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Bareilly News: अष्टमी व रोहिणी का नहीं होगा मिलन सुयोगों के संगम में जन्मेंगे नंदलाल
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बरेली। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस बार शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इसके चलते जन्माष्टमी व्रत रखने पर कई गुना अधिक फल प्राप्त होगा।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि व रोहिणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस बार अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र का मिलन नहीं हो रहा है। आचार्य पंडित राजेश शर्मा के अनुसार भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 12:58 बजे से शुरू हो रही है। उदया तिथि की प्रधानता के चलते शनिवार को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
बताया कि भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण का अवतरण द्वापर युग में अधर्म के नाश के लिए हुआ था। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की घरों और मंदिरों में पूजा की जाती है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और आधी रात तक जगकर जन्मोत्सव मनाया जाता है।
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पूजा विधि
जन्माष्टमी पर ठाकुरजी को दूध, दही, घी, शहद, इत्र और गंगाजल से स्नान करना चाहिए। इसके बाद उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं, आभूषण आदि से शृंगार करने के बाद माखन-मिश्री का भोग लगाएं। उनके हाथ में बांसुरी अवश्य हो।
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भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि व रोहिणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस बार अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र का मिलन नहीं हो रहा है। आचार्य पंडित राजेश शर्मा के अनुसार भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 12:58 बजे से शुरू हो रही है। उदया तिथि की प्रधानता के चलते शनिवार को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
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बताया कि भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण का अवतरण द्वापर युग में अधर्म के नाश के लिए हुआ था। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की घरों और मंदिरों में पूजा की जाती है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और आधी रात तक जगकर जन्मोत्सव मनाया जाता है।
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पूजा विधि
जन्माष्टमी पर ठाकुरजी को दूध, दही, घी, शहद, इत्र और गंगाजल से स्नान करना चाहिए। इसके बाद उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं, आभूषण आदि से शृंगार करने के बाद माखन-मिश्री का भोग लगाएं। उनके हाथ में बांसुरी अवश्य हो।