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149 वर्षों बाद गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का दुर्लभ संयोग, दोपहर में बंद हो जाएंगे मंदिर के पट

Sun, 14 Jul 2019 05:07 AM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: Abhishek Singh Updated Sun, 14 Jul 2019 05:07 AM IST
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After 149 years chandra grahan will be on Guru Purnima
चंद्रग्रहण - फोटो : Social Media

16 जुलाई, गुरु पूर्णिमा पर एक बार फिर वैसे ही ग्रह और नक्षत्रों का संयोग बन रहा है जो 149 साल पहले बना था। सालों बाद ग्रह और नक्षत्रों के संयोग को ज्योतिषाचार्य विशेष मान रहे हैं। उन्होंने ग्रहों की स्थिति को तनाव बढ़ाने वाला और प्राकृतिक आपदाओं का कारक बताया है। खंडग्रास चंद्रग्रहण समेत चार विपरीत ग्रहों के मेल का प्रभाव जातकों की राशियों पर भी दिखाई देगा।

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ज्योतिषाचार्य पं. विकास उपाध्याय के मुताबिक 149 साल पहले 12 जुलाई 1870 को गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण साथ पड़े थे। उस समय चंद्रमा शनि, राहु और केतु के साथ धनु राशि में था। साथ ही सूर्य और राहु एक साथ मिथुन राशि में प्रवेश कर गए थे। इस बार भी 2019 में यह चंद्र ग्रहण आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा के दिन लगने जा रहा है।
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तीन साल की अवधि वाले चन्द्रग्रहण का विभिन्न राशियों के जातकों पर अच्छा तो किसी राशि पर मिश्रित प्रभाव पड़ेगा। गुरु पूर्णिमा पर शिष्यों को सूतककाल लगने से पहले ही गुरुओं की पूजा कर आशीर्वाद लेना शुभ होगा। बताया कि ग्रहण के बाद घर में गंगाजल का छिड़काव, देव प्रतिमाओं को स्नान, गर्भवती महिलाएं घर से बाहर निकलते समय चंदन और तुलसी के पत्तों का लेप लगाकर निकलें।
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चंद्रग्रहण पर ग्रह स्थिति

इस चंद्र ग्रहण के समय राहु और शनि चंद्रमा के साथ धनु राशि में स्थित रहेंगे। ग्रहों की ऐसी स्थिति होने के कारण ग्रहण काफी प्रभावकारी रहेगा। क्योंकि राहु और शुक्र सूर्य के साथ रहेंगे। साथ ही चार विपरीत ग्रह शुक्र, शनि, राहु और केतु के घेरे में सूर्य रहेगा। इस स्थिति में मंगल नीच का हो जाएगा। ग्रहण के समय ग्रहों की ये स्थिति तनाव बढ़ाने वाली साबित होगी। ऐसे में प्राकृतिक आपदाएं आने की आशंका रहेगी।

राशियों पर होगा प्रभाव

मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि पर चन्द्रग्रहण का सामान्य प्रभाव रहेगा। मिथुन, तुला, मकर और कुंभ राशि पर अशुभ प्रभाव और वृष, कर्क, धनु और कन्या पर चन्द्रग्रहण का मिला-जुला प्रभाव पड़ेगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक ग्रहणकाल में नकारात्मक और हानिकारक किरणों का प्रभाव रहता है। इसलिए सूतक को अशुभ मुहूर्त माना जाता है। इस दौरान शुभ कार्य किया जाना वर्जित होता है।


ग्रहण का मुहूर्त और सूतक

चंद्रग्रहण की पूरी अवधि कुल तीन घंटे की होगी, जो 16 जुलाई की रात 1.31 बजे से शुरू होकर 17 जुलाई की सुबह 4.31 बजे मोक्ष होगा। ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और धनु राशि में लगेगा। ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक चंद्र ग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले लगता है, जो 16 जुलाई की दोपहर 1.31 बजे से शुरू होकर 17 जुलाई की सुबह 4.31 बजे समाप्त होगी। सूतक काल में मंदिरों के पट बंद रहेंगे।

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