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बीएसएनएल के बैंक खाते सीज
बरेली
Updated Tue, 10 Feb 2015 12:48 AM IST
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बताया जाता है कि बीएसएनएल का सिविल विंग ठेकेदारी कराता है। नियमानुसार ठेकेदार से श्रमिकाें का ईपीएफ अंश वसूल करना चाहिए। ऐसा न होने की शिकायत पर इसकी जांच वर्ष 2008-09 में भविष्य निधि संगठन ने कराई थी। जांच में मिले अभिलेखाें के अनुसार ईपीएफ विभाग ने अप्रैल 2003 से जून 2010 तक का राजस्व निर्धारण कर दिया। इसके तहत बीएसएनएल से 5.30 करोड़ रुपया ईपीएफ खाते में जमा करने को कहा गया। ईपीएफ कार्यालय ने कई बार डिमांड नोटिस भी भेजे, जिनका निस्तारण बीएसएनएल नहीं कर पाया। इसलिए ईपीएफ क्षेत्रीय आयुक्त आलोक यादव ने बीएसएनएल बैंक खाते सीज करने के आदेश दे दिए।
बीएसएनएल खाते पंजाब नेशनल बैंक में संचालित हैं। खाते सीज होने से करोड़ों का लेनदेन प्रभावित हो गया है। बताया जाता है कि बीएसएनएल में हर रोज 5 से 6 करोड़ रुपये का आदान-प्रदान होता है। खाते सीज होने से विभागीय काम काज अस्त व्यस्त है। तमाम लोगाें के जरूरी भुगतान भी नहीं हो पा रहे हैं। विभाग ने जो भुगतान चेक जारी किए है वे भी बैंक में फंस गए हैं। विभाग को आशंका है कि कहीं कोई पार्टी चेक बाउंस होने पर कानूनी कार्रवाई न कर दे।
अपील दायर
बीएसएनएल ने खाता सीज होने पर ईपीएफ क्षेत्रीय आयुक्त से गुहार लगाई थी जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद जीएम मणिराम ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अपीलीय अधिकरण में अपना पक्ष रखा है। अब ट्रिब्यूनल से फैसला होने पर ही खाते शुरू हो पाएंगे। बताया जाता है कि सप्ताह भर में ट्रिब्यूनल कुछ न कुछ फैसला दे देगा।
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‘ईपीएफ विभाग ने जीएम बीएसएनएल नाम से संचालित खाते सीज किए हैं जो कि अनुचित है। क्याेंकि जीएम बीएसएनएल पर ईपीएफ की कोई बकाएदारी नहीं है और न ही इस कार्यालय की ओर से ठेकेदारी कराई जाती है। मामला सिविल विंग से जुड़ा हुआ है किसी भ्रमवश ही खाते सीज किए गए हैं।’
मणिराम, जीएम, बीएसएनएल
‘हमारे यहां बीएसएनएल कंपनी पंजीकृत है। ईपीएफ प्रवर्तन सेक्शन ने सही कार्रवाई की है क्याेंकि विभाग ने ठेकेदारी से करोड़ों के काम कराए हैं लेकिन ईपीएफ राशि जमा नहीं कराई। इसलिए इस पर पेनाल्टी की गई है।’
आलोक यादव, क्षेत्रीय आयुक्त, ईपीएफ
रबर फैक्ट्री प्रबंधन ने जमा नहीं किया ईपीएफ ब्योरा
बरेली। रबर फैक्ट्री प्रबंधन ने अप्रैल से अक्तूबर वर्ष 1998 तक की ईपीएफ धनराशि 49 लाख रुपये जमा कराए हैं लेकिन उसका ब्योरा और रिटर्न आज तक नहीं भरा जिससे संबंधित कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रभावित 1500 से अधिक कर्मचारियाें ने इस मनमानी के खिलाफ गुहार लगाई। इस मामले में फैक्ट्री मालिक अजय किलाचंद को कई बार नोटिस जारी किए गए। इसके बावजूद ब्योरा नहीं उपलब्ध हुआ। क्षेत्रीय आयुक्त आलोक यादव ने सोमवार को फैक्ट्री प्रबंधन और मालिक के खिलाफ अभियोजन स्वीकृत कर दिया। इसके तहत अब मामला सीजेएम न्यायालय पहुंच गया है।
बीएसएनएल खाते पंजाब नेशनल बैंक में संचालित हैं। खाते सीज होने से करोड़ों का लेनदेन प्रभावित हो गया है। बताया जाता है कि बीएसएनएल में हर रोज 5 से 6 करोड़ रुपये का आदान-प्रदान होता है। खाते सीज होने से विभागीय काम काज अस्त व्यस्त है। तमाम लोगाें के जरूरी भुगतान भी नहीं हो पा रहे हैं। विभाग ने जो भुगतान चेक जारी किए है वे भी बैंक में फंस गए हैं। विभाग को आशंका है कि कहीं कोई पार्टी चेक बाउंस होने पर कानूनी कार्रवाई न कर दे।
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अपील दायर
बीएसएनएल ने खाता सीज होने पर ईपीएफ क्षेत्रीय आयुक्त से गुहार लगाई थी जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद जीएम मणिराम ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अपीलीय अधिकरण में अपना पक्ष रखा है। अब ट्रिब्यूनल से फैसला होने पर ही खाते शुरू हो पाएंगे। बताया जाता है कि सप्ताह भर में ट्रिब्यूनल कुछ न कुछ फैसला दे देगा।
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‘ईपीएफ विभाग ने जीएम बीएसएनएल नाम से संचालित खाते सीज किए हैं जो कि अनुचित है। क्याेंकि जीएम बीएसएनएल पर ईपीएफ की कोई बकाएदारी नहीं है और न ही इस कार्यालय की ओर से ठेकेदारी कराई जाती है। मामला सिविल विंग से जुड़ा हुआ है किसी भ्रमवश ही खाते सीज किए गए हैं।’
मणिराम, जीएम, बीएसएनएल
‘हमारे यहां बीएसएनएल कंपनी पंजीकृत है। ईपीएफ प्रवर्तन सेक्शन ने सही कार्रवाई की है क्याेंकि विभाग ने ठेकेदारी से करोड़ों के काम कराए हैं लेकिन ईपीएफ राशि जमा नहीं कराई। इसलिए इस पर पेनाल्टी की गई है।’
आलोक यादव, क्षेत्रीय आयुक्त, ईपीएफ
रबर फैक्ट्री प्रबंधन ने जमा नहीं किया ईपीएफ ब्योरा
बरेली। रबर फैक्ट्री प्रबंधन ने अप्रैल से अक्तूबर वर्ष 1998 तक की ईपीएफ धनराशि 49 लाख रुपये जमा कराए हैं लेकिन उसका ब्योरा और रिटर्न आज तक नहीं भरा जिससे संबंधित कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रभावित 1500 से अधिक कर्मचारियाें ने इस मनमानी के खिलाफ गुहार लगाई। इस मामले में फैक्ट्री मालिक अजय किलाचंद को कई बार नोटिस जारी किए गए। इसके बावजूद ब्योरा नहीं उपलब्ध हुआ। क्षेत्रीय आयुक्त आलोक यादव ने सोमवार को फैक्ट्री प्रबंधन और मालिक के खिलाफ अभियोजन स्वीकृत कर दिया। इसके तहत अब मामला सीजेएम न्यायालय पहुंच गया है।