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डेथ इंजेक्शन लगाया.. 10 मिनट में ही मौत की नींद सो गया ‘मुन्ना’
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बरेली। सिर्फ दस मिनट.. और इतने भर में ही पांच साल से अब तक लगातार दिन भर बोझ ढोकर किशन बाबू के परिवार का पेट पालता आ रहा उनका घोड़ा मुन्ना हमेशा के लिए मौत की नींद में सो गया। वैसे मौत तो उसकी उसी दिन तय हो गई थी जब उसमें अत्यधिक संक्रमित जानलेवा बीमारी ग्लैंडर्स के लक्षणों की पुष्टि हुई थी, लेकिन उसे जबर्दस्त पीड़ा के साथ तिल-तिल मरने से बचाने और यह बीमारी और फैलने से रोकने के लिए हाल ही में मर्सी डेथ देने का फैसला किया गया था। बीसलपुर रोड पर राधा माधव स्कूल के सामने एक खाली मैदान में बुधवार को भारी माहौल में डॉक्टरों की टीम ने उसे डेथ इंजेक्शन दिया और दस मिनट में ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसे छह फुट गहरे गड्ढे में चूना-नमक आदि डालकर दफन कर दिया गया।
घोड़ों में पाई जाने वाली बीमारी ग्लैंडर्स देश भर में फैल रही है। शासन के निर्देश पर पिछले महीने बरेली जिले से 60 घोड़ों के ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। एक सप्ताह पहले रिपोर्ट आई तो उसमें रिठौरा के किशन बाबू और भोजीपुरा के गांव बोहित के अनोखेलाल के घोड़े में इस बीमारी की पुष्टि की गई थी। इसके बाद दोनों घोड़ों को मर्सी डेथ देने का फैसला लिया गया। किशन बाबू के घोड़े के बुधवार का दिन तय हुआ। इसी के तहत डॉक्टरों की टीम पूरी तैयारी से सुबह राधा माधव स्कूल के सामने खाली मैदान में पहुंची, जहां किशन अपने घोड़े के साथ पहले से मौजूद थे। पहले जेसीबी से मैदान में छह फुट गहरा गड्ढा खोदा गया। इसके बाद डॉक्टरों की टीम सुरक्षा उपकरणों से लैस हुई, फिर घोड़े को गड्ढे के पास ले जाकर इंजेक्शन लगाया। कुछ ही पलों के अंदर घोड़ा बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा और दस मिनट में ही उसकी सांसें थम गईं। डॉक्टरों ने उसकी मौत की पुष्टि करने के बाद उसे दफना दिया गया। ग्लैंडर्स के वाइरस न फैलें, इसके लिए गड्ढे में चूना-नमक समेत कई केमिकल भी डाले गए। डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा किट भी घोड़े के साथ दफन कर दी। श्यामगंज के पशु चिकित्साधिकारी रामलखन की अगुवाई में इस टीम में ब्रूक इंडिया संस्था के डॉ. दिनेश गुप्ता, डॉ. महेश चौधरी, ब्रूक इंडिया के सीनियर प्रोग्राम अफसर रमेश रंजन, साकार संस्था के परियोजना प्रबंधक विजय कृष्ण तिवारी मौजूद रहे।
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घोड़ों में पाई जाने वाली बीमारी ग्लैंडर्स देश भर में फैल रही है। शासन के निर्देश पर पिछले महीने बरेली जिले से 60 घोड़ों के ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। एक सप्ताह पहले रिपोर्ट आई तो उसमें रिठौरा के किशन बाबू और भोजीपुरा के गांव बोहित के अनोखेलाल के घोड़े में इस बीमारी की पुष्टि की गई थी। इसके बाद दोनों घोड़ों को मर्सी डेथ देने का फैसला लिया गया। किशन बाबू के घोड़े के बुधवार का दिन तय हुआ। इसी के तहत डॉक्टरों की टीम पूरी तैयारी से सुबह राधा माधव स्कूल के सामने खाली मैदान में पहुंची, जहां किशन अपने घोड़े के साथ पहले से मौजूद थे। पहले जेसीबी से मैदान में छह फुट गहरा गड्ढा खोदा गया। इसके बाद डॉक्टरों की टीम सुरक्षा उपकरणों से लैस हुई, फिर घोड़े को गड्ढे के पास ले जाकर इंजेक्शन लगाया। कुछ ही पलों के अंदर घोड़ा बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा और दस मिनट में ही उसकी सांसें थम गईं। डॉक्टरों ने उसकी मौत की पुष्टि करने के बाद उसे दफना दिया गया। ग्लैंडर्स के वाइरस न फैलें, इसके लिए गड्ढे में चूना-नमक समेत कई केमिकल भी डाले गए। डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा किट भी घोड़े के साथ दफन कर दी। श्यामगंज के पशु चिकित्साधिकारी रामलखन की अगुवाई में इस टीम में ब्रूक इंडिया संस्था के डॉ. दिनेश गुप्ता, डॉ. महेश चौधरी, ब्रूक इंडिया के सीनियर प्रोग्राम अफसर रमेश रंजन, साकार संस्था के परियोजना प्रबंधक विजय कृष्ण तिवारी मौजूद रहे।
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