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डीजल की थोक और खुदरा कीमतों में 11 रुपये का फर्क
Bareilly
Updated Mon, 21 Jan 2013 05:32 AM IST
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बरेली। पेट्रोलियम कंपनियों ने शनिवार से थोक बाजार में नॉन सब्सिडी डीजल की सप्लाई शुरू कर दी। रेलवे और सेना के अलावा विमको, कैम्फर, भेल समेत सभी थोक ग्राहकों ने लगभग 11 रुपया महंगा डीजल खरीदा। एक साथ बीस प्रतिशत दरें बढ़ने से सभी प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठान, रेलवे और रोडवेज अफसर चिंतित हैं। उनका कहना है कि अनापशनाप दरें बढ़ी हैं। रोडवेज और रेलवे जल्द किराया बढ़ाने की तैयारी करने करने लगे हैं। इसके साथ सार्वजनिक कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर संकट के आसार बनने लगे हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने गुरुवार को डीजल से धीरे-धीरे सब्सिडी वापस लेने की कवायद शुरू कर दी थी। इसके तहत ही थोक ग्राहकों को नॉन सब्सिडी सप्लाई डीजल देने का फैसला हुआ। शुक्रवार को अवकाश था, इसलिए तीनों सार्वजनिक पेट्रोलियम कंपनियों ने शनिवार से नई दरों पर सप्लाई शुरू की। पहले दिन ही रोडवेज रोडवेज को लगभग पचास लाख रुपये की चपत लगी।
यूपी रोडवेज अभी तक डीजल 49.11 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रहा था, लेकिन शनिवार से उसे 60.37 रुपये प्रति लीटर की दर से सप्लाई मिली। इस तरह प्रदेश स्तर पर पहले दिन ही लगभग एक करोड़ रुपये की चपत लगी है। कत्था फैक्ट्री भी थोक ग्राहक है। उसके अध्यक्ष केके दमानी कहते हैं कि केंद्र सरकार उद्योगों को डुबाने में लगी है।
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निजी पेट्रोलियम कंपनियों की बल्ले-बल्ले
निजी पेट्रोलियम कंपनियां खुश हैं, जबकि सार्वजनिक पेट्रोलियम कंपनियां परेशान। सार्वजनिक पेट्रोलियम कंपनी आफिसर एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार रिलायंस जैसे बड़े घरानों के हाथों बिक गयी है। पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि इसी वर्ष डीजल नियंत्रण मुक्त होना तय है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर संकट आ जाएगा, क्योंकि निजी कंपनियों के सामने टिकना मुश्किल होगा। एस्सार ने जब समानांतर बाजार में कदम रखा तो 50 पैसे प्रति लीटर डीजल सस्ता बेचना शुरू किया था और रिलायंस ने सुपर एलडीओ को डीजल बनाकर बेचा था। गुप्ता ने बताया कि इस फैसले से सभी सरकारी पंप कारोबार ठप हो जाएगा। कारोबार शुरू होते ही एस्सार सस्ता डीजल उपलब्ध कराएगा।
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फिर खुलेंगे रिलायंस-एस्सार के पंप
डीजल नियंत्रण मुक्त करने की तैयारी से साफ हो गया है कि अब रिलायंस और एस्सार के पंप फिर से चालू होंगे। बरेली में नौ एस्सार और तीन रिलायंस पंप पांच वर्ष से बंद हैं। इसकी वजह सरकार का सस्ता डीजल और पेट्रोल बेचना है। इसलिए दोनों निजी कंपनियों ने कारोबार बंद कर दिया था। एस्सार रिटेल प्रमुख कमल कुमार माथुर ने डीजल से सब्सिडी वापस करने के फैसले का स्वागत किया है। माथुर ने बताया कि ऐसा पहले से ही होना चाहिए था।
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और ज्यादा ब्लैक होगा केरोसिन
थोक बाजार में डीजल महंगा होने से आम लोगों को केरोसिन मिलना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि केरोसिन में डीजल मिलाकर अवैध रूप से बेचा जाता है। कोटे की दुकानों पर ही मिलने वाले केरोसिन की कीमत 14.65 रुपये प्रति लीटर है। इस तरह डीजल और केरोसिन के बीच चार गुना से ज्यादा अंतर हो गया है। पेट्रोलियम डीलर्स एसोसियेशन महामंत्री विनय गुप्ता का मानना है कि थोक और खुदरा डीजल मू्ल्य में 11 रुपये से से ज्यादा फर्क होने से कालाबाजारी होना तय है।
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बाहरी पंप से डीजल ले रही हैं रोडवेज बसें
केंद्र सरकार के आदेश की उड़ी धज्जियां
सिटी रिपोर्टर
बरेली। केंद्र सरकार के आदेश को नजरअंदाज कर यूपी रोडवेज वाले बाहरी पंप से डीजल खरीद रहे हैं। ऐसा डीजल के दामों में अंतर की वजह से किया जा रहा है।
