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शहर के भूमाफिया से प्रशासन था बेखबर
बरेली।
Updated Tue, 19 Dec 2017 01:28 AM IST
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अवैध्ा कब्जजे
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शासन को भेजी गई टॉप- 10 भूमाफिया की सूची को लेकर जिला प्रशासन अब खुद संतुष्ट नहीं है। अमर उजाला के शहर में नहरों और नदियों की जमीनों पर हुए अवैध कब्जों को नजरअंदाज किए जाने का मामला उठाए जाने के बाद अब इस मामले में नए सिरे से कार्रवाई शुरू हुई है। प्रशासन के अधिकारियों की निगाह शहर की उन कॉलोनियों और बारातघरों पर गई है जो नहरों-नदियों की जमीनों का अच्छा-खासा रकबा निगल चुकी हैं। डीएम ने सनसिटी, नार्थसिटी, ग्रीन पार्क समेत कई कॉलोनियों और बारातघरों पर जांच बैठा दी है। उन्होंने बीडीए और सिंचाई विभाग के अफसरों को रिकार्ड के साथ 20 दिसंबर को तलब किया है।
सीएम योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद शहर के भूमाफिया से बेखबर पुलिस-प्रशासन ने आनन-फानन में आंवला के रोहतापुर गांव के तीन भाई जरनैल सिंह, सतनाम सिंह, भगवान सिंह, शहर के सीबीगंज थाना इलाके के खलीलपुर में एक लाख रुपये की सरकारी भूमि केकब्जेदार जानकी प्रसाद, माधोबाड़ी हरिजन बस्ती में 74 गज के सरकारी क्वार्टर में रहने वाली राजो समेत दस लोगों को टॉप-10 की सूची में शामिल करके शासन को नाम भेज दिए थे। यह सच्चाई नजरअंदाज होकर रह गई कि शहर से गुजरने वाली सरकारी नहरों को ही कई कालोनियां और बारातघर निगल चुके हैं। बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा करके कालोनाइजरों ने अरबों रुपये कमाए हैं।
सिंचाई विभाग ने शहर में नदी और नहर की बेशकीमती जमीन पर कब्जा करने वाले 25 लोगों को चिह्नित भी कर रखा है। इसमें शहर के कई बड़े कॉलोनाइजरों के नाम भी हैं। डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने लखनऊ से लौैटने के बाद सोमवार को सिंचाई विभाग अधिकारियों को कैंप कार्यालय पर बुलाकर उनसे नदी और नहर की जमीन पर बनी कालोनियों के बारे में जानकारी लेकर शासन को भेजी टॉप-10 भूमाफिया की सूची पर नाराजगी जताई। साथ ही बीडीए उपाध्यक्ष को पत्र जारी करके अरविंदर सिंह की सनसिटी, चरनपाल सिंह की ग्रीन पार्क और नार्थ सिटी कॉलोनियों के ले आउट और स्पर्श लॉन, स्वर्ण फार्म, कुर्मांचल नगर के अलावा इज्जनगर माइनर नहर की जमीन पर कब्जा करके प्राइवेट लोगों द्वारा बनाए गए मकानों के नक्शों के साथ 20 दिसंबर को बुलाया है। डीएम ने बीडीए को लिखे पत्र में ही सवाल खड़ा किया है कि ले आउट पास करते समय नहर की भूमि का ध्यान रखा गया था या नहीं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भी डीएम ने नहर के कब्जेदारों का रिकार्ड लेकर बैठक में आने के निर्देश दिए हैं।
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कब्जा हटाकर सड़क बनाएंगे
डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि नदी और नहर की जमीन पर कब्जा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने खुद मौके पर जाकर नहर के कब्जे देखे हैं। नहर की जमीन से कब्जा हटवाने के बाद खाली जमीन पर सड़क बनवाई जाएगी। यहां ड्रेनेज सिस्टम लगाने का काम कराया जाएगा, जो कब्जेदार खाली नहीं करेंगे, उनसे पेनाल्टी वसूल की जाएगी।
