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Bareilly News: लूट की फर्जी कहानी बनाने में होगी कार्रवाई, विधिक राय मांगी
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बरेली। प्रेमनगर थाना क्षेत्र की बीडीए कॉलोनी में वृद्धा ने लूट की फर्जी कहानी रचकर पुलिस को छकाया था। जेवर और नकदी अपनी बेटी व उसके साथी को दे दी थी। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई को लेकर विधिक राय मांगी है।
पांच दिन पहले बीडीए कॉलोनी निवासी रिटायर्ड बैंक मैनेजर राजेश्वर दयाल सिंह ने लूट की रिपोर्ट लिखाई थी। जांच में पता लगा कि उनकी पत्नी माया देवी ने ही पूरा ड्रामा रचा था। इसके बाद पुलिस ने राहत की सांस ली पर आगे की कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। प्रेमनगर इंस्पेक्टर राजेश सिंह ने बताया कि पुलिस मुकदमा निरस्त कर 182 की कार्रवाई कर सकती है। इसके अलावा विवेचना के आधार पर चालान भी किया जा सकता है। इसके लिए विधिक राय ली जा रही है।
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फोटो
विवेचक के पास सब विकल्प खुले : मिलन गुप्ता
फौजदारी मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता मिलन गुप्ता का कहना है कि विवेचक के पास सभी विकल्प खुले हैं। वह मुकदमा निरस्त होने की स्थिति में कोर्ट को धारा 182 की रिपोर्ट भेज सकते हैं, जिसमें वादी को छह माह की सजा और एक हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है। हालांकि इस मामले में वादी के घटना से अनभिज्ञ होने पर पुलिस ऐसा करने से बचेगी। इसके अलावा पुलिस विवेचना को जारी रखकर 120बी के तहत साजिश रचने वालों के नाम खोल सकती है। वृद्धा के साथ ही उनकी बेटी और सहयोगी भी साक्ष्य के आधार पर आरोपी बन सकते हैं। इन पर संबंधित धारा में कार्रवाई हो सकती है।
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पांच दिन पहले बीडीए कॉलोनी निवासी रिटायर्ड बैंक मैनेजर राजेश्वर दयाल सिंह ने लूट की रिपोर्ट लिखाई थी। जांच में पता लगा कि उनकी पत्नी माया देवी ने ही पूरा ड्रामा रचा था। इसके बाद पुलिस ने राहत की सांस ली पर आगे की कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। प्रेमनगर इंस्पेक्टर राजेश सिंह ने बताया कि पुलिस मुकदमा निरस्त कर 182 की कार्रवाई कर सकती है। इसके अलावा विवेचना के आधार पर चालान भी किया जा सकता है। इसके लिए विधिक राय ली जा रही है।
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विवेचक के पास सब विकल्प खुले : मिलन गुप्ता
फौजदारी मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता मिलन गुप्ता का कहना है कि विवेचक के पास सभी विकल्प खुले हैं। वह मुकदमा निरस्त होने की स्थिति में कोर्ट को धारा 182 की रिपोर्ट भेज सकते हैं, जिसमें वादी को छह माह की सजा और एक हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है। हालांकि इस मामले में वादी के घटना से अनभिज्ञ होने पर पुलिस ऐसा करने से बचेगी। इसके अलावा पुलिस विवेचना को जारी रखकर 120बी के तहत साजिश रचने वालों के नाम खोल सकती है। वृद्धा के साथ ही उनकी बेटी और सहयोगी भी साक्ष्य के आधार पर आरोपी बन सकते हैं। इन पर संबंधित धारा में कार्रवाई हो सकती है।
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