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Bareilly News: अलखनाथ, धोपेश्वरनाथ, तुलसीमठ और तपेश्वरनाथ मंदिर के परिसर होंगे विकसित
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बरेली। नाथ मंदिरों में श्रद्धालओं के लिए सहूलियतें बढ़ाने की कार्ययोजना अब धरातल पर उतरेगी। अलखनाथ, धोपेश्वरनाथ, तुलसीमठ और तपेश्वरनाथ मंदिर परिसरों को विकसित करने की योजना तैयार है। त्रिबटीनाथ, वनखंडीनाथ और मढ़ीनाथ मंदिर परिसरों की योजना प्रक्रिया में है।
नाथ कॉरिडोर परियोजना में बरेली के शिव मंदिरों में धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने की कार्ययोजना पर एक साल से मंथन हो रहा था। पर्यटन विभाग, नगर निगम, बीडीए और पीडब्ल्यूडी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। चार मंदिर परिसरों के लिए कार्ययोजना (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार हो चुकी है। लोक निर्माण विभाग आवागमन के लिए मार्ग बेहतर बनाने के लिए सड़कों का चौड़ीकरण करा रहा है। परिसरों को विकसित करने की योजना पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास परिषद व उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन ने डीपीआर बनवाई है।
ऐसे बदलेगी परिसरों की तस्वीर
अलखनाथ मंदिर : जब अलखनाथ मंदिर में प्रवेश करते हैं तो दोनों ओर प्रसाद की बिक्री के लिए दुकानें बनीं हुईं है। किसी ने लकड़ी का खोखा रखा है तो किसी ने टीन शेड डाल रखा है। अब पांच बड़ी दुकानें बन जाएंगी। परिसर में फव्वारा लगेंगा। लाइट के जरिए परिसर को सजाया जाएगा। स्वागत द्वार से लेकर मंदिर तक कहीं त्रिशूल तो कहीं डमरू नजर आएंगे।
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धोपेश्वरनाथ : मंदिर के दोनों ओर प्रसाद की दुकानों को व्यवस्थित करने के लिए पांच पक्की दुकानों का निर्माण होगा। फिलहाल पार्किंग की बड़ी समस्या है। पार्किंग स्थल बनेगा। एक ऐसा सत्संग भवन बनेगा, जिसमें एक हजार लोग बैठ सकेंगे।
ततुलसीमठ : धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मल्टीपरपज हॉल बनेगा। एक हजार दर्शक बैठ सकेंगे। साउंड और लाइट सिस्टम लगेगा। वैदिक लाइब्रेरी परिसर की शान बनेगी। इसमें 50 हजार से अधिक पुस्तकें रखने का इंतजाम होगाा। सौ से अधिक लोगों को एक संग पढ़ने और बैठने के लिए शानदार स्थान मिलेगा।
तपेश्वरनाथ : परिसर में बहुत सारी मठिया बनीं हैं। मुख्य मंदिर की आभा छिप जाती है। इसलिए मठिया शिफ्ट की जाएंगी। ऑडीटोरियम बनेगा। चार सौ लोग एक साथ बैठकर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम कर सकेंगे। भव्य प्रवेश द्वार भी बनेगा।
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धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शासन मंदिर परिसरों में सुविधाओं को विस्तार दे रहा है। स्वागत द्वार और सत्संग भवनों के साथ वैदिक लाइब्रेरी बननी है। श्रद्धालुओं को पेयजल और शौचालय आदि सुविधा मिलेंगी। -बृजपाल सिंह, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
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नाथ कॉरिडोर परियोजना में बरेली के शिव मंदिरों में धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने की कार्ययोजना पर एक साल से मंथन हो रहा था। पर्यटन विभाग, नगर निगम, बीडीए और पीडब्ल्यूडी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। चार मंदिर परिसरों के लिए कार्ययोजना (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार हो चुकी है। लोक निर्माण विभाग आवागमन के लिए मार्ग बेहतर बनाने के लिए सड़कों का चौड़ीकरण करा रहा है। परिसरों को विकसित करने की योजना पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास परिषद व उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन ने डीपीआर बनवाई है।
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ऐसे बदलेगी परिसरों की तस्वीर
अलखनाथ मंदिर : जब अलखनाथ मंदिर में प्रवेश करते हैं तो दोनों ओर प्रसाद की बिक्री के लिए दुकानें बनीं हुईं है। किसी ने लकड़ी का खोखा रखा है तो किसी ने टीन शेड डाल रखा है। अब पांच बड़ी दुकानें बन जाएंगी। परिसर में फव्वारा लगेंगा। लाइट के जरिए परिसर को सजाया जाएगा। स्वागत द्वार से लेकर मंदिर तक कहीं त्रिशूल तो कहीं डमरू नजर आएंगे।
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धोपेश्वरनाथ : मंदिर के दोनों ओर प्रसाद की दुकानों को व्यवस्थित करने के लिए पांच पक्की दुकानों का निर्माण होगा। फिलहाल पार्किंग की बड़ी समस्या है। पार्किंग स्थल बनेगा। एक ऐसा सत्संग भवन बनेगा, जिसमें एक हजार लोग बैठ सकेंगे।
ततुलसीमठ : धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मल्टीपरपज हॉल बनेगा। एक हजार दर्शक बैठ सकेंगे। साउंड और लाइट सिस्टम लगेगा। वैदिक लाइब्रेरी परिसर की शान बनेगी। इसमें 50 हजार से अधिक पुस्तकें रखने का इंतजाम होगाा। सौ से अधिक लोगों को एक संग पढ़ने और बैठने के लिए शानदार स्थान मिलेगा।
तपेश्वरनाथ : परिसर में बहुत सारी मठिया बनीं हैं। मुख्य मंदिर की आभा छिप जाती है। इसलिए मठिया शिफ्ट की जाएंगी। ऑडीटोरियम बनेगा। चार सौ लोग एक साथ बैठकर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम कर सकेंगे। भव्य प्रवेश द्वार भी बनेगा।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शासन मंदिर परिसरों में सुविधाओं को विस्तार दे रहा है। स्वागत द्वार और सत्संग भवनों के साथ वैदिक लाइब्रेरी बननी है। श्रद्धालुओं को पेयजल और शौचालय आदि सुविधा मिलेंगी। -बृजपाल सिंह, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो