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‘गीत में खत्म हो रही संवेदना, भावना और सामाजिक सरोकार’
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शाहजहांपुर। प्रसिद्ध कवि और गीतकार डॉ. कुंवर बेचैन ने वर्तमान में कविता, गीतों की स्थिति पर कहा कि समय, हालात बदलने के बाद कविता-गीतों के मानक भी बदलते हैं। इसी तरह के बदलाव इस समय देखने को मिल रहे हैं। यह बात डा. कुंवर बैचेन मुमुक्षु महोत्सव में कवि सम्मेलन में शामिल होने के दौरान अमर उजाला से कही।
उन्होंने कविता-गीतों में फूहड़पन और अश्लीलता पर टीस जताई। कहा कि अब दिखावा, पैसा कमाना और तालियां बटोरना ही मकसद बचा है। मंच पर गीत की स्थिति भी पहले जैसी नहीं है। पहले कवि पैसे के पीछे नहीं भागता था। उसके गीत में भावनाएं, संवेदनाएं, सामाजिक सरोकार हुआ करते थे। अब गीत-कविता में भावनाएं बहुत कम ही दिखती हैं। समय और हालात के साथ गीत के मानक बदते हैं तो इनमें कुछ अच्छाइयां भी हैं, लेकिन दिखावा और फूहड़पन अंतर्रात्मा को कचोटता है। फिल्मों में गीत लिखने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि उनकी कभी इच्छा नहीं रही कि वह फिल्मी दुनियां में आएं, फिल्मों के लिए गीत लिखें। इसके बाद भी तमाम फिल्मों में उनके गीत लिए गए हैं। कई पुरानी और नई फिल्मों में उनके गीत हैं, लेकिन उन्होंने सिर्फ फिल्मों के लिए गीत लिखने की बात कभी सोची भी नहीं। उन्होंने कहा कि कविता-गीत में जब तक संवेदनाएं, भावनाएं न हों तब तक वह लोगों से हमेशा के लिए नहीं जुड़ता। नए गीतकारों को इस बारे में सोचने की जरूरत है।
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उन्होंने कविता-गीतों में फूहड़पन और अश्लीलता पर टीस जताई। कहा कि अब दिखावा, पैसा कमाना और तालियां बटोरना ही मकसद बचा है। मंच पर गीत की स्थिति भी पहले जैसी नहीं है। पहले कवि पैसे के पीछे नहीं भागता था। उसके गीत में भावनाएं, संवेदनाएं, सामाजिक सरोकार हुआ करते थे। अब गीत-कविता में भावनाएं बहुत कम ही दिखती हैं। समय और हालात के साथ गीत के मानक बदते हैं तो इनमें कुछ अच्छाइयां भी हैं, लेकिन दिखावा और फूहड़पन अंतर्रात्मा को कचोटता है। फिल्मों में गीत लिखने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि उनकी कभी इच्छा नहीं रही कि वह फिल्मी दुनियां में आएं, फिल्मों के लिए गीत लिखें। इसके बाद भी तमाम फिल्मों में उनके गीत लिए गए हैं। कई पुरानी और नई फिल्मों में उनके गीत हैं, लेकिन उन्होंने सिर्फ फिल्मों के लिए गीत लिखने की बात कभी सोची भी नहीं। उन्होंने कहा कि कविता-गीत में जब तक संवेदनाएं, भावनाएं न हों तब तक वह लोगों से हमेशा के लिए नहीं जुड़ता। नए गीतकारों को इस बारे में सोचने की जरूरत है।
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