फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Azad Khan released from Bareilly Central Jail after being acquitted by the High Court

UP News: जवानी जेल में गुजरी... 25 साल बाद रिहा हुए आजाद, डकैती के मामले में हाईकोर्ट ने किया बरी

Thu, 22 Jan 2026 10:15 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 22 Jan 2026 10:15 AM IST
सार

मैनपुरी जिले के रहने वाले आजाद खां 25 साल बाद जेल से रिहा कर दिए गए। डकैती के मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसे खारिज कर हाईकोर्ट ने आजाद को दोषमुक्त किया। ई-मेल से उनकी रिहाई का परवाना आया। इसके बाद बुधवार देर शाम बरेली सेंट्रल जेल से उन्हें रिहा कर दिया गया। पढ़िए आजाद खां की कहानी...। 

विज्ञापन
Azad Khan released from Bareilly Central Jail after being acquitted by the High Court
जेल से रिहा हुए आजाद खां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डकैती के मामले में आधी उम्र जेल में गुजारने के बाद मैनपुरी जिले के 45 वर्षीय आजाद खां को दोषमुक्त करार दिया गया। इसके बावजूद कई कानूनी अड़चनें रिहाई में बाधक बनीं। जेल प्रशासन व एनजीओ की मदद से आखिरकार बुधवार शाम आजाद को बरेली सेंट्रल जेल से रिहाई मिल गई। 

विज्ञापन


मैनपुरी जिले के एलाऊ थाना क्षेत्र के मोहल्ला ज्योति कटार निवासी आजाद खां को वर्ष 2002 में मैनपुरी की विशेष अदालत ने डकैती और गंभीर चोट पहुंचाने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बीस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया था। जुर्माना अदा न करने पर दो वर्ष अतिरिक्त कारावास से दंडित किया गया। साथ ही, वर्ष 2001 में मैनपुरी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर चार ने आजाद को आर्म्स एक्ट और जानलेवा हमले के मामले में दस साल की सजा सुनाई और सात हजार रुपये जुर्माना लगाया था। 
विज्ञापन


साल 2003 में बरेली जेल में भेजा गया 
जुर्माना अदा न करने पर एक साल अतिरिक्त सजा से दंडित किया। इसके बाद आजाद फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद था। वर्ष 2003 में सजा भुगतने के लिए आजाद को बरेली सेंट्रल जेल भेज दिया गया। आजाद की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील की गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें- GST Raid: बरेली में रहबर फूड्स और मारिया फ्रोजन मीट फैक्टरी पर जीएसटी का छापा, देर रात तक जारी रही जांच

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने साक्ष्य और चश्मदीद गवाह न होने से 19 दिसंबर 2025 को आजाद को डकैती के मामले में दोषमुक्त कर दिया। आर्म्स एक्ट और जानलेवा हमले की सजा को आजाद पूरा कर चुका है। ऐसे में 45 वर्षीय आजाद की आधी उम्र जेल में ही गुजर चुकी है। अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसे दोषमुक्त करार दिया है। 

जेल के दो अफसरों ने दूर कराईं कानूनी अड़चनें
उच्च न्यायालय ने आजाद को दोषमुक्त ठहराते हुए जमानत दाखिल करने का आदेश दिया था। मैनपुरी न्यायालय में यह प्रक्रिया पूरी न होने से रिहाई आदेश जारी नहीं हो सका। मामला चर्चा में आया तो सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक अविनाश गौतम ने मैनपुरी के विशेष न्यायाधीश को पत्र लिखकर रिहाई आदेश उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। सेंट्रल जेल के जेलर नीरज कुमार और मैनपुरी जेल के अधिकारियों ने संवाद किया और ई-मेल से रिहाई परवाना सेंट्रल जेल बरेली आ गया। 

रात नौ बजे आजाद हुए आजाद
सेंट्रल जेल के जेलर नीरज कुमार ने बताया कि आजाद के भाई मस्तान ने आकर बीस हजार रुपये का निजी बंधपत्र भरवाया। बाकी सात हजार रुपये जुर्माने की रकम एक संस्था छोटी सी आशा व जेल कर्मियों ने चंदा करके जमा की। रात नौ बजे आजाद ने जेल से आजाद होकर खुली हवा में सांस ली। भाई के साथ वह घर के लिए रवाना हो गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed