फर्जी डिग्री केस: 25 हजार रुपये का इनामी विजय शर्मा गिरफ्तार, छात्रों से 3.69 करोड़ की धोखाधड़ी करने का आरोप
बरेली में डीफार्मा के छात्रों को फर्जी डिग्री बांटकर 3.69 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। इस प्रकरण में खुसरो कॉलेज के चेयरमैन शेर अली जाफरी और उसके बेटे फिरोज को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। खुसरो कॉलेज का प्राचार्य रहा विजय शर्मा फरार था। पुलिस ने बुधवार को उसे भी गिरफ्तार कर लिया।
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बरेली में छात्रों को डीफार्मा की फर्जी डिग्री बांटने के आरोपी और 25 हजार के इनामी विजय शर्मा को बुधवार को एसआईटी और एसओजी ने झुमका तिराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट में पेश कर उसे जेल भेज दिया गया। खुसरो कॉलेज के चेयरमैन शेर अली जाफरी, उसके बेटे फिरोज अली और विजय शर्मा पर 379 विद्यार्थियों को फर्जी डिग्री बांटकर 3.69 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।
एसआईटी प्रभारी मानुष पारीक ने बताया कि विजय शर्मा, जाफरी व उसके साथियों ने गिरोह बना रखा था। ये सभी मिलकर जाफरी की प्रिंटिंग प्रेस में फर्जी डिग्री छापकर बेरोजगारों को थमा रहे थे। जब छात्रों ने नौकरी के लिए आवेदन किया तो फर्जीवाड़े का पता चला। ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, मदरहुड विश्वविद्यालय रुड़की व छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के नाम से फर्जी डिग्री बांटी थी। छात्रों से करोड़ों रुपये लेकर तीनों ने संपत्ति में निवेश कर दिया।
एसएसपी ने घोषित किया था इनाम
एसआईटी पहले ही शेर अली जाफरी और उसके बेटे फिरोज अली जाफरी को जेल भेज चुकी है। विजय फरार चल रहा था। एसएसपी अनुराग आर्य ने उसके ऊपर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। बुधवार को विजय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पूछताछ में विजय ने स्वीकार किया कि जाफरी के साथ मिलकर उसने फर्जी डिग्री बनाकर छात्रों को दी थी।
एसआईटी प्रभारी एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि विजय शर्मा ने फर्जी डिग्री लेकर खुद को डॉक्टर घोषित कर रखा था। प्रसिद्ध विवि व कॉलेजों के नाम से फर्जी डिग्रियां बांटता था। गिरोह के दो सदस्य पहले जेल भेजे जा चुके हैं। अब विजय को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। अन्य लोगों को चिह्नित किया जा रहा है। आरोपियों की संपत्ति व खातों की पड़ताल की जा रही है। उन पर गैंगस्टर की कार्रवाई भी की जाएगी।
सुभाषनगर थाना क्षेत्र के शांति विहार का रहने वाला विजय शर्मा खुसरो कॉलेज के चेयरमैन शेर अली जाफरी के संपर्क में आने के बाद फर्श से अर्श तक पहुंच गया था। उसे बचपन से ही डॉक्टर बनने का शौक था। उसने डॉक्टर की फर्जी डिग्री ली थी। विजय ने कुछ साल पहले खुद को डॉक्टर घोषित कर दिया था। आयुर्वेद व नेचुरोपैथी की डिग्री लेने का दावा करते हुए घर के पास ही माता-पिता के नाम पर जावेश्वरी-नरेश चैरिटेबल अस्पताल भी खोल लिया था।