{"_id":"5daf023e8ebc3e93b434700b","slug":"aprajita-in-budaun-bareilly-news-bly3812045200","type":"story","status":"publish","title_hn":"आसमान छू सकती हैं बेटियां, कोई हौसला देने वाला तो हो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आसमान छू सकती हैं बेटियां, कोई हौसला देने वाला तो हो
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रमोद इंटर कॉलेज में अपराजिता के तहत हुई गोष्ठी
विज्ञापन
सहसवान (बदायूं)। आज समय बदल चुका है। पढ़े-लिखे समाज में महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रहीं हैं। हर क्षेत्र में मेहनत कर रहीं हैं। फिर चाहे पुलिस विभाग हो या आर्मी, आज के दौर में महिलाएं किसी से कम नहीं हैं। इसके बावजूद कुछ इलाके ऐसे हैं जहां बालिकाओं को बोझ समझा जाता है। लोग ये भूल जाते हैं कि यही बालिकाएं एक दिन घर संभालती हैं। इन्हें हौसला दें तो ये देश भी संभाल सकती हैं और आसमान छू सकती हैं।
यह विचार मंगलवार को प्रमोद इंटर कॉलेज में आयोजित अपराजिता के तहत गोष्ठी में रखे गए। ‘बेटों से कम नहीं बेटियां’ विषय पर अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसडीएम लालबहादुर ने कहा कि छात्राएं पढ़ाई के साथ मेहनत करें, आत्मनिर्भर बनें। उनके हित में सरकार ने अनेक योजनाएं चलाई हैं, उनका लाभ लें। आज हर क्षेत्र में लड़कियां नाम रोशन कर रहीं हैं, लेकिन जब कन्या भ्रूण हत्या जैसे मामले सामने आते हैं तो बेहद शर्मिंदगी महसूस होती है। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
सीओ रामकरन सरोज ने कहा कि आज देश की 70 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है। जहां का माहौल बेटों पर निर्भर होता है। वही घर से बाहर जाते हैं और काम करते हैं, जबकि बेटियों को घर के अंदर रसोई की जिम्मेदारी दे दी जाती है। जबकि वे बेटों से अधिक कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि आज का दौर वह नहीं रहा, जब लोग अकेली बेटी के होने पर चिंता करते थे। अब सुरक्षा तंत्र मजबूत हो गया है। एक फोन कॉल पर पुलिस उनके पास होगी उन्हें तुरंत मदद मिलेगी। इसलिए बेटियों को डराएं नहीं, बल्कि उनका हौसला बढ़ाएं।
विज्ञापन
प्रधानाचार्य रामसहाय बिन्द ने अमर उजाला की इस मुहिम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बेटियों को सीख मिलती है। उन्हें ज्ञान मिलता है, वे प्रेरित होती हैं। इस दौरान प्रदीप यादव, मोहम्मद अहमद खां आदि का सहयोग रहा। संचालन भगवती त्यागी ने किया।
यह विचार मंगलवार को प्रमोद इंटर कॉलेज में आयोजित अपराजिता के तहत गोष्ठी में रखे गए। ‘बेटों से कम नहीं बेटियां’ विषय पर अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसडीएम लालबहादुर ने कहा कि छात्राएं पढ़ाई के साथ मेहनत करें, आत्मनिर्भर बनें। उनके हित में सरकार ने अनेक योजनाएं चलाई हैं, उनका लाभ लें। आज हर क्षेत्र में लड़कियां नाम रोशन कर रहीं हैं, लेकिन जब कन्या भ्रूण हत्या जैसे मामले सामने आते हैं तो बेहद शर्मिंदगी महसूस होती है। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
विज्ञापन
सीओ रामकरन सरोज ने कहा कि आज देश की 70 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है। जहां का माहौल बेटों पर निर्भर होता है। वही घर से बाहर जाते हैं और काम करते हैं, जबकि बेटियों को घर के अंदर रसोई की जिम्मेदारी दे दी जाती है। जबकि वे बेटों से अधिक कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि आज का दौर वह नहीं रहा, जब लोग अकेली बेटी के होने पर चिंता करते थे। अब सुरक्षा तंत्र मजबूत हो गया है। एक फोन कॉल पर पुलिस उनके पास होगी उन्हें तुरंत मदद मिलेगी। इसलिए बेटियों को डराएं नहीं, बल्कि उनका हौसला बढ़ाएं।
विज्ञापन
प्रधानाचार्य रामसहाय बिन्द ने अमर उजाला की इस मुहिम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बेटियों को सीख मिलती है। उन्हें ज्ञान मिलता है, वे प्रेरित होती हैं। इस दौरान प्रदीप यादव, मोहम्मद अहमद खां आदि का सहयोग रहा। संचालन भगवती त्यागी ने किया।