अंजुमन सात से आठ लाख रुपये में तैयार होती है। डीजे रद्द हुआ तो उन्हें बड़ा नुकसान होगा।
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पुलिस-प्रशासन ने इस विवाद से यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया है कि शासन से डीजे पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। लिहाजा कमेटी खुद इस विवाद का निपटारा करे। एसएसपी अखिलेश चौरसिया ने बताया कि पुलिस सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करेगी। कोई विवाद होने की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होगी।
जुलूस के अगले दिन डीजे के
साथ निकाल लें अंजुमन
नए शहर की कमेटी अंजुमन खुद्दाम-ए-रसूल के सेक्रेट्री शान अहमद रजा ने कहा है कि डीजे पर उनकी ओर से सौ फीसदी प्रतिबंध है। किसी भी अंजुमन को डीजे के साथ जुलूस में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। अगर कोई अंजुमन डीजे के बगैर नहीं आना चाहती तो वह अगले दिन अलग से परमिशन लेकर अपनी अंजुमन को घुमाए लेकिन मुख्य जुलूस में उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा। पुराना शहर की कमेटी अंजुमन इत्तेहादुल मुस्लमीन के महासचिव अंजुम शमीम का कहना है कि डीजे को रोकने का हर संभव प्रयास रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि लोग खुद ही डीजे नहीं लाएंगे। इस पर लगातार बातचीत चल रही है। बृहस्पतिवार शाम तक स्थिति साफ हो जाएगी।
आईएमसी नेताओं ने कहा- हम रकम
देने को तैयार मगर कोई ले नहीं रहा
डीजे पर पाबंदी के फैसले का आईएमसी भी समर्थन कर रही है। आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने कहा था कि जो अंजुमन एडवांस दे चुकी हैं, वे उसकी रसीदें दिखाकर उनसे रकम ले सकती हैं। आईएमसी के मीडिया प्रभारी मुनीर इदरीस ने बताया कि सुब्हानी मियां की अपील का आईएमसी प्रमुख ने समर्थन किया है। आईएमसी की टीमें मोहल्लों में पहुंचकर लोगों से डीजे न लाने की अपील कर रही है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 60 अंजुमनों के सदर ने उन्हें एडवांस की रसीद दिखाकर डीजे कैंसिल करने की बात कही है। उनकी ओर से रकम की भी मांग नहीं की गई है।
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जुलूस-ए- मोहम्मदी आठ और नौ अक्तूबर को निकलना है। कुछ दिन पहले दरगाह आला हजरत की ओर से जुलूस में इस बार किसी भी हालत में डीजे न लाने की हिदायत दी थी। आयोजकों ने दरगाह का यह फरमान जुलूस में शामिल होने वाली अंजुमनों को सुनाया तो उनमें खलबली मच गई। अंजुमनों के सदर डीजे के लिए पहले ही एडवांस रकम दे दिए जाने की बात कहते हुए इस पाबंदी को हटाने की मांग कर रहे हैं तो दूसरी तरफ आयोजक भी टस से मस होने को तैयार नहीं हैं। कई बैठकें होने के बावजूद अब तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है।
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अंजुमनों के सदर का यह भी कहना है कि कमेटी ने अचानक यह फैसला लिया है। एब डीजे कैंसिल करने पर उन्हें काफी नुकसान होगा। अंजुमन में शामिल होने वाले लोग भी बगैर डीजे के आने को तैयार नहीं हैं और अपने पैसे वापस मांग रहे हैं। बड़ी अंजुमनों का कहना है कि एक अंजुमन सात से आठ लाख रुपये में तैयार होती है। डीजे रद्द हुआ तो उन्हें बड़ा नुकसान होगा।
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पुलिस-प्रशासन ने इस विवाद से यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया है कि शासन से डीजे पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। लिहाजा कमेटी खुद इस विवाद का निपटारा करे। एसएसपी अखिलेश चौरसिया ने बताया कि पुलिस सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करेगी। कोई विवाद होने की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होगी।
जुलूस के अगले दिन डीजे के
साथ निकाल लें अंजुमन
नए शहर की कमेटी अंजुमन खुद्दाम-ए-रसूल के सेक्रेट्री शान अहमद रजा ने कहा है कि डीजे पर उनकी ओर से सौ फीसदी प्रतिबंध है। किसी भी अंजुमन को डीजे के साथ जुलूस में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। अगर कोई अंजुमन डीजे के बगैर नहीं आना चाहती तो वह अगले दिन अलग से परमिशन लेकर अपनी अंजुमन को घुमाए लेकिन मुख्य जुलूस में उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा। पुराना शहर की कमेटी अंजुमन इत्तेहादुल मुस्लमीन के महासचिव अंजुम शमीम का कहना है कि डीजे को रोकने का हर संभव प्रयास रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि लोग खुद ही डीजे नहीं लाएंगे। इस पर लगातार बातचीत चल रही है। बृहस्पतिवार शाम तक स्थिति साफ हो जाएगी।
आईएमसी नेताओं ने कहा- हम रकम
देने को तैयार मगर कोई ले नहीं रहा
डीजे पर पाबंदी के फैसले का आईएमसी भी समर्थन कर रही है। आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने कहा था कि जो अंजुमन एडवांस दे चुकी हैं, वे उसकी रसीदें दिखाकर उनसे रकम ले सकती हैं। आईएमसी के मीडिया प्रभारी मुनीर इदरीस ने बताया कि सुब्हानी मियां की अपील का आईएमसी प्रमुख ने समर्थन किया है। आईएमसी की टीमें मोहल्लों में पहुंचकर लोगों से डीजे न लाने की अपील कर रही है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 60 अंजुमनों के सदर ने उन्हें एडवांस की रसीद दिखाकर डीजे कैंसिल करने की बात कही है। उनकी ओर से रकम की भी मांग नहीं की गई है।