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Bareilly News: तेहि छन राम मध्य धनु तोरा, भरे भुवन धुनि घोर कठोरा

Mon, 22 Sep 2025 01:58 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Mon, 22 Sep 2025 01:58 AM IST
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At that very moment, Ram in the middle of your bow, filled the world with a very harsh sound.
लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें, काहुँ न लखा देख सबु ठाढ़ें
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तेहि छन राम मध्य धनु तोरा, भरे भुवन धुनि घोर कठोरा॥
भावार्थ:- लेते, चढ़ाते और जोर से खींचते हुए किसी ने नहीं लखा (अर्थात ये तीनों काम इतनी फुर्ती से हुए कि धनुष को कब उठाया, कब चढ़ाया और कब खींचा, इसका किसी को पता नहीं लगा), सबने श्री रामजी को (धनुष खींचे) खड़े देखा। उसी क्षण श्रीराम ने धनुष को बीच से तोड़ डाला। भयंकर कठोर ध्वनि से (सब) लोकभर गए॥

फोटो
चौधरी मोहल्ला में चल रही रामलीला में धनुष भंग, रावण-बाणासुर और लक्ष्मण-परशुराम संवाद का किया गया मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
बरेली। श्री रानी महालक्ष्मी बाई रामलीला समिति की ओर से चौधरी मोहल्ला में चल रही रामलीला में रविवार धनुष यज्ञ, धनुष भंग, रावण-बाणासुर संवाद और लक्ष्मण-परशुराम संवाद का मंचन किया गया।
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मिथिला नरेश जनक ने घोषणा की कि जो भी राजकुमार शिवधनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से उनकी पुत्री सीता का विवाह होगा। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अयोध्या, काशी, मगध और अन्य राज्यों से आए शक्तिशाली राजकुमारों ने अपनी-अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, लेकिन कोई भी शिवधनुष को हिला तक नहीं सका। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पर भगवान राम ने मंच पर प्रवेश किया, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रीराम ने विनम्रता और सहजता के साथ शिवधनुष उठाया और उसे पल भर में बीच से तोड़ दिया। धनुष भंग होते ही पूरा जनकपुर जय श्रीराम और सियावर रामचंद्र की जय के उद्घोष से गूंज उठा। माता सीता ने श्रीराम के गले में जयमाला डालकर स्वयंवर को पूरा किया। इसके बाद लंकेश रावण का प्रवेश हुआ। स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान रावण का प्रभावशाली व्यक्तित्व और उसकी शान-ओ-शौकत ने सभी का ध्यान खींचा। रावण और बाणासुर के बीच हुआ संवाद अहंकार और नीति की गहरी टकराहट को दर्शाता था। जहां रावण ने अपने पराक्रम का बखान करते हुए विश्व पर विजय की महत्वाकांक्षा व्यक्त की, वहीं बाणासुर ने उसे संयम और धर्म का पालन करने की सलाह दी। इस संवाद ने दर्शकों को शक्ति और नीति के बीच के संघर्ष का आनंद दिया।
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परशुराम संवाद के दौरान धनुष भंग की खबर सुनकर परशुराम जी क्रोधित होकर जनकपुरी की सभा में पहुंचे। परशुराम ने धनुष भंग को अपना अपमान मानते हुए राम-लक्ष्मण को ललकारा। इस पर लक्ष्मण ने अपनी निर्भीकता और व्यंग्यपूर्ण वाणी से परशुराम से वाद-विवाद किया। इस दौरन पं. रामगोपाल मिश्रा, हरीश शुक्ला, घनश्याम मिश्रा, प्रदीप बाजपेयी, नीरज शुक्ला, शिव नारायण दीक्षित, श्रेयांश बाजपेयी आदि मौजूद रहे।
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