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8000 सरकारी कर्मचारियों ने रिन्यू नहीं कराए शस्त्र लाइसेंस
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sun, 19 Aug 2018 12:09 AM IST
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तय वक्त पर रिन्यू न कराने से करीब 8000 सरकारी कर्मचारियों के शस्त्र लाइसेंस अवैध हो चुके हैं, लेकिन जिला प्रशासन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। इन कर्मचारियों को सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय की तरफ से नोटिस तो दिए गए हैं, लेकिन उनके लाइसेंस जब्त करने की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्हें यह कहकर रियायत दी जा रही है कि उनका तबादला दूसरे जिलों में होने से वह शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करा पा रहे हैं।
प्रशासन ने जिले में करीब 48 हजार लोगों को शस्त्र लाइसेंस जारी किए हैं। इनमें करीब 12 हजार सरकारी कर्मचारी हैं। शस्त्र लाइसेंसधारकों को हर तीन वर्ष में लाइसेंस का नवीनीकरण करना होता है, लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि अन्य लोग तो इस जरूरी प्रक्रिया को समय पर पूरा कर रहे हैं लेकिन सरकारी कर्मचारी इसमें लगातार ढिलाई बरत रहे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, करीब आठ हजार सरकारी कर्मचारियों ने अपने लाइसेंस का रिन्यूवल नहीं कराया है। लिहाजा उनके शस्त्र अवैध हो गए हैं। नियमानुसार यह प्रक्रिया पूरी न करने वाले कर्मचारियों के लाइसेंस निरस्त कर उनके असलहे जब्त करने चाहिए लेकिन उन्हें अब तक केवल नोटिस ही भेजे गए हैं। प्रशासन कर्मचारियों के दूसरे जिलों में ट्रांसफर होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहा है।
वर्ष 2014 से नहीं बन रहे नए शस्त्र लाइसेंस
जिला प्रशासन ने वर्ष 2014 के पहले तक लोगों को अंधाधुंध शस्त्र लाइसेंस बांटे। इसमें आम लोगों के साथ सरकारी कर्मचारियों की भी बड़ी संख्या रही। बाद में हाईकोर्ट के आदेश के बाद नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद से प्रशासन केवल विरासत और वर्तमान लाइसेंस के नवीनीकरण ही हो रहे हैं। नए लाइसेंस न बनने से प्रशासन ने लोगों के नए आवेदन भी लेने बंद कर दिए हैं।
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शहरियों के पास 19 हजार, ग्रामीणों के पास 29 हजार लाइसेंस
प्रशासन ने जिले में जिन 48 हजार लोगों को शस्त्र लाइसेंस दिए हैं, उनमें शहर में रहने वालों की संख्या केवल 19 हजार ही है। बाकी 29 हजार ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग हैं। अभी भी लाइसेंस के लिए सबसे ज्यादा सिफारिशें गांवों से ही आ रही हैं, लेकिन ऊपर से ही प्रक्रिया बंद होने से उनके लाइसेंस नहीं बन पा रहे।
शस्त्र लाइसेंसों का रिन्यूवल न कराने वाले सरकारी कर्मचारियों को पहले भी नोटिस दिए जा चुके हैं। उनके स्थानांतरण होने से दिक्कत आ रही है। कोशिश की जा रही कि सभी के लाइसेंसों का नवीनीकरण जल्द करा लिया जाए। - गणेश प्रसाद सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
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प्रशासन ने जिले में करीब 48 हजार लोगों को शस्त्र लाइसेंस जारी किए हैं। इनमें करीब 12 हजार सरकारी कर्मचारी हैं। शस्त्र लाइसेंसधारकों को हर तीन वर्ष में लाइसेंस का नवीनीकरण करना होता है, लेकिन हैरानी वाली बात यह है कि अन्य लोग तो इस जरूरी प्रक्रिया को समय पर पूरा कर रहे हैं लेकिन सरकारी कर्मचारी इसमें लगातार ढिलाई बरत रहे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, करीब आठ हजार सरकारी कर्मचारियों ने अपने लाइसेंस का रिन्यूवल नहीं कराया है। लिहाजा उनके शस्त्र अवैध हो गए हैं। नियमानुसार यह प्रक्रिया पूरी न करने वाले कर्मचारियों के लाइसेंस निरस्त कर उनके असलहे जब्त करने चाहिए लेकिन उन्हें अब तक केवल नोटिस ही भेजे गए हैं। प्रशासन कर्मचारियों के दूसरे जिलों में ट्रांसफर होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहा है।
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वर्ष 2014 से नहीं बन रहे नए शस्त्र लाइसेंस
जिला प्रशासन ने वर्ष 2014 के पहले तक लोगों को अंधाधुंध शस्त्र लाइसेंस बांटे। इसमें आम लोगों के साथ सरकारी कर्मचारियों की भी बड़ी संख्या रही। बाद में हाईकोर्ट के आदेश के बाद नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद से प्रशासन केवल विरासत और वर्तमान लाइसेंस के नवीनीकरण ही हो रहे हैं। नए लाइसेंस न बनने से प्रशासन ने लोगों के नए आवेदन भी लेने बंद कर दिए हैं।
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शहरियों के पास 19 हजार, ग्रामीणों के पास 29 हजार लाइसेंस
प्रशासन ने जिले में जिन 48 हजार लोगों को शस्त्र लाइसेंस दिए हैं, उनमें शहर में रहने वालों की संख्या केवल 19 हजार ही है। बाकी 29 हजार ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग हैं। अभी भी लाइसेंस के लिए सबसे ज्यादा सिफारिशें गांवों से ही आ रही हैं, लेकिन ऊपर से ही प्रक्रिया बंद होने से उनके लाइसेंस नहीं बन पा रहे।
शस्त्र लाइसेंसों का रिन्यूवल न कराने वाले सरकारी कर्मचारियों को पहले भी नोटिस दिए जा चुके हैं। उनके स्थानांतरण होने से दिक्कत आ रही है। कोशिश की जा रही कि सभी के लाइसेंसों का नवीनीकरण जल्द करा लिया जाए। - गणेश प्रसाद सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट