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शाही और राजपुर कला में बुखार से चार की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Mon, 29 Aug 2016 01:35 AM IST
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शाही/राजपुरकलां। ग्रामीण क्षेत्रों में बुखार से मरने वालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को शाही और राजपुर कलां में चार लोगों की बुखार से मौत हो गई। जबकि सैकड़ों लोग पिछले क ई दिनों से तेज बुखार से तप रहे हैं।
शाही के दौली जवाहरलाल गांव के सुआलीन खां की 22 साल की पत्नी सीमा की रविवार तीसरे पहर इलाज के लिए बरेली ले जाते वक्त रास्ते में मौत हो गई। वह तीन दिन से तेज बुखार से पीड़ित थीं। गांव के डाक्टरों से इलाज भी चल रहा था। सीमा साल भर पहले ही ब्याह कर आई थी। जुन्हाई गांव में चार दिन से बुखार से पीड़ित 60 वर्षीय दुल्लन सिंह की भी रविवार शाम मौत हो गई। दौली जवाहरलाल गांव के प्रधान मकसूद की मां रफीदन को निजी हास्पिटल में खून की जांच में मलेरिया पैरासाइट की पुष्टि हुई है। प्रधान की 18 साल की बेटी निशा, तीन नातिन शिफा, इल्मा, उज्मा भी तेज बुखार से घिरी हैं। अमौर में ब्याही बेटी शाहजहां भी कई रोज से तेज बुखार में थी। दो दिन पहले ससुराली उसे ले गए हैं। गांव की 40 वर्षीया भूरी का मलेरिया का इलाज चल रहा है। सायरा का भी यही हाल है। यामीन खां (35) के खून की जांच में मलेरिया पैरासाइट बताया गया है। परिवार वाले बरेली ले गए हैं। गांव के 250 से ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित हैं। बुखार की वजह से स्कूलों में बच्चों की हाजिरी आधी रह गई है। प्रधान मकसूद ने सीएमओ से गांव में फ्री हैल्थ कैंप लगवाकर गरीब मरीजों का इलाज करवाने की मांग की है।
तहसील मुख्यालय आंवला के सुदूरवर्ती गांव बरा सिरसा में इन दिनों बुखार व अन्य संक्रामक रोगों से लोगों का बुरा हाल है। शनिवार रात गांव निवासी साठ वर्षीय जौहरी यादव और इतनी उम्र की चंद्रकली पत्नी गंगाराम की मौत हो गई। दोनों कई दिन से बुखार से जूझ रहे थे। देवेंद्र और उनकी पत्नी नन्ही लली, दिनेश, उनकी पत्नी डौली, पांच साल की पुत्री कशिश समेत करीब 70 लोग तेज बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। किसी घर में एक या दो तो कहीं पूरा परिवार ही बुखार से ग्रस्त है। निजी चिकित्सकों की मानें तो वायरल के साथ ही लोगों को मलेरिया का भी प्रकोप है। गांव के अधिकांश लोग झोलाछाप चिकित्सकों के यहां से दवा लेने को मजबूर हैं।
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इकलौते फार्मेसिस्ट को भी बुखार, अस्पताल बंद
मझगवां पीएचसी के अंतर्गत आने वाले गांव बरा सिरसा में करोड़ों रुपये की लागत से काफी समय पहले अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया था। यहां कई महीने से कोई डाक्टर तैनात नहीं है। जिस डॉक्टर को यहां तैनात किया जाता है वह यहां तैनाती लेने आता ही नहीं। यहां इकलौते कर्मचारी के रूप में फार्मेसिस्ट चंद्रशेखर गुप्ता की तैनाती है। वह यहां अपडाउन करके मरीजों का उपचार कर रहे थे। चार दिन पहले वह भी बुखार की चपेट में आ गए। इसके बाद से वह छुट्टी पर हैं और अस्पताल में ताला लटका है।
