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Bareilly News: चुनौती बनी फरार कैदी की गिरफ्तारी, जेल अफसरों पर हो सकती है कार्रवाई
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बरेली। सेंट्रल जेल के फार्म हाउस से फरार कैदी हरपाल की गिरफ्तारी पुलिस और जेल प्रशासन के लिए चुनौती साबित हो रही है। जानकारों के मुताबिक जेल मैनुअल के कायदे ताक पर रखकर हरपाल को सहूलियत दी जा रही थी। इब जेल अफसरों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
उम्रकैद की सजा पाए कैदी को बिना कोर्ट की अनुमति या तारीख के जेल परिसर से निकालने का प्रावधान नहीं है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इसके लिए दस साल की अवधि तय की गई है। इस अवधि की सजा काटने के बाद ही उसे बाहर लाकर कृषि और अन्य कार्य लिया जा सकता है। इससे पहले सश्रम कारावास की स्थिति में जेल के अंदर ही कैदी से काम कराया जा सकता है। हरपाल पिछले साल जुलाई में ही सेंट्रल जेल में दाखिल किया गया था। उसे हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हुई है।
सूत्र ये भी बताते हैं कि हरपाल से खेतों में ट्रैक्टर चलवाया जाता था, जबकि किसी भी बंदी या कैदी को ट्रैक्टर चलाने की छूट नहीं देनी चाहिए। ऐसे में जेल अफसरों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। डीजी जेल के निर्देश पर विभागीय जांच की जा रही है। इसमें दोषी मिलने पर जेल अफसरों पर भी कार्रवाई की जा रही है। अमर उजाला ब्यूरो
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सवा साल पुराने फोटो और कपड़ों के सहारे कैदी की तलाश
बरेली। फरार कैदी हरपाल की तलाश पुलिस को भारी पड़ रही है। सर्विलांस से लेकर सीसीटीवी तक फेल हो रहे हैं। मुखबिरों के जरिये ही उसे पकड़ना संभव हो सकेगा।
हरपाल मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता। तलाश के लिए जेल से उसका जो फोटो पुलिस को मिला है, वह सवा साल पुराना जेल में दाखिले के वक्त का है। तब उसने दाढ़ी रखी थी, अब वह दाढ़ी नहीं रखता है। जो कपड़े उसने फोटो में पहने हैं, वह कपड़े भी उसके पास नहीं हैं। उसने परिवार के किसी सदस्य को कॉल भी नहीं की है।
जेलकर्मी हरपाल के करीबी बंदियों से सुराग जुटा रहे हैं। पुलिस जेल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कर रही है, लेकिन उनमें से किसी में उसकी फुटेज नहीं है। रिश्तेदारियों में भी हरपाल की तलाश की जा रही है। पुलिस का पूरा फोकस सीसीटीवी कैमरों और मुखबिर तंत्र पर है। दूसरे जिलों और राज्यों में हरपाल के फोटो भेजकर उसको गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है। ब्यूरो
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उम्रकैद की सजा पाए कैदी को बिना कोर्ट की अनुमति या तारीख के जेल परिसर से निकालने का प्रावधान नहीं है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इसके लिए दस साल की अवधि तय की गई है। इस अवधि की सजा काटने के बाद ही उसे बाहर लाकर कृषि और अन्य कार्य लिया जा सकता है। इससे पहले सश्रम कारावास की स्थिति में जेल के अंदर ही कैदी से काम कराया जा सकता है। हरपाल पिछले साल जुलाई में ही सेंट्रल जेल में दाखिल किया गया था। उसे हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हुई है।
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सूत्र ये भी बताते हैं कि हरपाल से खेतों में ट्रैक्टर चलवाया जाता था, जबकि किसी भी बंदी या कैदी को ट्रैक्टर चलाने की छूट नहीं देनी चाहिए। ऐसे में जेल अफसरों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। डीजी जेल के निर्देश पर विभागीय जांच की जा रही है। इसमें दोषी मिलने पर जेल अफसरों पर भी कार्रवाई की जा रही है। अमर उजाला ब्यूरो
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सवा साल पुराने फोटो और कपड़ों के सहारे कैदी की तलाश
बरेली। फरार कैदी हरपाल की तलाश पुलिस को भारी पड़ रही है। सर्विलांस से लेकर सीसीटीवी तक फेल हो रहे हैं। मुखबिरों के जरिये ही उसे पकड़ना संभव हो सकेगा।
हरपाल मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता। तलाश के लिए जेल से उसका जो फोटो पुलिस को मिला है, वह सवा साल पुराना जेल में दाखिले के वक्त का है। तब उसने दाढ़ी रखी थी, अब वह दाढ़ी नहीं रखता है। जो कपड़े उसने फोटो में पहने हैं, वह कपड़े भी उसके पास नहीं हैं। उसने परिवार के किसी सदस्य को कॉल भी नहीं की है।
जेलकर्मी हरपाल के करीबी बंदियों से सुराग जुटा रहे हैं। पुलिस जेल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कर रही है, लेकिन उनमें से किसी में उसकी फुटेज नहीं है। रिश्तेदारियों में भी हरपाल की तलाश की जा रही है। पुलिस का पूरा फोकस सीसीटीवी कैमरों और मुखबिर तंत्र पर है। दूसरे जिलों और राज्यों में हरपाल के फोटो भेजकर उसको गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है। ब्यूरो