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हवा में निलंबन, जांच भी हवा में
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Fri, 03 Jun 2016 01:15 AM IST
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मनरेगा के डेढ़ करोड़ के घपले में निलंबित पांचों पंचायत सचिवों को जिला पंचायतराज अधिकारी ने बहाल करने का आदेश जारी कर दिया। बहाली आदेश में आडिटरों की ओर से लगाए गए वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच जारी रहने की बात कही है लेकिन यह उल्लेख नहीं किया है कि जांच अधिकारी कौन होगा। जांच कितने दिन में पूरी करनी होगी, इस तरह की टिप्पणी न होने से जांच को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यह आदेश भी ब्लाकों पर नहीं भेजा गया है, इतना जरूर है कि इसकी कापी डीएम सहित कई अफसरों को जरूर भेज दी गई है। प्रशासनिक और विकास विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों के बीच दो दिन से चर्चा रही कि पांचों पंचायत सचिव रसूख वाले हैं। इनके खिलाफ कुछ होने वाला नहीं है। बृहस्पतिवार को बहाली आदेश जारी हुआ तो चर्चाएं सही साबित हुईं। डीपीआरओ दिनेश सिंह ने बताया कि निलंबित किए गए सचिवों की ओर से प्रत्यावेदन मिला था, उसी प्रत्यावेदन के आधार पर परीक्षण किया गया, जिसमें उनकी बहाली का निर्णय लिया गया है। आडिट में जिस तरह की आपत्तियां लगाईं गईं हैं, उनके आधार पर आरोपी सचिवों की जांच होगी लेकिन उनके स्तर से यह नहीं बताया गया है कि बहाल किए गए इन कर्मचारियों पर विस्तृत आरोप क्या क्या हैं और जांच कौन करेंगे।
रिछा। दमखोदा ब्लाक के कनमन गांव को पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा के 19 लाख 20 हजार रुपये विकास कार्यों पर खर्च करने के लिए मिले थे। इस राशि से विकास कार्य कराने की जिम्मेदारी पंचायत सचिव नजरुल हसन को सौंपी गई थी। यह गांव उन्हीं में से है, जिनके बारे में आडिट टीम ने घपला और वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप लगाते हुए जिला पंचायतराज अधिकारी को कार्रवाई के लिए चिट्ठी लिखी थी। इस गांव में पूर्व प्रधान के कार्यकाल में मनरेगा से 19.20 लाख रुपये से विकास कार्य कागजों में हो गए। हकीकत में इस गांव के अंदर न तो तालाब खुदे, न ही नाली खड़ंजा लगा है। न ही चकरोड बने हैं। पूर्व प्रधान तो किसी भी तरह की जानकारी देने से बचती रहीं। मौजूदा प्रधान ने साफ-साफ कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान इस गांव में मनरेगा से काम ही नहीं हुआ है।
पूर्व प्रधान ने धन का बंदरबांट कर सिर्फ कागजों में ही काम करा दिए जबकि वास्तव में मनरेगा के तहत इस राशि से काम नहीं हुआ है।
-शिवम शर्मा
गांव में करीब चार तालाब हैं। पूर्व प्रधान की ओर से न ही तालाबों का जीर्णोद्धार हुआ, न ही कच्चे रास्तों पर काम हुआ है। इसकी जांच होनी चाहिए।
-ढाकन लाल गंगवार
हमारे गांव में मनरेगा के धन का गोलमाल हुआ है, जांच होनी चाहिए। लोगों को भ्रम में रखकर विकास कार्य करना गलत है।
-वीरेंद्र पटेल
क्या काम हुए याद नहीं
हमारे गांव की छोड़ो। आप किसी अन्य गांव की खबर छाप दो। वैसे मुझे याद नहीं हैं गांव में क्या-क्या काम हुए। कागज देखकर बता पाऊंगी।
-सायरा बानो, पूर्व प्रधान
मनरेगा से काम होते नहीं देखा
पिछले सालों का रिकार्ड सचिव के पास है। मनरेगा से हमने कोई काम होते हुए नहीं देखा है। कागजों में काम हो गए होंगे। इस बारे मे अफ सरों को लिखा जाएगा।
-पदम लता, प्रधान
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रिछा। दमखोदा ब्लाक के कनमन गांव को पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा के 19 लाख 20 हजार रुपये विकास कार्यों पर खर्च करने के लिए मिले थे। इस राशि से विकास कार्य कराने की जिम्मेदारी पंचायत सचिव नजरुल हसन को सौंपी गई थी। यह गांव उन्हीं में से है, जिनके बारे में आडिट टीम ने घपला और वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप लगाते हुए जिला पंचायतराज अधिकारी को कार्रवाई के लिए चिट्ठी लिखी थी। इस गांव में पूर्व प्रधान के कार्यकाल में मनरेगा से 19.20 लाख रुपये से विकास कार्य कागजों में हो गए। हकीकत में इस गांव के अंदर न तो तालाब खुदे, न ही नाली खड़ंजा लगा है। न ही चकरोड बने हैं। पूर्व प्रधान तो किसी भी तरह की जानकारी देने से बचती रहीं। मौजूदा प्रधान ने साफ-साफ कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान इस गांव में मनरेगा से काम ही नहीं हुआ है।
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पूर्व प्रधान ने धन का बंदरबांट कर सिर्फ कागजों में ही काम करा दिए जबकि वास्तव में मनरेगा के तहत इस राशि से काम नहीं हुआ है।
-शिवम शर्मा
गांव में करीब चार तालाब हैं। पूर्व प्रधान की ओर से न ही तालाबों का जीर्णोद्धार हुआ, न ही कच्चे रास्तों पर काम हुआ है। इसकी जांच होनी चाहिए।
-ढाकन लाल गंगवार
हमारे गांव में मनरेगा के धन का गोलमाल हुआ है, जांच होनी चाहिए। लोगों को भ्रम में रखकर विकास कार्य करना गलत है।
-वीरेंद्र पटेल
क्या काम हुए याद नहीं
हमारे गांव की छोड़ो। आप किसी अन्य गांव की खबर छाप दो। वैसे मुझे याद नहीं हैं गांव में क्या-क्या काम हुए। कागज देखकर बता पाऊंगी।
-सायरा बानो, पूर्व प्रधान
मनरेगा से काम होते नहीं देखा
पिछले सालों का रिकार्ड सचिव के पास है। मनरेगा से हमने कोई काम होते हुए नहीं देखा है। कागजों में काम हो गए होंगे। इस बारे मे अफ सरों को लिखा जाएगा।
-पदम लता, प्रधान