बरा सिरसा में डॉक्टर तैनात नहीं हैं। फार्मेसिस्ट मेडिकल लीव पर चले गए हैं लोगों के बीमार होने की जानकारी मिली है। मझगवां से वहां टीम भेजकर रोगियों का इलाज किया जाएगा। - डॉ. वैभव कुमार, प्रभारी मझगवां पीएचसी
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शाही के दौली जवाहरलाल गांव के सुआलीन खां की 22 साल की पत्नी सीमा की रविवार तीसरे पहर इलाज के लिए बरेली ले जाते वक्त रास्ते में मौत हो गई। वह तीन दिन से तेज बुखार से पीड़ित थीं। गांव के डाक्टरों से इलाज भी चल रहा था। सीमा साल भर पहले ही ब्याह कर आई थी। जुन्हाई गांव में चार दिन से बुखार से पीड़ित 60 वर्षीय दुल्लन सिंह की भी रविवार शाम मौत हो गई। दौली जवाहरलाल गांव के प्रधान मकसूद की मां रफीदन को निजी हास्पिटल में खून की जांच में मलेरिया पैरासाइट की पुष्टि हुई है। प्रधान की 18 साल की बेटी निशा, तीन नातिन शिफा, इल्मा, उज्मा भी तेज बुखार से घिरी हैं। अमौर में ब्याही बेटी शाहजहां भी कई रोज से तेज बुखार में थी। दो दिन पहले ससुराली उसे ले गए हैं। गांव की 40 वर्षीया भूरी का मलेरिया का इलाज चल रहा है। सायरा का भी यही हाल है। यामीन खां (35) के खून की जांच में मलेरिया पैरासाइट बताया गया है। परिवार वाले बरेली ले गए हैं। गांव के 250 से ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित हैं। बुखार की वजह से स्कूलों में बच्चों की हाजिरी आधी रह गई है। प्रधान मकसूद ने सीएमओ से गांव में फ्री हैल्थ कैंप लगवाकर गरीब मरीजों का इलाज करवाने की मांग की है।
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तहसील मुख्यालय आंवला के सुदूरवर्ती गांव बरा सिरसा में इन दिनों बुखार व अन्य संक्रामक रोगों से लोगों का बुरा हाल है। शनिवार रात गांव निवासी साठ वर्षीय जौहरी यादव और इतनी उम्र की चंद्रकली पत्नी गंगाराम की मौत हो गई। दोनों कई दिन से बुखार से जूझ रहे थे। देवेंद्र और उनकी पत्नी नन्ही लली, दिनेश, उनकी पत्नी डौली, पांच साल की पुत्री कशिश समेत करीब 70 लोग तेज बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। किसी घर में एक या दो तो कहीं पूरा परिवार ही बुखार से ग्रस्त है। निजी चिकित्सकों की मानें तो वायरल के साथ ही लोगों को मलेरिया का भी प्रकोप है। गांव के अधिकांश लोग झोलाछाप चिकित्सकों के यहां से दवा लेने को मजबूर हैं।
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इकलौते फार्मेसिस्ट को भी बुखार, अस्पताल बंद
मझगवां पीएचसी के अंतर्गत आने वाले गांव बरा सिरसा में करोड़ों रुपये की लागत से काफी समय पहले अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया था। यहां कई महीने से कोई डाक्टर तैनात नहीं है। जिस डॉक्टर को यहां तैनात किया जाता है वह यहां तैनाती लेने आता ही नहीं। यहां इकलौते कर्मचारी के रूप में फार्मेसिस्ट चंद्रशेखर गुप्ता की तैनाती है। वह यहां अपडाउन करके मरीजों का उपचार कर रहे थे। चार दिन पहले वह भी बुखार की चपेट में आ गए। इसके बाद से वह छुट्टी पर हैं और अस्पताल में ताला लटका है।
बरा सिरसा में डॉक्टर तैनात नहीं हैं। फार्मेसिस्ट मेडिकल लीव पर चले गए हैं लोगों के बीमार होने की जानकारी मिली है। मझगवां से वहां टीम भेजकर रोगियों का इलाज किया जाएगा। - डॉ. वैभव कुमार, प्रभारी मझगवां पीएचसी