श्रम न्यायालयों से वापस आएंगे मुकदमे
डीएम ने बताया कि पीपी एक्ट के मुकदमे अपर जिलाधिकारियों के न्यायालय में सुने जाते हैं। वादियों के अधिवक्ताओं ने कोई ऐसी रूलिंग दिखा दी, जिसके आधार पर मुकदमे श्रम न्यायालय में भेज दिए गए। इन मुकदमों में एक साल में कोई तारीख ही नहीं लगी है। उन्होंने बताया कि जल्द ही नहर और नदी से संबंधित सभी वादों को वापस लेकर एडीएम न्यायालयों में फिर से शुरू कराया जाएगा।
सीएम योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद शहर के भूमाफिया से बेखबर पुलिस-प्रशासन ने आनन-फानन में आंवला के रोहतापुर गांव के तीन भाई जरनैल सिंह, सतनाम सिंह, भगवान सिंह, शहर के सीबीगंज थाना इलाके के खलीलपुर में एक लाख रुपये की सरकारी भूमि केकब्जेदार जानकी प्रसाद, माधोबाड़ी हरिजन बस्ती में 74 गज के सरकारी क्वार्टर में रहने वाली राजो समेत दस लोगों को टॉप-10 की सूची में शामिल करके शासन को नाम भेज दिए थे। यह सच्चाई नजरअंदाज होकर रह गई कि शहर से गुजरने वाली सरकारी नहरों को ही कई कालोनियां और बारातघर निगल चुके हैं। बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा करके कालोनाइजरों ने अरबों रुपये कमाए हैं।
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सिंचाई विभाग ने शहर में नदी और नहर की बेशकीमती जमीन पर कब्जा करने वाले 25 लोगों को चिह्नित भी कर रखा है। इसमें शहर के कई बड़े कॉलोनाइजरों के नाम भी हैं। डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने लखनऊ से लौैटने के बाद सोमवार को सिंचाई विभाग अधिकारियों को कैंप कार्यालय पर बुलाकर उनसे नदी और नहर की जमीन पर बनी कालोनियों के बारे में जानकारी लेकर शासन को भेजी टॉप-10 भूमाफिया की सूची पर नाराजगी जताई। साथ ही बीडीए उपाध्यक्ष को पत्र जारी करके अरविंदर सिंह की सनसिटी, चरनपाल सिंह की ग्रीन पार्क और नार्थ सिटी कॉलोनियों के ले आउट और स्पर्श लॉन, स्वर्ण फार्म, कुर्मांचल नगर के अलावा इज्जनगर माइनर नहर की जमीन पर कब्जा करके प्राइवेट लोगों द्वारा बनाए गए मकानों के नक्शों के साथ 20 दिसंबर को बुलाया है। डीएम ने बीडीए को लिखे पत्र में ही सवाल खड़ा किया है कि ले आउट पास करते समय नहर की भूमि का ध्यान रखा गया था या नहीं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भी डीएम ने नहर के कब्जेदारों का रिकार्ड लेकर बैठक में आने के निर्देश दिए हैं।
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कब्जा हटाकर सड़क बनाएंगे
डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि नदी और नहर की जमीन पर कब्जा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने खुद मौके पर जाकर नहर के कब्जे देखे हैं। नहर की जमीन से कब्जा हटवाने के बाद खाली जमीन पर सड़क बनवाई जाएगी। यहां ड्रेनेज सिस्टम लगाने का काम कराया जाएगा, जो कब्जेदार खाली नहीं करेंगे, उनसे पेनाल्टी वसूल की जाएगी।
श्रम न्यायालयों से वापस आएंगे मुकदमे
डीएम ने बताया कि पीपी एक्ट के मुकदमे अपर जिलाधिकारियों के न्यायालय में सुने जाते हैं। वादियों के अधिवक्ताओं ने कोई ऐसी रूलिंग दिखा दी, जिसके आधार पर मुकदमे श्रम न्यायालय में भेज दिए गए। इन मुकदमों में एक साल में कोई तारीख ही नहीं लगी है। उन्होंने बताया कि जल्द ही नहर और नदी से संबंधित सभी वादों को वापस लेकर एडीएम न्यायालयों में फिर से शुरू कराया जाएगा।