दो दिन पहले डीजल के दामों में 50 पैसे बढ़े हैं। केंद्र सरकार के आदेशानुसार डीजल पर हर महीने 50 पैसे बढ़ाए जाएंगे। बड़े उपभोक्ता रेलवे, रोडवेज, सेना और विद्युत संयंत्रों के लिए सब्सिडी पूरी तरह खत्म भी कर दी गई है। इन संस्थानों को आम उपभोक्ताओं से 11.26 रुपये महंगा डीजल खरीदना पड़ रहा है। इसी वजह से रोडवेज अफसरों ने बसों के लिए डीजल बाहरी पंपों से लेना शुरू कर दिया। यहां शनिवार और रविवार को रोडवेज की बसों ने आईओसी के पंप से खरीदा। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक नीरज अग्रवाल ने बताया कि निगम के हितों को देखते हुए नियमानुसार डीजल की खरीददारी की जा रही है।
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पेट्रोलियम मंत्रालय ने गुरुवार को डीजल से धीरे-धीरे सब्सिडी वापस लेने की कवायद शुरू कर दी थी। इसके तहत ही थोक ग्राहकों को नॉन सब्सिडी सप्लाई डीजल देने का फैसला हुआ। शुक्रवार को अवकाश था, इसलिए तीनों सार्वजनिक पेट्रोलियम कंपनियों ने शनिवार से नई दरों पर सप्लाई शुरू की। पहले दिन ही रोडवेज रोडवेज को लगभग पचास लाख रुपये की चपत लगी।
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यूपी रोडवेज अभी तक डीजल 49.11 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रहा था, लेकिन शनिवार से उसे 60.37 रुपये प्रति लीटर की दर से सप्लाई मिली। इस तरह प्रदेश स्तर पर पहले दिन ही लगभग एक करोड़ रुपये की चपत लगी है। कत्था फैक्ट्री भी थोक ग्राहक है। उसके अध्यक्ष केके दमानी कहते हैं कि केंद्र सरकार उद्योगों को डुबाने में लगी है।
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निजी पेट्रोलियम कंपनियों की बल्ले-बल्ले
निजी पेट्रोलियम कंपनियां खुश हैं, जबकि सार्वजनिक पेट्रोलियम कंपनियां परेशान। सार्वजनिक पेट्रोलियम कंपनी आफिसर एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार रिलायंस जैसे बड़े घरानों के हाथों बिक गयी है। पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि इसी वर्ष डीजल नियंत्रण मुक्त होना तय है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर संकट आ जाएगा, क्योंकि निजी कंपनियों के सामने टिकना मुश्किल होगा। एस्सार ने जब समानांतर बाजार में कदम रखा तो 50 पैसे प्रति लीटर डीजल सस्ता बेचना शुरू किया था और रिलायंस ने सुपर एलडीओ को डीजल बनाकर बेचा था। गुप्ता ने बताया कि इस फैसले से सभी सरकारी पंप कारोबार ठप हो जाएगा। कारोबार शुरू होते ही एस्सार सस्ता डीजल उपलब्ध कराएगा।
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फिर खुलेंगे रिलायंस-एस्सार के पंप
डीजल नियंत्रण मुक्त करने की तैयारी से साफ हो गया है कि अब रिलायंस और एस्सार के पंप फिर से चालू होंगे। बरेली में नौ एस्सार और तीन रिलायंस पंप पांच वर्ष से बंद हैं। इसकी वजह सरकार का सस्ता डीजल और पेट्रोल बेचना है। इसलिए दोनों निजी कंपनियों ने कारोबार बंद कर दिया था। एस्सार रिटेल प्रमुख कमल कुमार माथुर ने डीजल से सब्सिडी वापस करने के फैसले का स्वागत किया है। माथुर ने बताया कि ऐसा पहले से ही होना चाहिए था।
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और ज्यादा ब्लैक होगा केरोसिन
थोक बाजार में डीजल महंगा होने से आम लोगों को केरोसिन मिलना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि केरोसिन में डीजल मिलाकर अवैध रूप से बेचा जाता है। कोटे की दुकानों पर ही मिलने वाले केरोसिन की कीमत 14.65 रुपये प्रति लीटर है। इस तरह डीजल और केरोसिन के बीच चार गुना से ज्यादा अंतर हो गया है। पेट्रोलियम डीलर्स एसोसियेशन महामंत्री विनय गुप्ता का मानना है कि थोक और खुदरा डीजल मू्ल्य में 11 रुपये से से ज्यादा फर्क होने से कालाबाजारी होना तय है।
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बाहरी पंप से डीजल ले रही हैं रोडवेज बसें
केंद्र सरकार के आदेश की उड़ी धज्जियां
सिटी रिपोर्टर
बरेली। केंद्र सरकार के आदेश को नजरअंदाज कर यूपी रोडवेज वाले बाहरी पंप से डीजल खरीद रहे हैं। ऐसा डीजल के दामों में अंतर की वजह से किया जा रहा है।
दो दिन पहले डीजल के दामों में 50 पैसे बढ़े हैं। केंद्र सरकार के आदेशानुसार डीजल पर हर महीने 50 पैसे बढ़ाए जाएंगे। बड़े उपभोक्ता रेलवे, रोडवेज, सेना और विद्युत संयंत्रों के लिए सब्सिडी पूरी तरह खत्म भी कर दी गई है। इन संस्थानों को आम उपभोक्ताओं से 11.26 रुपये महंगा डीजल खरीदना पड़ रहा है। इसी वजह से रोडवेज अफसरों ने बसों के लिए डीजल बाहरी पंपों से लेना शुरू कर दिया। यहां शनिवार और रविवार को रोडवेज की बसों ने आईओसी के पंप से खरीदा। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक नीरज अग्रवाल ने बताया कि निगम के हितों को देखते हुए नियमानुसार डीजल की खरीददारी की जा रही है।