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अंधेरे में डरावनी लगती थीं रातें

Mon, 24 Jun 2013 05:30 AM IST
Bareilly
Bareilly Updated Mon, 24 Jun 2013 05:30 AM IST
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बरेली। बद्रीनाथ में पांच दिन तक फंसे रहने के बाद सीए संजय कुमार और परिवार के कुछ अन्य लोग रविवार को अपने घर पहुंचे। पत्नी व माता-पिता समेत चार लोग एक दिन पहले ही आ गए थे। संजय के मुताबिक उनके तीन दिन और रात हेलीकाप्टर के इंतजार में बीते। आसमान से आवाज आते ही सब हेलीपैड पर पहुंच जाते थे, मगर बार-बार निराशा ही हाथ लगती थी। संजय परिवार के 13 लोगों के साथ बद्रीनाथ गए थे और वहां 16 जून को मची तबाही में फंस गए। उसी रात पहाड़ खिसकने शुरू हुए और रास्ते बंद हो गए। रास्ते में कई जगह सड़क भी बह गई। फोन बंद हो गए और लाइट भी गुल हो गई। एक धर्मशाला में रातें काटने की व्यवस्था हो गई, मगर दिन बाहर कड़ी धूप में ही गुजरे। सबसे पहले किसी वीआईपी का एक हेलीकाप्टर आया और उसे लेकर चला गया। इसी दिन सेना का भी एक हेलीकाप्टर पहुंचा, मगर उससे पांच-छह लोग ही जा पाए। वहां मौजूद कैप्टन लोकेश कुमार और प्रतीक हाथ जोड़कर लोगों से संयमित रहने और पहले बीमार, बूढ़े और बच्चों को भेजने की प्रार्थना करते रहे। 20 जून से हेलीकाप्टर ने लोगों को निकालना शुरू किया, मगर पहले दिन 50-60 लोग ही ले जाए जा सके। बाद में एक चापर पहुंचा, जिससे 40 लोगों के ले जाने की व्यवस्था थी। अब तक वहां से बमुश्किल हजार लोग ही निकाले गए हैं और करीब आठ-नौ हजार लोग फंसे हैं।
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