गंगापुर में दुकान नहीं खोलता कोटेदार

Bareilly Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
बरेली। गंगापुर में कोटे की दुकान चेक करने पूर्ति विभाग की टीम पहुंची। उन्होंने रिकॉर्ड खंगाला और मोहल्ले के लोगों के बयान भी लिए। सभी का कहना था कि कोटेदार कभी समय पर दुकान नहीं खोलता। अलबत्ता टीम के सदस्य यहां मिट्टी का तेल बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा सके। उनका कहना था कि बिना पुलिस की मदद के यह काम नहीं हो सकता।
बुधवार को ही अमर उजाला ने कोटे का तेल से ट्रक चलने की खबर प्रकाशित की थी। यह तेल गंगापुर से ड्रमों में भरकर भेजा जाता है। दोपहर बाद पूर्ति विभाग की टीम कोटेदार के यहां पहुंची। रिकॉर्ड चेक किया। आसपास के लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि कभी भी दुकान समय से नहीं खुलती। ज्यादातर लोगों ने कहा कि शाम को जब उनका घर पर आने का समय होता है, ठीक उसी समय दुकान बंद की जाती है। बुधवार को भी गंगापुर में कई दुकानदारों ने अवैध रूप से तेल बेचने का सिलसिला जारी रखा। इस बारे में पूर्ति विभाग के अफसरों का कहना है कि वहां कार्रवाई करने पर लोग हमला बोल देते हैं। इसलिए पुलिस और प्रशासन के सहयोग के बिना इन दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकती। शाहजहांपुर रोड पर जरूर बुधवार को ट्रकों में तेल नहीं भरा गया। पकड़े जाने के डर से यहां आपूर्ति नहीं की गई।
डीएसओ केबी सिंह ने बताया कि बयान राशन कार्ड धारकों के बयान बृहस्पतिवार को भी दर्ज किए जाएंगे। ऐसा करने वाले कोटेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुभाषनगर में भी नहीं बांटा जाता राशन-तेल
सुभाषनगर के लोगों ने भी राशन-तेल बांटने में गड़बड़ किए जाने की बात कही। इस मोहल्ले के देवेंद्र कुमार कहते हैं कि कोटेदार दो या तीन महीने में एक बार ही राशन और तेल देता है। बग्गा कॉलोनी और नाले के किनारे गरीब लोग रहते हैं। सभी के पास राशन कार्ड हैं, लेकिन तेल और राशन उन्हें सिर्फ कोटेदार के रिकॉर्ड में ही मिलता है। खन्ना बिल्डिंग के पास रहने वाले विनोद कुमार और दमयंती देवी का भी यही कहना था। उन्होंने बताया कि कई बार सभासद से भी कह चुके हैं। लेकिन कोई कुछ नहीं करता। यही वजह है कि अब ज्यादातर लोगों ने कोटे की दुकानों पर जाना ही छोड़ दिया है।


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ट्रकों के फ्यूल इंजेक्टर पंप के लिए ‘जहर’ है केरोसिन
बरेली। मिट्टी का तेल मिक्स करके डीजल गाड़ियां चलाने से कुछ ही महीनों में उनका फ्यूल इंजेक्टर पंप खराब हो जाता है। इसकी कीमत साठ हजार रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक है। गाड़ियों के साइज के हिसाब से इसका साइज भी बदलता है।
फ्यूल टैंक में दो सौ लीटर केरोसिन में सौ लीटर डीजल और पांच लीटर मोबिल ऑयल मिलाकर ट्रकों को सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ाया जा रहा है। ऑटो मोबाइल इंजीनियर अतुल मिश्रा के मुताबिक, फ्यूल इंजेक्टर पंप डीजल के हिसाब से डिजाइन किया जाता है। इंजन में तेल इसी पंप के मार्फत जाता है। मिट्टी का तेल फ्यूल इंजेक्टर पंप के लिए किसी जहर से कम नहीं है। इंजीनियर अशोक प्रान का कहना है कि दो-चार महीने में ही इंजन में खराबी दिखने लगती है। वहीं ट्रक चलाने वाले मो. मोहसिन ने बताया कि ड्राइवर ऐसा मालिकों की बिना जानकारी में करते हैं। इसका खामियाजा ट्रक मालिकों को ही भुगतना पड़ता है।

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